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त्रिकोणीय संघर्ष में उलझा गोवा: कांग्रेस, भाजपा, आप के अपने-अपने दावे

कमल मित्र चिनॉय | Updated on: 10 January 2017, 8:18 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

गोवा के राजनीतिक समीकरणों को देखें, तो यह राज्य अन्य सूबों से काफी हटकर है. पंचायतें और उनके निर्वाचन क्षेत्र अपने-अपने इलाकों में काफी मजबूत हैं. उनके समर्थन के बिना सशक्त उम्मीदवारों के जीतने की संभावनाएं भी कम हो जाती है. इस बार चुनाव का मुख्य मुद्दा नोटबंदी है. गरीब से लेकर मध्यम स्तर और कारोबारी समुदाय तक, सभी नोटबंदी से मिली दुश्वारियां झेल रहे हैं. जितने हफ्ते कतारें रहीं, उस लिहाज से गोवा में कतारें कम थीं. पर गंभीर समस्याएं जरूर रहीं.

चाहे किसी डिपार्टमेंटल स्टोर का हेल्पर हो, रेस्तरां का वेटर हो, कैब ड्राइवर, डॉक्टर, भोजनालय या कारोबारी, सब एकमत हैं कि नोटबंदी से लगातार त्रासदी बनी रही. इस संकट से यह धारणा जरूर बन गई है कि भाजपा गोवा में फरवरी के शुरू में होने वाले चुनावों में बुरी तरह हारेगी. 

भाजपा संकट में

भाजपा संकट बाकियों से अलग और बड़ा है. मसलन गोवा सुरक्षा मंच (जीएसएम) के संचालक सुभाष वेलिंगकर भाजपा पर खुलकर निशाना साध रहे हैं. जबकि जीएसएम पूरी तरह से आरएसएस की संस्था है. नवहिंद टाइम्स की हेडलाइंस में वेलिंगकर को कोट किय गया है- ‘इस क्षेत्र में शत प्रतिशत आरएसएस काडर भाजपा के विरुद्ध है.’

यह सत्तासीन पार्टी के लिए गहरा झटका है. महत्वपूर्ण आरएसएस काडर जीएसएम की ओर रुख कर रहे हैं. गोवा क्षेत्र से आरएसएस के वरिष्ठ सदस्य और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के विश्वस्त कृष्णराज ‘राजू’ सुकेरकर जीएसएम उम्मीदवार के तौर पर पणजी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ने को राजी हो गए हैं. 

गोवा के सीएम लक्ष्मीकांत परसेकर ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की परंपरागत नीति का अनुसरण करते हुए कैथोलिक समुदाय के लगभग 25 फीसदी उम्मीदवार के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व को राजी कर लिया है. पर गोवा के प्रधान पादरी सहित कैथोलिक पादरी परसेकर सरकार के तीखे आलोचक रहे हैं. इसलिए हो सकता है कि भाजपा को कैथोलिक सहयोग नहीं मिले.

कैथोलिक नेता स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग चाहते हैं, जिसे सरकार ने रोक दिया. भाजपा और जीएसएम को छोडक़र लगभग सभी स्तरों और समुदाय के लोग अंग्रेजी शिक्षा का समर्थन करते हैं. फरवरी की शुरुआत में होने वाले चुनावों में यह भी एक अहं मुद्दा रहेगा.

जंग में अन्य

इन चुनावों में सबसे मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस लगती है और उसके बाद आम आदमी पार्टी (आप). पर आप के भीतर एकता नहीं है, और दूसरा, उनका किसी के साथ गठबंधन नहीं करने का सैद्धांतिक दृष्टिकोण उनके लिए उलटा पड़ेगा. 

अरविंद केजरीवाल ने गोवा के कई दौरे किए हैं, पर उनका संगठन पंचायतों को विश्वास में नहीं ले सका. या खुद को कांग्रेस का मुख्य विकल्प सिद्ध करने के लिए पर्याप्त संख्या में पक्के समर्थक बोर्ड पर नहीं ला सका. केजरीवाल के भाषण दिल्ली में आप के काम पर केंद्रित रहे. उन्होंने गोवावासियों को परेशान कर रहे मुख्य मुद्दों को नहीं उठाया.

मूलत: आप का गोवा संगठन अपेक्षाकृत कमजोर है, इसके बावजूद कि सीएम का मजबूत उम्मीदवार एल्विस गोम्स का यहां काफी सम्मान है. कांग्रेस के लिए धारणा है कि यह भ्रष्ट हो सकती है, पर यह गोवा के विकास के लिए संजीदगी से समर्पित है. गोवावासी इस पार्टी के आदी हैं और उसे अच्छी तरह समझते हैं.

जीएसएम, गोवा फॉर्वर्ड पार्टी जैसी छोटी पार्टियां चुनावी खेल को बिगाड़ेंगी. जीएसएम भाजपा को और नुकसान पहुंचाएगी. नोटबंदी को लेकर पैदा हुई दुश्वारियों के कारण भाजपा पहले ही बदनाम है. तो यह है गोवा की चुनावी संभावनाएं-कांग्रेस जीत सकती है, आप दूसरे स्थान पर, और भाजपा पिछलगी. 

First published: 10 January 2017, 8:18 IST
 
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