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सिंगूर: टाटा कारखाने के स्क्रैप की 1400 करोड़ में नीलामी

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 15 November 2016, 7:32 IST
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा नैनो परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को लौटाने के लिए टाटा समूह को वहां पड़े कारों के शेड्स और कारखाने का अन्य बेकार सामान हटाना था. 
  • इस संबंध में टाटा समूह कुछ तय करता, इससे पहले बंगाल सरकार ने स्क्रैप की नीलामी का फैसला ले लिया.

कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल सरकार के लोक निर्माण विभाग ने सिंगूर में टाटा नैनो परियोजना के सभी सामानों की कीमत का आकलन करवाया था.  जिसमें कार के शेड्स के छोटे-बड़े टुकड़ों के अलावा कारखाने की अन्य फुटकर चीजें भी थीं. उनके अनुमान से उसकी कीमत 1400 करोड़ रुपए है. 

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सिंगूर की अधिग्रहित जमीन किसानों को लौटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लगभग दो महीने हो गए हैं. जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है, पर स्क्रैप का क्या करना है, इस संबंध में टाटा ने अपनी योजना अब तक नहीं बताई है.

राज्य सरकार के शीर्ष स्रोतों के मुताबिक सिंगूर में स्क्रैप की नीलामी की प्रक्रिया नवंबर के दूसरे हफ्ते में शुरू होगी और सरकार को बताया गया है कि कुछ निजी निकाय उसे लेने को उत्सुक हैं. राज्य सरकार के सूत्रों के मुताबिक टाटा समूह ने वेस्ट बंगाल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कारपोरेशन से जमीन खरीदने के लिए लगभग 150 करोड़ रुपए दिए थे.

लोक निर्माण विभाग को वहां से 1.5 लाख वर्ग फुट शेड और 22 छोटे शेड लाने पड़े और अब ये सिंगूर के जॉयमलया गांव में पड़े हैं. इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक निजी सुरक्षा एजेंसी को दी गई है. राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टाटा समूह ने उस सामान का अभी तक मूल्य नहीं लगाया है, इसलिए सरकारी अधिकारियों को उसका मूल्यांकन करवाना पड़ा और उसके आधार पर उसकी नीलामी की जाएगी.

ज़मीन लौटाने का दबाव

उक्त स्क्रैप को वीडियो में रिकार्ड किया गया है और प्रांगण में 24 घंटे चौकसी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. शुरू में राज्य सरकार ने सभी शेड्स और स्क्रैप को सिंगूर के निकट वेस्ट बंगाल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कारपोरेशन की 12 एकड़ जमीन पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया था. पर बाद में मालूम हुआ कि यह जमीन उसके लिए कम पड़ेगी और इसीलिए सरकार ने उसकी नीलामी करना तय किया.  

राज्य के संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, 'चूंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार किसानों को जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, इसलिए जमीन खाली करनी थी और इसीलिए सरकार ने उसकी नीलामी करने का फैसला लिया है'. 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में टाटा नैनो परियोजना के लिए सिंगूर में अधिग्रहित जमीन को गैरकानूनी बताया था और राज्य सरकार को उसे किसानों को लौटाने के आदेश दिए थे. 

इसके लिए कोर्ट ने नवंबर तक का वक्त दिया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही कह दिया था कि वे इस आदेश की पालना 15 नवंबर तक कर लेंगी और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को अनुपालन रिपोर्ट भेज दी जाएगी. इस संबंध में जब टाटा के अधिकारियों और वकीलों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी तरफ से कुछ भी कहना नहीं चाहा.

First published: 15 November 2016, 7:32 IST
 
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