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बंगाल ने तेज किया बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदुओं को वीजा देने का काम

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 4 August 2016, 9:38 IST
QUICK PILL
  • केंद्र सरकार के अधिसूचना जारी किए जाने के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए लंबी अवधि वाले वीजा की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है.
  • गृह मंत्रालय ने एक जुलाई को असम को छोड़कर को सभी राज्यों को अधिसूचना जारी करते हुए उनसे दो सदस्यीय ट्रिब्यूनल बनाए जाने का आदेश दिया था ताकि लंबी अवधि वाले वीजा संबंधी आवेदनों को तेजी सेे निपटाया जा सके.

केंद्र सरकार के अधिसूचना जारी किए जाने के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए लंबी अवधि वाले वीजा की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है.

बंगाल सरकार ने एक ट्रिब्यूनल बनाया है जो यह जांच करेगा कि इन देशों से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक वाकई में वहां पर सताए गए हैं या नहीं. गृह मंत्रालय ने एक जुलाई को असम को छोड़कर सभी राज्यों को अधिसूचना जारी करते हुए उनसे दो सदस्यीय ट्रिब्यूनल बनाए जाने का आदेश दिया था ताकि लंबी अवधि वाले वीजा संबंधी आवेदनों को तेजी सेे निपटाया जा सके.

एक जुलाई को मंत्रालय की तरफ से जारी हुआ सर्कुलर दरअसल 1964 के आदेश का संशोधन है, जिसके तहत राज्यों को ट्रिब्यूनल बनाकर नागरिकता संबंधी मामले पर फैसला लेने को कहा गया है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य सरकार को बांग्लादेश और पाकिस्तान से करीब 4,000 लोगों से लंबी अवधि के वीजा के आवेदन मिले हैं.

राज्य सरकार को बांग्लादेश और पाकिस्तान से करीब 4,000 लोगों से लंबी अवधि के वीजा के आवेदन मिले हैं

एनडीए का जोर

सात सितंबर 2015 को एनडीए सरकार ने सभी राज्यों को सर्कुलर जारी कर पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक तौर पर पीड़ित अल्पसंख्यकों मसलन हिंदू, बौद्ध, जैन और ईसाइयों को देश में लंबी अवधि का वीजा दिए जाने की बात की थी. ताकि वह बिना किसी परेशानी के देश में अपन जिंदगी सुकून के साथ गुजार सकें.

बीजेपी का कहना रहा है कि इन देशों से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक दरअसल शरणार्थी हैं जबकि मुस्लिम घुसपैठ के लिए आते हैं.

सूत्रों के मुताबिक लंबी अवधि वाले वीजा को बाद में नागरिकता में तब्दील किया जा सकता है. केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक लंबी अवधि वाले वीजा आवेदनों को 90 दिनों के भीतर निपटाना होगा.

गृह मंत्रालय ने 11 जुलाई को इस मसले पर बैठक बुलाई थी और इसमें सभी राज्यों के गृह विभाग के अधिकारियों को शामिल होने के लिए कहा गया था.

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें जल्द से जल्द ट्रिब्यूनल को स्थापित करने के लिए कहा गया है ताकि आवेदनों को तेजी से निपटाया जा सके. 

पश्चिम बंगाल की गृह सचिव मलय डे ने कहा कि उनके राज्य में ट्रिब्यूनल को स्थापित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और उम्मीद है कि इसका काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. 

First published: 4 August 2016, 9:38 IST
 
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