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पश्चिम बंगाल: सरकारी नौकरियों की भर्ती में मुसलमानों की संख्या में तीखी गिरावट

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 6 November 2016, 7:39 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक कमीशन बनाने की घोषणा की थी. 
  • मगर इससे पहले सरकार की तरफ़ से प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में मुस्लिम कर्मचारियों की भर्ती में अचानक से तेज़ गिरावट दर्ज की गई है. 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा था कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों की तरक़्क़ी के लिए बढिय़ा काम कर रही है. मगर स्टाफ सेंसस पर प्रकाशित ब्यूरो ऑफ एप्लाइड इकोनोमिक्स एंड स्टेटस्टिक्स, 2014-15 की रिपोर्ट कुछ और ही बयान करती है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में सरकारी नौकरियों में भर्ती 3,312 लाख कर्मचारियों में मुस्लिमों की संख्या महज 18,991 थी.

कैच को मिली यह रिपोर्ट इसी साल तैयार की गई थी. उसमें कहा गया है कि 2013-14 की तुलना में 2014-15 में सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या में भी जबरदस्त गिरावट आई है. 2013-14 में 353,525 लोगों को सरकारी नौकरियां दी गई थीं, जबकि एक साल में ही यह संख्या 22,276 घट गई. यह विडंबना ही है क्योंकि बनर्जी ने हाल में घोषणा की थी कि सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भर्ती के लिए सरकार एक कमीशन बनाएगी. 

वेतन में खामी

दिलचस्प यह है कि इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रुप डी (10 फीसदी) और ग्रुप सी (6 फीसदी) में भर्ती लोगों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई है. असल में ग्रुप डी स्टाफ का वेतन एक साल में 404 रुपए घट गया, जबकि ग्रुप ए अधिकारियों का वेतन 3000 रुपए बढ़ गया. 

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ग्रुप डी और ग्रुप ए स्टाफ के वेतन में इस तरह के अंतर से राज्य सरकार चिंतित है और ग्रुप डी की वेतन संरचना में इस तरह की असंगति से नाराज भी हैं. 

गड़बड़ अनुपात

3312 लाख कर्मचारियों में औरतें महज 20.94 फीसदी हैं, जबकि अनुसूचित जाति/ जनजाति की संख्या क्रमश: 17.66 और 5.07 फीसदी है. 

रिपोर्ट में इसका भी उल्लेख है कि अनुसूचित जाति/ जनजाति के कर्मचारियों की संख्या भी 2013-14 से 2014-15 में कम हो गई है. पहले 62462 थी, जो बाद में 58508 रह गई. अन्य पिछड़े वर्ग में सरकारी कर्मचारियों की संख्या भी जो 2013-14 में 15000 थी 14478 रह गई. 

सरकार विरोधी रिपोर्ट का प्रकाशन क्यों?

टीएमसी समर्थित पश्चिम बंगाल राज्य सरकार कर्मचारी संघ के सदस्य इस बात से हैरान है कि जो रिपोर्ट राज्य सरकार की कमियों को उजागर करती है, आखिर सरकार ने उसे क्यों प्रकाशित किया है. 

बीजेपी समर्थित पश्चिम बंगाल सरकारी कर्मचारी परिषद ने कहा कि रिपोर्ट से जाहिर है कि किस कदर राज्य सरकार कर्मचारियों की भर्ती में भेदभाव कर रही है, बनर्जी के इस दावे के बावजूद कि उन्होंने अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए काफी कुछ किया है.  

First published: 6 November 2016, 7:39 IST
 
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