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बंगाल ने अन्य राज्यों के डॉक्टरों के लिए दरवाज़े खोले

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 26 September 2016, 3:58 IST
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में चिकित्सकों के लगभग 5,000 रिक्त स्थानों को भरने के लिए नई नीति बनाई.
  • वहीं इस नीति से बंगाल के डॉक्टर चिंतित हैं कि कहीं इससे वेतनमानों में असमानता तो नहीं रहेगी?

पश्चिम बंगाल में चिकित्सकों की इतनी कमी है कि लगभग 5,000 स्थान खाली पड़े हैं. इस कमी को पूरा करने के लिए यहां के स्वास्थ्य विभाग ने हाल में एक नीति बनाई है, जिसमें अन्य राज्यों के चिकित्सकों को राज्य में काम करने की अनुमति दी गई है. बस इसके लिए उनका अपने राज्यों में प्रामाणिक पंजीयन आवश्यक है. 

सरकार का यह फैसला स्थानीय चिकित्सकों को रास नहीं आया है और वे बेहद नाराज हैं. उनकी चिंता है कि यदि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अन्य राज्यों से भारी संख्या में चिकित्सक आए, तो वेतन में असमानताएं रहेंगी.

शुक्रवार को प्रमुख सचिव (सेहत) आर.एस.शुक्ला और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में चिकित्सों की कमी को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों से चिकित्सकों की भरती करेगी.

शुक्ला ने आगे बताया कि इस नीति के लिए पश्चिम बंगाल सेवा नियमों में संशोधन किया जाएगा, ताकि अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड चिकित्सक यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम कर सकें. यह संशोधन विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है.

चिकित्सकों की कमी

राज्य सरकार का अनुमान है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 5,000 चिकित्सकों की कमी है. और नए सरकारी कॉलेज खुले, तो इनकी आवश्यकता और बढ़ जाएगी. इस फैसले से यहां के चिकित्सकों के बीच खलबली मच गई है। 'बाहरी' चिकित्सकों की भरती पश्चिम बंगाल हैल्थ रिक्रूटमेंट बोर्ड (तृणमूल कांग्रेस की मुख्यमंत्री ममता ने शुरू किया था) करेगा, जिससे स्थानीय डॉक्टर्स को फायदा होगा, पर इसका दूसरा पहलू यह है कि वेतनमानों में असमानता रहेगी, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में वेतन के पैकेज अलग-अलग हैं.

एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, 'राज्य सरकार को अन्य राज्यों से भरती चिकित्सकों को आश्वासन देना होगा कि उनके वेतनमानों में कोई असमानता नहीं रहेगी वरना कोई भी चिकित्सक बंगाल में काम करने नहीं आएगा. साथ ही स्थानीय चिकित्सकों को असमान वेतनमान खले नहीं, इसके लिए समान वेतनमान तय करने की आवश्यकता है.'

क्या कहते हैं प्रोफेशनल्स?

इस कदम का भारतीय मेडिकल परिषद ने समर्थन किया है. उसका कहना है कि इससे पश्चिम बंगाल सरकार को चिकित्सकों की कमी पूरा करने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ प्रोफेसरों ने कहा कि राज्य को कोई भी नीति बनाने से पहले हमेशा स्थानीय चिकित्सकों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बंगाल शाखा के एक वरिष्ठ सदस्य डॉ. शान्तनु सेन ने कहा, 'हम इस कदम का स्वागत करते हैं क्योंकि हम लंबे समय से राज्य सरकार से चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए एक नीति बनाने का अनुरोध कर रहे थे.'

सीपीआई (एम) से समर्थित एसोसिएशन ऑफ हैल्थ सर्विस डॉक्टर्स के सदस्य डॉ. सत्यजित चक्रवर्ती ने कहा, 'यदि अन्य राज्यों के चिकित्सक यहां बुलाए जाते हैं, तो राज्य सरकार को आश्वासान देना चाहिए कि सबके लिए वेतनमान समान होंगे, नहीं तो बंगाल में सेहत से जुड़े कामकाज में समस्याएं रहेंगी.'

First published: 26 September 2016, 3:58 IST
 
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