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चावल मिल में काम करने वाले येदियुरप्पा ने दक्षिण में BJP के लिए खोले थे द्वार

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 May 2018, 10:21 IST

डॉ॰ बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा यह एक ऐसा नाम है जिनके साथ विवादों का पुराना नाता रहा है. आज (17 मई) को वह भाजपा की तरफ से कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए. इससे पहले वह दो बार और कर्नाटक के सीएम बने थे. पहली बार उन्होंने 30 मई 2008 कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके साथ ही दक्षिण में घुसने के लिए बेताब बीजेपी को इन्होंने वहां पैर जमाने का मौका दिया था.

कौन हैं येदियुरप्पा?
येदियुरप्पा का जन्म कर्नाटक के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में 27 फरवरी 1943 को लिंगायत परिवार में हुआ था. कर्नाटक विधानसभा की करीब 100 सीटें ऐसी हैं जहां लिंगायत समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव रहता है और ये निर्णायक भूमिका निभाते हैं. येदियुरप्पा कर्नाटक की शिकारीपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होने साल 2014 का लोकसभा चुनाव शिमोगा लोकसभा क्षेत्र से जीता था.

2008 मे हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को येदियुरप्पा के नेतृत्व में ही जीत मिली थी. 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान येदियुरप्पा ने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था. जिसकी वजह से बीजेपी को भारी नुकसान हुआ था और उसकी सरकार चली गई थी. 2013 के चुनाव में भाजपा को महज 40 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था.

वे साल 2007 में जद(एस) के साथ गठबंधन टूटने से पहले भी थोड़े समय के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे. वे किसी भी दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं. मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगे.

 

कभी चावल मिल में थे क्लर्क
उनके पिता का नाम सिद्धलिंगप्पा और माता का नाम पुट्टतायम्मा था. कर्नाटक के तुमकुर जिले में येदियुर स्थान पर संत सिद्धलिंगेश्वर द्वारा बनाए गए शैव मंदिर के नाम पर उनका नाम रखा गया था. जब येदियुरप्पा चार साल के थे तब ही इनकी माता की मौत हो गई थी. उन्होंने कला से स्नातक किया है. 1965 में वे समाज कल्याण विभाग के प्रथम श्रेणी के किरानी चुए गए.

लेकिन वे शिकारीपुर चले गए जहां उन्होंने वीरभद्र शास्त्री चावल मिल में क्लर्क की नौकरी कर ली. 1967 में उन्होंने वीरभद्र शास्त्री की पुत्री मैत्रादेवी से शादी की थी. बाद के दिनों में उन्होंने शिमोगा में हार्डवेयर की दुकान खोली. येदियुरप्पा के दो पुत्र, बी वाई राघवेंद्र और विजयेंद्र एवं दो पुत्री अरूणादेवी, पद्मावती और उमादेवी हैं. 2004 में एक दुर्घटना में उनकी पत्नी की मौत हो चुकी है.

First published: 17 May 2018, 10:13 IST
 
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