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मैं मीडिया से तभी रुबरु होती हूं, जब ज़रूरी होता है: मायावती

अतुल चंद्रा | Updated on: 11 October 2016, 10:18 IST
QUICK PILL
  • कांशीराम की 10वीं पुण्यतिथि पर मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मोदी सेना के ऑपरेशन का क्रेडिट ले रहे हैं जबकि अखिलेश मेट्रो जैसी उन विकास परियोजनाओं पर वाहवाही लूट रहे हैं जिसकी शुरुआत उन्होंने की थी.

बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्य तिथि पर लखनऊ के कांशीराम स्मारक पर पार्टी सुप्रीमो मायावती ने लगभग गए लाख लोगों की भीड़ को संबोधित किया. उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मीडिया से आगाह करते हुए इससे दूर रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि मैं मीडिया से तभी रूबरू होती हूं जब जरूरी होता है. जब मीडिया के लोग कोई प्रहार करते हैं तो मैं उसी अनुपात में अपना तैयार किया गया बयान पढ़ देती हूं.

उन्होंने प्रभावशाली तरीके से कहा कि वे किसी का लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ती हैं, कभी भी कोई उनका कोई स्पीच राइटर नहीं रहा. उन्होंने कहा कि मैं अपना ही लिखा गया भाषण पढ़ती हूं. जब मैं मुख्यमंत्री थी तब लोग सोचते थे कि मैं किसी ब्यूरोक्रेट का लिखा भाषण पढ़ती हूं, पर वाकई में ऐसा नहीं था. उन्होंने कहा कि अपना भाषण लिखने के बाद वह उसे पढ़ती हैं. जहां बोलना होता है, वहां बोलती हैं जनता हो या प्रेस के सामने.

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मायावती की रैली में भारी भीड़ जुटी थी. उनकी पार्टी के लोग पूरे उत्तर प्रदेश से 19 ट्रेनों और 200 से ज्यादा बसों में बैठकर लखनऊ आए थे. काफी लोग अपने साधनों से आए थे. 15 ट्रेन तो पश्चिमी उत्त प्रदेश से ठसाठस भरी हुई आईं थी. पश्चिमी उप्र को मायावती का गढ़ समझा जाता है. पार्टी के राज्यसभा सदस्य सतीश चन्द्र मिश्र का अनुमान है कि इस रैली में कई लाख लोगों ने हिस्सा लिया है.

पश्चिमी उप्र के प्रति मायावती का लगाव किसी से छिपा नहीं है. वह पश्चिमी उप्र के हित के लिए कोई मौका हाथ से नहीं जाने देतीं. इस बार भी बसपा नेता ने अलग राज्य की मांग के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ भी पश्चिमी यूपी में स्थापित किए जाने की मांग रखी.

पश्चिमी उप्र में खंडपीठ का स्थापना का मुद्दा हमेशा से काफी पेचीदा रहा है. काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए समय-समय पर यह मांग उठती रही है. यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका समाधान बसपा सुप्रीमो सत्ता में रहते हुए भी नहीं कर सकी थीं. उन्होंने पश्चिमी उप्र के वकीलों और वादकारियों को भावनात्मक रूप से छू जाने जाने वाले इस मुद्दे को फिर से उकेरा.

मोदी पर हमला

बसपा सुप्रीमो ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी जमकर हमला बोला. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा उनके सीधे निशाने पर रही. उन्होंने अपने विरोधियों को हर मुद्दे पर घेरा. मायावती ने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, कट्टरपंथी और साम्प्रदायिक ताकतें ज्यादा सक्रिय हो गईं हैं. गाय के नाम पर गौरक्षक दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और बर्बरता कर रहे हैं. उन्होंने दलितों और मुसलमानों के एकजुट होने पर बल दिया और इसके लिए अपना पूरा साथ देने की बात कही.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलितों और मुसलमानों के एकजुट हो जाने से पश्चिमी उप्र में मायावती का आधार मजबूत होगा क्योंकि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुस्लिम समाजवादी पार्टी की उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं. मायावती ने बिसाहड़ा गांव में अखलाक की हत्या, गुजरात की उना घटना, रोहित वेमुला हत्याकांड और भाजपा के पूर्व नेता दयाशंकर सिंह द्वारा अपने ऊपर की गई अपमानजनक टिप्पणी पर भी जमकर आक्रोश व्यक्त किया.

अपने क्षेत्र के मतदाताओं के लिए उनका तीसरा प्रलोभन था-अलग राज्य की स्थापना. उन्होंने पश्चिमी उप्र को अलग राज्य बनाने की मांग को फिर दोहराया. पश्चिमी उप्र में 26 जिले आते हैं. उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उनकी सरकार ने दो बार अलग से हरित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव पारित किया था. प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेजा गया था, पर केन्द्र ने इस दिशा में अभी तक कुछ नहीं किया है.

भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति का खेल खेल रही है. इसका श्रेय केवल सेना को दिया जाना चाहिए.

हालांकि, उनकी सरकार के प्रस्तावों में सिर्फ पश्चिमी उप्र को अलग करने वाला ही प्रस्ताव नहीं था, बल्कि इसमें अलग से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुन्देलखंड राज्य की स्थापना वाला प्रस्ताव भी था. 2014 में राष्ट्रीय लोकदल भी अलग से पश्चिमी उप्र की मांग में शामिल हो गया. मायावती ने प्रधानमंत्री को भी कई मुद्दों पर उनकी वादाखिलाफी, मसलन, रोजगार के अवसर न उत्पन्न करना, गरीबी कम न होना, चावल, आटा, दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी न आना आदि पर आड़े हाथों लिया.

मायावती ने प्रधानमंत्री की यह कहते हुए भी आलोचना की कि उन्होंने गोरखपुर में फर्टीलाइजर प्लांट की केवल आधारशिला रख दी है. प्लान्ट को ऑपरेशन में लाने के लिए कुछ नहीं किया गया, ताकि रोजगार के अवसर तो उत्पन्न होते.

समाजवादी सरकार पर भी हमला

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की समाजवादी सरकार पर भी हमला बोला. कहा कि सपा सरकार पब्लिसिटी के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और लखनऊ मेट्रो जैसी परियोजनाओं का श्रेय खुद ले रही है जबकि मेट्रो परियोजना उनके कार्यकाल की है. उनके आकलन में अखिलेश यादव सरकार सभी मोर्चों कानून-व्यवस्था, बिजली, स्वास्थ्य सभी पर विफल रही है.

इसी तरह के आरोप उन्होंने दिल्ली की एनडीए सरकार पर भी लगाए. मायावती ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पार जाकर सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है. सत्तारूढ़ भाजपा सरकार इसका राजनीतिक लाभ ले रही है. मायावती ने कहा कि इसका श्रेय सेना को दिया जाना चाहिए, किसी राजनीतिक दल को नहीं.

First published: 11 October 2016, 10:18 IST
 
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