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संविधान में बदलाव कर बने राम मंदिर: आरएसएस प्रमुख

अश्विन अघोर | Updated on: 31 January 2016, 21:39 IST
QUICK PILL
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर से विवादित बयान देते हुए कहा कि संविधान में बदलाव कर राम मंदिर बनाए जाने का रास्ता निकाला जाना चाहिए.
  • भागवत ने दावा किया कि पूरी दुनिया भगवान राम को भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान मान चुकी है और इस वजह से मंदिर बनाए जाने में कोई नुकसान नहीं है.

ऐसा लगता है कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद कभी खत्म नहीं होगी. गुरुवार को जारी अपने संस्मरण में इस मसले को लेकर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी राजीव गांधी सरकार की आलोचना की है. संयोगवश इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख ने मोहन भागवत ने एक बार फिर से राम मंदिर बनाए जाने के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि भारत के संविधान में बदलाव कर मंदिर को बनाए जाने का रास्ता निकाला जाना चाहिए.

भागवत पुणे के एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्मेंट में छात्रों के साथ बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने के लिए संविधान में बदलाव जरूरी है. हालांकि जब एक छात्र ने उनसे यह पूछा कि 'क्या मंदिर बनाए जाने से गरीबों को भोजन मिलेगा?' तो उन्होंने कहा, 'मंदिर नहीं बनाए जाने की वजह से क्या गरीबों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है?'

अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि यह हिंदू मान्यता और संस्कृति का सवाल है

भागवत ने कहा कि पूरी दुनिया भगवान राम को हिंदू संस्कृति और सभ्यता का पहचान मान चुकी है. उन्होंने कहा, 'यह मामला केवल मंदिर बनाने का नहीं है. यह हिंदू मान्यता और संस्कृति का सवाल है. मंदिर बनाए जाने में कोई नुकसान नहीं है.'

बयान को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की उम्मीद थी और वहीं हुआ भी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, 'यह सही है कि संविधान ने खुद ही संशोधन का विकल्प दे रखा है लेकिन कोई इसकी मूल भावना में बदलाव नहीं कर सकता. संघ यही काम करने की कोशिश कर रहा है.'

राजनीतिक का सांप्रदायिकीकरण हमारी चिंता नहीं है. यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए जो ऐसा कर रहे हैं

उन्होंने कहा, 'यह सांप्रदायिक एजेंडा थोपे जाने की कोशिश है लेकिन हम इसे नहीं होने देंगे.  बीजेपी सत्ता में एक साल से अधिक तक रह चुकी है और उसने गरीबों को भोजन देने के लिए क्या किया है? राम मंदिर का मामला कोर्ट में लंबित है. हमें फैसले का इंतजार करना चाहिए. हर कोई उसे स्वीकार करेगा.'

जब एक छात्र ने उनसे सांप्रदायिकरण की राजनीति को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि यह उनकी चिंता का विषय नहीं है. उन्होंने कहा, 'जो ऐसा कर रहे हैं, यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए. जैसा मैंने कहा कि हम वहीं करेंगे जो कह रहे हैं और हमें वहीं बोलना चाहिए जो हम सोच रहे हैं. समाज में बदलाव लाने का यही तरीका है.'

First published: 31 January 2016, 21:39 IST
 
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