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'राष्ट्रगान से वह भाव नहीं पैदा होता, जो वंदेमातरम से होता है'

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 April 2016, 8:45 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि राष्ट्रगान जन गण मन से वह भाव नहीं पैदा होता, जो वंदे मातरम से होता है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'वंदेमातरम तो जन गण मन से पहले बना था, लेकिन हमें जन गण मन को सम्मान देना चाहिए'.

भैयाजी जोशी ने यह बातें मुंबई के दीनदयाल उपाध्याय रिसर्च इन्स्टीट्यूट में भाषण देते हुए कही. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि 'वर्तमान समय में जन गण मन हमारा राष्ट्रगान है. इसका सम्मान किया जाना चाहिए. इससे दूसरी भावना उत्पन्न होने का कोई कारण नहीं है. संविधान के अनुसार यह हमारा राष्ट्रगान है लेकिन वास्तविक अर्थों पर विचार करें तो वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगान है'.

जोशी ने कहा कि 'जन गण मन कब लिखा गया? इसे कुछ वक्त पहले लिखा गया था लेकिन जन गण मन में राष्ट्र को ध्यान में रखकर भावनाएं व्यक्त की गई हैं.'

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, 'हालांकि वंदे मातरम् में जाहिर की गई भावनाएं राष्ट्र की विशेषता और बनावट को रेखांकित करती हैं. यह दोनों गीतों के बीच का अंतर है. दोनों का सम्मान किया जाना चाहिए'.

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंद मठ से ली गई एक कविता का अंश है. साल 1950 में इस कविता के दो छंदों को ‘‘राष्ट्रगीत’’ का आधिकारिक दर्जा दिया गया था.

First published: 3 April 2016, 8:45 IST
 
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