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Bharat Bandh: मोदी सरकार के खिलाफ भारत बंद, फिर BJP के लोग क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2018, 9:46 IST

Bharat Bandh on SC/ST Act: देशभर में सवर्णों ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर आज (6 सितंबर) भारत बंद का ऐलान किया है. सवर्णों के करीब 35 संगठन मोदी सरकार के खिलाफ भारत बंद कर रहे हैं. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा की भाजपा के लोग भी मोदी सरकार के खिलाफ भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.

बिहार के मोकामा में लोग भाजपा के झंडों के साथ मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. मोकामा के शिवनार गांव में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. दर्जनों युवक (जो खुद को भाजपा समर्थक बता रह हैं) भाजपा के झंडों के साथ सड़कों पर उतरे और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

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भाजपा समर्थक प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लोग कल तक भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी के समर्थक थे लेकिन अब वे लोग उनके साथ नहीं है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राम मंदिर के मुद्दे पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का हवाला देती है लेकिन SC/ST मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ तुरंत संसद से कानून बना देती है.

मोकामा के शिवनार गांव में भाजपा समर्थकों के प्रदर्शन के कारण 20 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई. पटना से बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर जाने वाली सड़क पूरी तरह जाम कर दी गई है. हालांकि भाजपा के क्षेत्रीय नेता डॉ रामसागर सिंह ने प्रदर्शन में शामिल युवकों को भाजपा कार्यकर्ता मानने से इंकार किया है और कहा कि भाजपा का कोई कार्यकर्ता इस बंद के प्रदर्शन में शामिल नहीं है.

बता दें कि भारत बंद का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश और बिहार में देखने को मिल रहा है. मध्यप्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट घोषित किया गया है. वहीं 18 जिलों में धारा 144 लागू की गई है. राजस्थान में भी बंद को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है.

वहीं उत्तर प्रदेश प्रशासन ने एहतियाती तौर पर कदम उठाए हैं. मध्यप्रदेश के भिंड, ग्वालियर,शिवपुरी, अशोक नगर, मोरेना, दतिया, श्योपुर, छत्तरपुर, सागर और नरसिंहपुर में धारा 144 लागू की गई है. यहां पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे. सीबीएसई और एमपी शिक्षा मंडल ने छुट्टी का ऐलान किया है. मध्यप्रदेश में पुलिस की 34 अतिरिक्त बटालियन तैनात की गई है.

ये है कारण-
बता दें कि 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बड़ा बदलाव करने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस एक्ट के तहत नामजद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की मंजूरी लेनी होगी. इसके अलावा एक पुलिस उपाधीक्षक यह जानने के लिए प्रांरभिक जांच कर सकता है कि मामला इस अधिनियम के अंतर्गत आता है या नहीं.

इसके बाद मोदी सरकार पर आरोप लगाए थे की सरकार ने कोर्ट में दलील ठीक ढ़ंग से नहीं रखी जिसकी वजह से कानून कमजोर हुआ. दलितों ने कहा था कि इससे दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ेंगे. फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दो अप्रैल को दलितों ने भारत बंद बुलाया था. दलितों के भारत बंद के दौरान देशभर में जमकर हिंसा हुई थी और दस से ज्यादा लोग मारे गए थे.

बीजेपी के अनुसूचित जाति और जनजाति के सांसदों ने भी विरोध में आवाज उठाई थी और अपनी ही सरकार से अध्यादेश लाकर कानून को पूर्ववत लागू करनी की बात कही थी. जिसके बाद मोदी सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को पूर्ववत लागू करने के लिए संसोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास कराया था. अब इसी के विरोध में सवर्णों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है.

First published: 6 September 2018, 9:31 IST
 
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