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भारत रत्न: सम्मान के सहारे मोदी सरकार की राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश !

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 January 2019, 9:56 IST

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए इस साल तीन हस्तियों का नाम चुना गया है. लेकिन इस सम्मान के लिए चयनित हुए नामों पर अब चर्चा का दौर भी शुरू हो गया है. यहां यह बताना सबसे अहम है कि भारत रत्न के लिए हस्तियों का चयन प्रधानमंत्री की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है. देश का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 'भारत रत्न' कला साहित्य, समाजसेवा, विज्ञान, खेल जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले लोगों को दिया जाता है. इस साल भारत रत्न सम्मान के लिए 3 लोगों को चुना गया है. इस बार राजनीति, समाजसेवा और संगीत और कला के क्षेत्र की तीन शख्सियत के नाम ये सम्मान किया गया है.

यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी, आरएसएस के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी नानाजी देशमुख और असम के संगीतकार भूपेन हजारिका को मरणोपरांत दिया जा रहा है. भारत रत्न के लिए इन नामों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा तेज हो गयी है कि लोकसभा चुनावों के पहले बीजेपी सरकार इन तीन शख्सियतों के जरिए बंगाल, असम राज्यों के साथ ही साथ भाजपा के सहयोगी संगठन संघ के साथ राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश में हैं.

प्रणब मुखर्जी के नाम से राजनीति पर साधा निशाना !

भारत रत्न के लिए प्रणब मुखर्जी का नाम आने पर विश्लेषकों का ये मत है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न देना मोदी सरकार का राजनीतिक कदम है. बंगाल में प्रभावी छवि रखने वाले प्रणब मुखर्जी को ये सम्मान देकर सर्कार ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो साल 2004 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होते हुए भी तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह को चुना था. अब केंद्र सरकार उन्हें सम्मानित करके बंगाल के साथ राजनीतिक निशाना साधने की कोशिश में हैं.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, डॉ. भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को मिला भारत रत्न

असम में NRC गुस्से को साधने का प्रयास

असम में NRC, नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर जनता में काफी निराशा और गुस्सा है. विश्लेषकों का कहना है कि असम के संगीतकार और असम की सांस्कृतिक विरासत को हिंदी सिनेमा के जरिये देश भर के सामने पेश करने वाले भूपेन हजारिका को यह सम्मान देकर राज्य की जनता की खासी नाराजगी को साधने की भी कोशिश की है. मरणोपरांत भूपेन हजारिका को भारत रत्न देकर केंद्र सरकार असम की जनता के गुस्से को दबाने की कोशिश करती नजर आ रही है.

नानाजी देशमुख के जरिये आरएसएस को साधा

राम मंदिर निर्माण को लेकर तल्ख़ हो रहे बीजेपी के सहयोगी दल आरएसएस को भी खुश करने की कोशिश दिख रही है. कहा जा रहा है कि इसी के चलते आरएसएस के वरिष्ठ नेता नानाजी देशमुख को समाज सेवा के असाधारण कार्यों के लिए उन्हें भारत रत्न के लिए चुना गया. गौरतलब है कि नानाजी देशमुख की लोकप्रियता संघ समर्थकों के बीच काफी ज्यादा है. विश्लेषकों का मत है कि आने वाले विधानसभा चुनावों के पहले नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान देकर बीजेपी ने संघ को भी साधने की कोशिह की है.

पहले भी भारत रत्न को लेकर उठे हैं सवाल

भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जिसके शुरुआत साल 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी. भारत रत्न सम्मान देश में राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है. हालांकि इस सम्मान प्रक्रिया पर राजनीति से प्रभावित होने के आरोप पहले भी लगे हैं.

बात तब की है जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को पद पर बने रहते हुए भारत रत्न सम्मान मिला था. क्योंकि नियम के अनुसार प्रधानमंत्री की सिफारिश पर भारत रत्न के लिए लोगों का नाम राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. इसी के मद्देनजर ये कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री ने खुद का नाम ही इस सम्मान के लिए प्रस्तावित किया था. इतना ही नहीं साल 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने भारत रत्न सम्मान को बंद कर दिया था जिसे बाद में साल 1980 में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के बाद इसे दोबारा शुरू किया था.

First published: 26 January 2019, 9:56 IST
 
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