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भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट्स आखिर हैं कौन ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 August 2018, 14:01 IST

पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश भर में 10 कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी की, जिनमें से पांच को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि कुछ टेलीविजन न्यूज़ चैनलों ने सुझाव दिया कि इनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के लिए कथित साजिश के सिलसिले में गिरफ्तारी की गई है. सर्च वारंट और गवाह दस्तावेज दिखाते हैं कि इन छापों को 1 जनवरी को पुणे के निकट भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा की जांच से जोड़ा गया है.

इस मामले में जून में पांच अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनपर भीमा कोरेगांव में हिंसा को उकसाने का आरोप लगाया गया था. मंगलवार को गिरफ्तार किये गए इन सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के पास मानवाधिकार कार्यों में में दशकों का अनुभव है. इन सभी पर नक्सली लिंक के आरोप लगाए गए हैं लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि ये लोग हैं कौन ?

 

सुधा भारद्वाज (गिरफ्तार), मानवाधिकार वकील

57 वर्षीय सुधा भारद्वाज ने छत्तीसगढ़ में मानवाधिकारों और श्रमिक अधिकारों के मामलों में 30 से अधिक वर्षों तक काम किया है. वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर की पूर्व छात्र हैं. 1980 के दशक में उन्होंने शंकर गुहा नियोगी के साथ छत्तीसगढ़ काम किया. एक इंटरव्यू में उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में पानी, जंगल और भूमि बहुतायत है, लेकिन यहाँ के लोग बहुत गरीब हैं. सुधा भारद्वाज कहती हैं कि ''अगर मैं हाशिए वाले समुदायों के लिए लड़ रहा हूं, तो मेरे पास लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

पी वरवरा राव
क्रांतिकारी लेखक और कवि, गिरफ्तार

77 वर्षीय पी वारावरा राव, एक प्रसिद्ध तेलुगू कवि और विप्लावा राचायितला संगम (क्रांतिकारी लेखकों एसोसिएशन) के सह-संस्थापक हैं. जिन्हें लोकप्रिय रूप से विरासम के नाम से जाना जाता है. 1966 में उन्होंने सुजाना (सृजन) नामक आधुनिक तेलुगु साहित्य को समर्पित एक पत्रिका की शुरू की. तीन साल बाद वह थिरुगुबातु कवुलु (विद्रोही कवियों) में से एक थे, जो एक साहित्यिक समूह था और खुद को नक्सली सशस्त्र संघर्ष से जोड़ता था.

राव ने कविता के 15 संग्रह लिखे हैं और आंध्र प्रदेश में माओवादी आंदोलन के साथ-साथ तेलंगाना के अलग राज्य आंदोलन में जुड़े रहे. हालांकि राव ने मौजूदा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ मंच को साझा किया, जबकि नए राज्य के लिए आंदोलन करते हुए राव की अगुवाई वाली राज्य सरकार के खिलाफ राव ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था.

वेरनोन गोन्जाल्विस
पूर्व कॉलेज के प्रोफेसर, (गिरफ्तार)

बॉम्बे विश्वविद्यालय में एम कॉम परीक्षा में वह गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं. वेरनोन गोन्जाल्विस एचआर कॉलेज और डीजी रुपरल कॉलेज समेत मुंबई कॉलेजों में एक शिक्षक रहे हैं. महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता बनने से पहले वह सीमेंस में प्रबंधन प्रशिक्षु थे. 2007 में पुलिस ने वेरनोन गोन्जाल्विस पर नक्सलियों की महाराष्ट्र राज्य समिति के पूर्व केंद्रीय समिति के सदस्य होने का आरोप लगाया था और उन्हें 20 मामलों में आरोप लगाया था. उन्हें इनमें से 19 में बरी कर दिया गया था, जबकि एक मामला अभी लंबित है.

अरुण परेरा, राजनीतिक कार्यकर्ता और वकील (गिरफ्तार)

अरुण परेरा ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की है. वह एक वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने कॉलेज में अभी भी एक मजबूत सामाजिक विवेक विकसित किया और संस्थान के कैंटीन श्रमिकों के आंदोलन का आयोजन बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग के लिए किया. कॉलेज के बाद वह विदर्भ में एक कम्युनिटी ओर्गनइजर बन गए. 2007 में नक्सललाइट होने के आरोप में फेरेरा को गिरफ्तार किया गया था.

गौतम नवलाखा
मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार, (गिरफ्तार)

गौतम नवलाखा दिल्ली स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार और पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के संस्थापक हैं. वह कई वर्षों तक इकनोमिक एंड पोलिटिकल वीकली के कंसल्टिंग एडिटर थे. नवलखा दशकों से कश्मीर और छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे है.

स्टेन स्वामी
कैथोलिक पुजारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता

83 वर्षीय स्वामी समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री रखते हैं. वह कई दशकों से झारखंड में मानवाधिकार मुद्दों पर काम कर रहे हैं. वह विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के संस्थापक सदस्य हैं. स्वामी ने खूंटी जिले में पाथलगदी आंदोलन का समर्थन किया है. उन्होंने आदिवासी इलाकों में ग्राम सभा और गांव परिषदों को सशक्त बनाने के लिएकाम किया है.

केवी कुरमानाथ, पत्रकार

कुरमानथ हैदराबाद में रहते हैं. वह दो दशकों से अधिक समय तक पत्रकार रहे हैं. आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय में पत्रकारिता में स्नातकोत्तर के दौरान वह गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं. वह अब हिंदू बिजनेस लाइन के साथ डिप्टी एडिटर रहे हैं. जहां उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, कृषि जीएसटी पर लिखा है. वह तेलुगू में छोटी कहानियां और कविता भी लिखते हैं.

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First published: 29 August 2018, 14:01 IST
 
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