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भीमा कोरेगांव : 26 किताबें लिख चुके प्रोफ़ेसर तेलतुंबड़े को पुणे पुलिस ने किया गिरफ्तार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 February 2019, 11:17 IST

पुणे शहर पुलिस ने प्रतिबंधित सीपीआई-माओवादी के साथ कथित संबंधों के लिए एल्गार परिषद मामले में गोवा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफेसर और 26 किताबें लिख चुके आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार किया है. पुणे की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी. पुणे शहर पुलिस की एक टीम ने शनिवार तड़के लगभग 4 बजे मुंबई के हवाई अड्डे से उन्हें गिरफ्तार किया.

सहायक पुलिस आयुक्त शिवाजी पवार ने तेलतुंबडे की गिरफ्तारी की पुष्टि की और कहा कि उन्हें आज पुणे में विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. पुणे शहर की पुलिस मामले में आगे की जांच के लिए तेलतुम्बडे की हिरासत की मांग कर रही है. शुक्रवार को तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए विशेष न्यायाधीश के डी वाडाने ने एक आदेश पारित किया था जिसमें कहा गया था कि जांच में पर्याप्त सबूत एकत्र किये गए हैं. वकील का कहना है कि पुलिस के पास तेलतुंबड़े के खिलाफ कोई अन्य सबूत नहीं है.

आदेश में यह भी कहा गया कि जांच बहुत ही महत्वपूर्ण चरण में थी. ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्तों की हिरासत पूछताछ आवश्यक है. इसलिए, अभियुक्त अग्रिम जमानत पर रिहा होने का हकदार नहीं है. इसलिए अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी जानी चाहिए. अभियोजन पक्ष ने गुरुवार को एक लिफाफा पेश किया था जिसमें इलेक्ट्रॉनिक डेटा के प्रिंटआउट थे, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि इस मामले में तेलतुंबड़े की भागीदारी साबित हुई है. इससे पहले अभियोजन पक्ष ने तेलतुंबडे की जमानत अर्जी का विरोध करने के लिए विशेष न्यायाधीश किशोर डी वडाने के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की थी.

पुलिस ने दावा किया है कि उनके पास यह साबित करने के लिए सबूत हैं कि तेलतुंबड़े प्रतिबंधित माओवादी संगठन के माध्यम से सरकार को अस्थिर करने के लिए विद्रोही गतिविधियों में शामिल थे. तेलतुम्बडे उन सात प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक थे जिनके घरों पर पिछले साल 28 अगस्त को पुणे पुलिस द्वारा किए गए एक आश्चर्यजनक मल्टी-सिटी सर्च ऑपरेशन में छापा मारा गया था. इनमें से चार - सुधा भारद्वाज, पी. वरवरा राव, वर्नन गोंजाल्विस और अरुण परेरा पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं. जिन्हें पिछले साल पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

पुणे पुलिस, भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200 वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एक शाम के कार्यक्रम, एल्गार परिषद में नक्सली भागीदारी के आरोपों की जांच कर रही है, जिसके दौरान पुणे के आसपास हिंसक झड़पें देखी हुई थी. पुलिस का दावा है कि अगले दिन हिंसा भड़काने के लिए एलगार परिषद के भाषण जिम्मेदार थे.

कौन हैं आनंद तेलतुम्बडे

प्रोफेसर आनन्द तेलतुम्बडे आई..आई.एम अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं वह आई.आई.टी में प्रोफेसर और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक रहे चुके हैं. वह गोवा इन्स्टिट्यूट आफ मैनेजमेण्ट में ‘बिग डाटा एनालिटिक्स’ के विभागप्रमुख हैं. आनन्द तेलतुम्बडे अब तक 26 किताबें लिख चुके हैं. वह इकोनोमिक एण्ड पोलिटिकल वीकली में भी आर्टिकल लिखते रहे हैं. कई बुद्धिजीवियों, सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ दायर मुकदमे का विरोध किया है. आई आई टी खडगपुर और आई आई एम अहमदाबाद सहित आई आई एम बंगलुरू छात्र उनके समर्थन में आये हैं.

 

First published: 2 February 2019, 11:10 IST
 
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