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भोजशाला विवाद: तलवार की धार पर चलता 'धार'

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2016, 23:15 IST

मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला में सांप्रदायिकता की आंच धीरे-धीरे तेज हो रही है. भोजशाला पुलिस सुरक्षा में किले में तब्दील हो गई है. इस बार शुक्रवार के दिन वसंत पचंमी (12 फरवरी) है. इस वजह से पूजा और नमाज को लेकर हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़ गया है.

भोजशाला को लेकर हिंदू और मुस्लिम समाज में विवाद रहा है. हिंदू जहां उसे सरस्वती का मंदिर होने का दावा करते हैं तो मुस्लिम समाज इसे मस्जिद बताता है. वर्तमान में भोजशाला पुरातत्व विभाग (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधीन है.

काफी सालों से चल रहे विवाद के बीच इससे पहले 2003, 2006 और 2013 को वसंत पंचमी शुक्रवार को होने के कारण तनाव हो चुका है. 2003 में यहां हिंसा भी हो चुकी है.

पुरातत्व विभाग ने वसंत पंचमी को सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक पूजा और दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज की व्यवस्था की है. इसे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी सही ठहराया है.

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पुलिस सूत्रों ने कहा कि कुछ समय पहले से ही धार में तनाव बढ़ने लगा है. इसके चलते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

भोजशाला में रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय सुरक्षा बल के अलावा स्थानीय पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है. वहीं 12 पुलिस अधीक्षक, 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 85 पुलिस उपाधीक्षक, 135 थाना प्रभारी, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के 2200 जवान, 250 बाउंसर और महिला पुलिस बल की तैनाती की जा रही है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा बुधवार को धार पहुंचे और उन्होंने हालात का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी श्रीमन शुक्ला और पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर से बंद कमरे में चर्चा की.

पुरातत्व विभाग ने वसंत पंचमी को दोपहर 12 बजे तक पूजा और दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज की व्यवस्था की है.

उन्होंने मीडिया से कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि पूजा और नमाज का कोई हल निकल आए. यह सब शांति और सद्भाव से हो जाए, इसके प्रयास जारी हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निर्देशों का पालन किया जाएगा.

दूसरी ओर भाजपा के सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि मुस्लिमों को बड़प्पन दिखाते हुए वसंत पंचमी को हिंदुओं को पूजन करने देना चाहिए.

इस मामले पर हिंदूवादी संगठन लगातार आंदोलन करते आ रहे हैं. उन्होंने सोमवार को शहर में शोभायात्रा निकाली थी, तो मंगलवार को सड़क पर खड़े होकर पूजा की थी और भोजशाला के भीतर नहीं गए थे.

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने हिंदूवादी संगठनों की वसंत पंचमी को दिन भर पूजा करने की मांग पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब भोजशाला में किसी की मूर्ति ही नहीं है तो विश्व हिंदू परिषद के लोग किसकी पूजा करने जाते हैं.

धार एक ऐतिहासिक नगरी है. यहां परमार वंश के राजा भोज ने 1010 से 1055 ईस्वी तक शासन किया. यहां के लोग दावा करते हैं कि राजा भोज ने धार नगर में सरस्वती सदन की स्थापना की. तब यह एक महाविद्यालय था जो बाद में भोजशाला के नाम से विख्यात हुआ.

भोजशाला को 1909 में संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया. बाद में भोजशाला को पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया. वर्ष 2003 से पूजा और नमाज का सिलसिला लगातार चला आ रहा है.

First published: 11 February 2016, 23:15 IST
 
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