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डेढ़ साल में चौथी बार बीएचयू कैम्पस में घुसी पुलिस

आवेश तिवारी | Updated on: 28 May 2016, 12:24 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में हालात ठीक नहीं है. काशी का हृदय कहे जाने वाले बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रों और कुलपति के बीच पैदा हुआ विवाद बड़ी राजनैतिक शक्ल लेता जा रहा है.

संघ के प्रति अपनी नजदीकियों को खुलेआम जगजाहिर करने वाले कुलपति गिरीश चन्द्र त्रिपाठी की तमाम टिप्पणियों और छात्र विरोधी नीतियों को लेकर आक्रोश थमा नहीं था कि साइबर लाइब्रेरी को चौबीसों घंटे चलाने की मांग कर रहे अनशनरत छात्र-छात्राओं के साथ सुरक्षाकर्मियों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने हिंसक मारपीट किया है. इस हिंसा ने बीएचयू ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वांचल का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है.

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दरअसल बीएचयू में 3 मार्च 2013 को साइबर लाइब्रेरी की शुरूआत की गई थी. जिसमें 250 कंप्यूटर लगाए गए थे. यह लाइब्रेरी भारत ही नहीं बल्कि एशिया की भी 24 घंटे खुली रहने वाली पहली लाइब्रेरी बन गई. लेकिन नवंबर 2014 में हुए एक हिंसक छात्र आंदोलन के बाद लाइब्रेरी को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया.

वीसी जीसी त्रिपाठी ने अगले आदेश में लाइब्रेरी के समय को घटाकर 12 घंटे कर दिया. इसके बाद छात्रों ने समय-समय पर 24 घंटे साइबर लाइब्रेरी खोलने की मांग की लेकिन अब तक बीएचयू प्रशासन इस समस्या का हल नहीं निकाल सका है. आज डेढ़ साल होने को है पर ये खींचतान जारी है.

मई-जून 2015 में छात्रों की परीक्षाओं को देखते हुए 24 घंटे साइबर लाइब्रेरी खुले रखने की मांग मान ली गयी थी. लेकिन परीक्षा खत्म होते ही लाइब्रेरी का समय फिर से 12 घंटे कर दिया गया.

ताजा हिंसा ने बीएचयू ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वांचल का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है

ताजा विवाद बुधवार को तब भड़का जब आप कार्यकर्ताओं ने दोपहर में अनशन कर रहे स्टूडेंट्स के समर्थन में शांति जुलूस निकाला. जुलूस के एमएमवी क्रासिंग पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने रोका दिया. जिसका आप कर्यकर्ताओं ने विरोध किया. दोनों तरफ से तीखी नोकझोंक के बाद सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज कर दिया.

आप कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान एक बस में सवार होकर दर्जनों की संख्या में भाजपा समर्थित अराजक तत्व आ पहुंचे. इन लड़कों ने सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में जुलूस में शामिल कार्यकताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया.

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इस हमले में आप के पूर्वांचल संयोजक संजीव कुमार सिंह समेत दर्जन भर आप कार्यकर्ता गंभीर रूप से चोटिल हो गए. घायल लोगों में कई महिला कार्यकर्ता भी हैं.

छात्र नेताओं और समर्थकों पर हमले और मारपीट के बाद गुरुवार को आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने बनारस पहुंच कर छात्रों के समर्थन में आवाज बुलंद की है. उन्होंने कहा है कि संघ के दबाव में छात्रों के खिलाफ कारवाई की जा रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के भी बनारस आने की संभावना है. छात्रों के आंदोलन में राजनीतिक दलों की घुसपैठ के बाद इस विवाद के बढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं.

राजनीतिक दलों के भारी विरोध के बीच बीएचयू के कुलपति गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा है कि कुछ लोग बीएचयू कैम्पस का इस्तेमाल राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए कर रहे हैं जो ठीक नहीं है. कुलपति ने पत्रिका से हुई विशेष बातचीत में साइबर लाइब्रेरी चौबीस घंटे खोलने की मांग को सिरे से नकार दिया है. उनका कहना है कि जो लोग यह मांग कर रहे हैं उनका पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं है.

फिलहाल बनारस में गंगा मैली है और बीएचयू नारों से गूंज रहा है

पिछले डेढ़ वर्ष में ऐसा चौथी बार हुआ था जब बीएचयू कैम्पस में पुलिस ने प्रवेश किया. आमतौर पर शांत रहने वाले बीएचयू कैम्पस में जेएनयू की घटना के बाद से जब तब विवाद होते रहे हैं. लेकिन साइबर लाइब्रेरी को चौबीसों घंटे चलाने की मांग इतना तूल पकड़ लेगी इसका अंदाजा किसी को नहीं था.

आप के अलावा कांग्रेस पार्टी ने भी छात्रों के आन्दोलन को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. घटना के बाद जेएनयु छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष सुचेदा डे समेत अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र नेता भी बीएचयू पहुंचने लगे हैं.

छात्रों को समर्थन देने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी बनारस पहुंची हैं. खबर है कि प्रो. बद्रीनारायण, जिन्हें कुछ ही दिनों पहले बीएचयू में भारी बिरोध झेलना पड़ा था भी बनारस जाएंगे.

प्रधानमंत्री और उनकी सरकार दो साल पूरा होने का जश्न मना रही है और उनकी संसदीय सीट से इस तरह की नकारात्मक खबर का आना निश्चित ही मुंह का स्वाद कड़वा करने जैसा है. फिलहाल बनारस में गंगा मैली है और बीएचयू नारों से गूंज रहा है.

First published: 28 May 2016, 12:24 IST
 
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