Home » इंडिया » Bihar: 70 years old Laungi Bhuiyn made three KM long canal in 30 years in Gaya
 

बिहार के इस किसान ने 30 साल कड़ी मेेहनत कर अकेले ही बना डाली 3 किमी लंबी नहर

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 September 2020, 9:59 IST

इंसान में अगर समाज और दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो वह पहाड़ को तोड़कर समतल ही नहीं बना सकता है बल्कि उस नहर का भी रूप दे सकता है. कुछ साल पहले आपने बिहार के रहने वाले दशरथ राम मांझी के बारे में सुना होगा. जिन्होंने एक पहाड़ को काटकर सड़क बना दी थी. इसलिए लोग आज उन्हें बिहार के माउंटैन मैन के रूप में भी जानते हैं. ऐसी ही एक कहानी एक बार फिर से बिहार से ही आई है. जहां 70 साल के एक बुजुर्ग किसान ने तीस साल तक कड़ी मेहनत कर पहाड़ तोड़कर तीन किलोमीटर लंबी नहर बना दी.

जिससे गांव के लोगों को फसल की सिंचाई और इस्तेमाल के लिए पानी मिल सके और गांव के लोग पलायन रोक दें. दशरथ मांझी की तरह ही दिन रात मेहनत करने वाले इस किसान का नाम लौंगी भुईयां है. वह 70 साल के हैं. जब वह 40 साल के थे तभी से उन्होंने नहर खोदने केे लिए दिन रात काम करना करना शुरु किया और तीस साल तक अकेले ही पहाड़ को तोड़ते रहे और नहर बना डाली. 30 साल तक पहाड़ तोड़ने के बाद लौंगी भुईयां ने तीन किलोमीटर नजर बना दी है और अब नहर में पानी आने से उनके गांव के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी पानी की समस्या से निजात पा चुके हैं.


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बिहार के गया के रहने वाले लौंगी भुईयां ने कड़ी मेहनत से बनाई इस नहर से लोगों को सिंचाई करने में ज्यादा समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा. खेतों को भरपूर पानी मिल सकेगा. उनके परिवार के लोगों का कहना है कि लौंगी भुईयां रोज घर से निकलकर जंगल पहुंच जाया करते थे और अकेले नहर बनाया करते थे. बिना मजदूरी के काम करते थे जिसके लिए हम उन्हें ये सब करने की मना भी करते थे. लौंगी भुईयां कहते हैं कि मेरी पत्नी, बहू और बेटा सभी लोग ये काम करने की मना करते थे. क्योंकि इसमें कोई पैसा नहीं मिलता था, और सब लोग मुझे पागल कहने लगे थे. लेकिन नहर में पानी आने से, आज सब मेरे इस काम की तारीफ करते हैं.

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लौंगी भुईयां कहते हैं कि पहले वह मक्का और चना की खेती करते थे, उसके बाद बेटा काम की तलाश में शहर चला गया. फिर गांव के ज्यादातर लोग काम करने दूसरे राज्यों में जाने लगे और ये सिलसिला चल निकला. बेरोजगारी और पानी की समस्या के चलते गांववालों ने पलायन करना शुरु कर दिया. लौंगी भुईयां बताते हैं कि, एक दिन में बकरी चरा रहा था तो सोचा कि अगर गांव में पानी आ जाए तो पलायन रुक सकता है. लोग खेतों में फसल की पैदावार करेंगे. उसके बाद मैंने नहर बनाने का फैसला लिया. आज नहर बनकर तैयार है और इलाके के 3 गांव के 3000 हजार लोग अब इस नहर से फायदा ले रहे हैं.

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First published: 13 September 2020, 9:59 IST
 
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