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बिहार में क्या चल रहा है? फिक्स मैच या गठबंधन की उल्टी गिनती

एन कुमार | Updated on: 8 October 2016, 7:54 IST

बिहार की राजनीति दिलचस्प मुकाम की ओर बढ़ रही है. सरकार जाने जैसी बात नहीं है लेकिन राजद और जदयू के बीच खाई खत्म होने की बजाय बढ़ती जा रही है. दोनों दलों के नेता मौन साधकर एक-दूसरे के विपरीत काम करने में लगे हुए हैं तो दूसरी ओर अपने नेताओं के इशारे पर दोनों दलों के छोटे नेता आपस में धींगामुश्ती पर उतर आए हैं.

बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, हर वे कदम उठा रहे हैं, जिससे उनकी धूमिल हुई छवि साफ हो लेकिन उनकी इस कोशिशों का सीधा असर लालू प्रसाद यादव पर पड़ रहा है. जवाब में लालू प्रसाद खुद मौन साधे, अपने नेताओं के जरिये वैसी चाल चल रहे हैं, जिससे नीतीश कुमार के सामने एक के बाद एक चुनौती खड़ी हो जा रही है.

पहले शहाबुद्दीन प्रकरण पर विवाद हुआ अब राजवल्लभ यादव प्रकरण सामने है.

शहाबुद्दीन दोबारा जेल गये. सीवान में राजद की जिला इकाई ने जो किया वह सिर्फ एक जिले में हुई राजनीतिक घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. शहाबुद्दीन के जेल जाने के विरोध में पूरा सीवान शहर ठप हो गया. विशाल प्रदर्शन हुए. शहाबुद्दीन और लालू प्रसाद यादव के पक्ष में नारे लगे. नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी हुई.

पहले शहाबुद्दीन प्रकरण पर विवाद हुआ अब राजवल्लभ यादव प्रकरण महागठबंधन की परीक्षा ले रहा है

ऐसा करनेवाले महज शहाबुद्दीन समर्थक भर नहीं थे बल्कि राजद के कार्यकर्ता और नेता भी थे, जिसमें राजद विधायक हरिशंकर यादव जैसे नेता शामिल थे. हरिशंकर यादव से यह पूछने पर कि आप तो एक ऐसे आंदोलन का नेतृत्व करने लगे जो अपने ही सरकार के खिलाफ है, वे कहते हैं- 'शहाबुद्दीन भगवान हैं, हम उनका साथ मरते समय तक नहीं छोड़ सकते, इसके लिए चाहे जो करना पड़े.'

राजद विधायक हरिशंकर यह बात डंके की चोट पर कहते हैं, राजद के कई अन्य नेता डंके की चोट पर तो नहीं कहते लेकिन वे खुलेआम नीतीश कुमार का विरोध करते हैं. राजद के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि हमारे मुखिया लालू प्रसाद यादव मौन साधकर यह संकेत दे रहे हैं कि आप चाहें तो नीतीश पर राजनीतिक हमला कर सकते हैं, इसीलिए राजद के नेता खुलेआम नीतीश पर अटैक कर भी रहे हैं.

अभी शहाबुद्दीन का प्रकरण थोड़ा शांत हुआ था तब तक राजवल्लभ यादव प्रकरण ने गति पकड़ ली है. इससे दोनों सत्ताधारी दलों के रिश्तों में पड़ी दरार और चौड़ा कर दिया है. राजवल्लभ यादव नवादा के विधायक हैं. वे एक नाबालिग के बलात्कार के आरोपी हैं, जेल भी जा चुके हैं, फिलहाल जमानत पर हैं.

जिस दिन राजबल्लभ जमानत पर छूटे, उसी दिन सरकार की ओर से संकेत मिले कि बिहार की सरकार शहाबुद्दीन की तरह ही राजवल्लभ का भी बेल रद्द करवाने सुप्रीम कोर्ट जाने वाली है. सरकार गयी भी.

लेकिन दूसरी ओर राजवल्लभ जेल से निकल कर सीधे लालू प्रसाद यादव के आवास जा पहुंचे. इस मुलाकात ने राजनीति को गरमा दिया है. इस पर राजनीति इसलिए भी गरमायी, क्योंकि जिस राजवल्लभ को नीतीश कुमार जेल भेजना चाहे हैं उससे लालू यादव घंटों अकेले में मुलाकात करते हैं.

राजवल्लभ ने कहा कि लालू प्रसाद यादव उनके नेता हैं और वे दशहरा की शुभकामना देने उनके आवास गये थे. राजवल्लभ कहते हैं कि नीतीश उनके मित्र हैं और उनके जमानत को रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं गये हैं बल्कि बिहार की सरकार गयी, और सरकार का सिस्टम अलग होता है. राजवल्लभ बहुत ही चतुराई से नीतीश और बिहार सरकार को अलद-अलग खांचे में रखना चाहते हैं.

राजवल्लभ का बचाव करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद के नेता तेजस्वी यादव कहते हैं कि मुलाकात को राजनीतिक मसला बनाने की जरूरत नहीं, कोर्ट अपना काम कर रही है और फैसला देना हम लोगों का काम नहीं है.

राजवल्लभ और लालू प्रसाद यादव की मुलाकात से जदयू के खेमे में सरगर्मी बढ़ गयी है. जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं कि गठबंधन तो एक बात है लेकिन राजनीति में नैतिक मूल्य भी एक चीज होती है. शीर्षासन करने, गणेश परिक्रमा करने और दरबार में दंडवत करने से कोई अपराधी नहीं बचने वाला. नीरज सीधे राजवल्लभ के लालू प्रसाद यादव के यहां जाने पर प्रहार करते हैं.

हमलावर हुई भाजपा

इन दोनों सत्ताधारी दलों के आपसी लड़ाई के बीच आपसी कलह से लचर दौर में चल रही बिहार प्रदेश भाजपा को भी शहाबुद्दीन के बाद राजवल्लभ के रूप में एक ऐसा विषय मिल गया है, जिसे वे कुछ दिनों तक खेलना चाहेगी.

भाजपा नेता सुशील मोदी कहते हैं, ‘आम गरीबों के लिए समय न होने का बहाना बनाने वाले लालू प्रसाद यादव के पास इतना समय होने लगा है कि वे एक बलात्कारी से अकेले घंटों बैठकर बात करने के लिए समय निकाल रहे हैं. मोदी कहते हैं कि लालू प्रसाद का ही दबाव है कि नीतीश कुमार राजवल्लभ के खिलाफ उतनी कड़ाई से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष नहीं रखे हैं.'

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय कहते हैं कि जिसके खिलाफ नीतीश कुमार सुप्रीम कोर्ट गये हैं, उसे लालू प्रसाद यादव प्यार-दुलार से बुला रहे हैं, अब इससे ज्यादा संरक्षण कैसे दे सकते हैं वे!

भाजपा विपक्ष में है इसलिए वह तो इस मसले को पकड़कर अपनी बात कहेगी ही. भाजपा की बातों को हटा भी दें तो जदयू नेताओं का खुलेआम विरोध करना रिश्ते की खाई को बढ़ा रहा है और जदयू के छोटे नेताओं के विरोधी बयान को छोड़ भी दें तो लालू प्रसाद यादव का मौन और उनके मौन के दम पर राजद नेताओं का लगातार नीतीश कुमार पर हमला बताता है कि आनेवाले दिनों में चीजें बदल सकती हैं.

First published: 8 October 2016, 7:54 IST
 
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