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बिहार: शराबबंदी पर दोतरफा घिरे नीतीश कुमार

निहारिका कुमारी | Updated on: 11 August 2016, 7:20 IST

बिहार सरकार के शराबबंदी कानून की पहली गाज खुद सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा पर गिरने वाली है. दरअसल, नालंदा के जिलाधिकारी ने कैलाशपुरी गांव पर शराबबंदी कानून की अवहेलना करने के लिए सामूहिक जुर्माना करने का आदेश दिया है. इस डर से दलित बहुल इस गांव के निवासी अब पलायन की तैयारी कर रहे है.

राज्य के शराबबंदी कानून में किसी भी गांव पर एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना करने का प्रावधान है. अब तक बिहार में भागलपुर, शेखपुरा, मुंगेर और दूसरे जिलों में करीब आधे दर्जन गांवों पर इस बाबत कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन इनमें से किसी पर अब तक जुर्माना नहीं लगा है.

यह पहला मौका है, जब किसी गांव पर यह जुर्माना हुआ है. जिला प्रशासन के मुताबिक लगातार कोशिशों के बावजूद नालंदा जिले के इस्लामपुर ब्लॉक के रानीपुर पंचायत स्थित इस गांव से शराब का अवैध कारोबार हो रहा था. 

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इसीलिए पुलिस और उत्पाद विभाग की सलाह के आधार पर इस गांव पर सामूहिक रूप से जुर्माना करने का फैसला लिया है. इसके तहत करीब 50 परिवार वाले इस छोटे से गांव में हर परिवार पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इस बारे में हर परिवार को नोटिस भी भेजा गया है.

जिले के डीएम एसएम त्यागराजन के मुताबिक प्रशासन ने गांव के लोगों को बार-बार समझाने की कोशिश की, लेकिन बीते महीने उत्पाद विभाग की टीम पर हमले के बाद यह फैसला लिया गया.

त्यागराजन कहते हैं, “इस गांव से लगातार शराब के कारोबार की शिकायतें मिल रही थीं. बीते पांच महीने में पांच बार छापा मारा जा चुका है. हर बार देसी शराब बनाने के उपकरण बरामद किए गए हैं. कई बार शराब की बोतलें बरामद की गई हैं. हमने कई बार गांव में जागरुकता अभियान चलाया. गांव वालों को नोटिस और चेतावनी भी दी, लेकिन यहां शराबबंदी के खिलाफ सामूहिक प्रवृति पाई गई है. इसीलिए हमने पूरे गांव पर जुर्माना लगाने का फैसला लिया है.”

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पुलिसवालों को पता है कि किसके घर में शराब बनाई जाती है. उनको पकड़ने की बजाए हम लोगों को जानबूझकर फंसाया गया है

हालांकि, गांव के लोगों के मुताबिक असमाजिक तत्वों के किए की सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है. प्रशासन के इस फैसले से गांव के लोग खासे नाराज हैं. इस गांव में मुख्य रूप से बेलदार जाति के लोग रहते हैं, जो अगल-बगल के गांवों में खेतिहर मजदूर के रूप में काम करते हैं. 

गांव की आबादी बेहद गरीब है और इसीलिए जुर्माने की खबर मिलने के साथ ही कई परिवारों ने पलायन की तैयारी भी शुरू कर दी है.

पड़ोस के गांव में एक रसूखदार परिवार के घर में साफ-सफाई का काम करने वाली 58 वर्षीय चमेली देवी के मुताबिक उन्होंने तो किसी पर हमला नहीं किया, तो उन्हें सजा क्यों? 

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उन्होंने कहा, “हमने तो कभी शराब नहीं पी है और न ही हमारे घर में कोई पीता है. हम तो मेहनत मजदूरी करके अपना पेट भरते हैं. फिर हमें क्यों अपराधी के रूप में देखा जा रहा है? जो ये सब काम करते हैं, उसको पुलिस पकड़े, सजा दे. हम कहां से देंगे यह रकम?”

उनका बड़ा बेटा सुरेंद्र कुमार खेतिहर मजदूर है. उन्होंने कहा, “पुलिस को सब पता रहता है. पुलिसवालों को पता है कि किसके घर में शराब बनाई जाती है. उनको पकड़ने की बजाए हम लोगों को जानबूझकर फंसाया गया है. क्या हम पर जुर्माना करने से वो लोग अपना काम बंद कर देंगे?”

गांव में रहने वाले शिक्षक सुरेश कुमार के मुताबिक अगर गांव पर जुर्माना लग रहा है तो पुलिस वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो अपने काम में विफल रहे हैं.

पुलिस विभाग का प्रतिरोध

गौरतलब है कि इस नए कानून के तहत शराब के कारोबार को रोकने में असफल रहने पर संबंधित थानेदार को निलंबित करने का प्रावधान है. साथ ही, ऐसे थानेदार को अगले 10 साल तक किसी थाने में दुबारा नियुक्ति भी नहीं दी जाएगी. बीते दिनों राज्य सरकार ने 11 थानेदारों समेत 19 पुलिसकर्मियों को इस प्रावधान के तहत निलंबित कर दिया था.

हालांकि, इसके बाद राज्य सरकार के लिए अलग ही मुसीबत खड़ी हो गई है. बिहार राज्य पुलिस संघ के एक समूह ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और भोजपुर जिलों के 250 थानेदारों ने राज्य सरकार से खुद को पदमुक्त करने का अनुरोध कर दिया है.

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पुलिस संघ के अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह बताते हैं, “थानेदारों को निलंबित करने का फैसला गलत है. राज्य के पुलिस महानिदेशक से हमारी बात हुई है और उन्होंने इस बारे में निलंबित थानेदारों को अपना पक्ष अपने-अपने एसपी के पत्र के जरिये लिखकर भेजने को कहा है. हमने भी 28 अगस्त को अपनी कार्यसमिति की बैठक बुलाई है. अगर तब तक कोई फैसला नहीं हुआ, तो हम पूरे राज्य में आंदोलन करेंगे.”

हालांकि, मंगलवार देर रात पुलिस मुख्यालय ने सभी थानेदारों को इस कानून का कड़ाई से पालन करने का आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक ऐसा नहीं होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

First published: 11 August 2016, 7:20 IST
 
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