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शराबबंदी अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर लाने में लगे नीतीश कुमार

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 June 2016, 8:17 IST
(कैच)

असम और उत्तरप्रदेश जैसे दूसरे राज्यों में महागठबंधन बनाने में नाकाम रहने के बाद, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दूसरे विकल्प के साथ सामने आ रहे हैं. नीतीश कुमार द्वारा चलाया गया शराबबंदी अभियान, राज्य स्तर पर सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है. अब वो इसी मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर ख़ुद के लिए जगह बनाना चाहते हैं .

इस निषेध अभियान के सिलसिले में ,पिछले दो महीनों में नीतीश कुमार कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं. इस दौरान, कई वर्षों से शराब विरोधी अभियान चला रहे लोगों और कई संस्थाओं को उन्होंने अपने साथ जोड़ा है. अगले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आने वाले वक्त में वो इस अभियान को जारी रखेंगे. उनको उम्मीद है कि ये बड़ा देशव्यापी आंदोलन बनेगा. नीतीश की योजना है कि इस मुहिम के जरिए अगले आम चुनाव में वो बीजेपी विरोधी गठबंधन खड़ा कर सकें.

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बिहार में पहले ही शराबबंदी काफी गर्म मुद्दा है और राज्य सरकार हमेशा से इसको कठोरता से लागू करने की बात कहती रही है. राज्य में अब शराब जब्त करने के लिए पुलिस का छापा पड़ना आम बात हो गयी है. पटना हाइकोर्ट के ये कहने के बाद कि “मात्र शराब रखना गैरकानूनी नहीं हो सकता”, बिहार सरकार ऐसी कमियों को दूर कर और सख्त कानून बनाने की कवायद शुरु कर चुकी है. जदयू नेताओं की मानें तो इस अभियान ने बिहार की महिलाओं को इतना सशक्त बना दिया है कि वो अब शराबी पतियों को पुलिस के हवाले करने से घबराती नहीं हैं. 

इस अभियान ने बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान खींचा है और जदयू इसमें देशव्यापी मुहिम की उम्मीद देख रहा है. इसलिए स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिल कर, इस मुहिम को दूसरे राज्यों तक ले जाने का काम तेजी से चल रहा है. उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक और उत्तराखंड से लेकर महाराष्ट्र तक, जदयू ने अपने शराब मुक्त अभियान में बड़ी संख्या में लोगों और संस्थाओं को जोड़ा है.

झारखंड

शराबबंदी अभियान के समर्थन में, बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड ने सबसे पहले अपनी रूचि दिखाई. झारखण्ड में इस अभियान को सफल बनाने का सारा श्रेय जदयू कार्यकर्ताओं और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को जाता है.

ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि मरांडी की पार्टी झारखण्ड विकास मोर्चा का जदयू में विलय हो सकता है. राज्य में इस अभियान से जुड़ा सबसे पहला कार्यक्रम, कोयला नगरी धनबाद में आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार भी मौजूद रहे. 

उत्तर प्रदेश

लखनऊ और बनारस से सटे शहर पिंडारी में शराबबंदी अभियान से जुड़े कार्यक्रम में नीतीश कुमार को आमंत्रित किया गया था. इन दोनों कार्यक्रमों में कुमार ने समाजवादी पार्टी को राज्य में और एनडीए सरकार को देशभर में शराब निषेध लागू करने की चुनौती दी.

शराबबंदी पर नीतीश कुमार और अखिलेश सरकार में तकरार

कैच न्यूज़ से बातचीत के दौरान जदयू के एक नेता ने बताया कि किसान मंच नाम की संस्था ने नीतीश कुमार को आमंत्रित किया था. किसान मंच पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की विचारधारा से जुड़ाव रखने का दावा करता है. नीतीश कुमार 18 जून को मिर्ज़ापुर में इसी मुहिम से जुड़े एक और कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.

राजस्थान 

नीतीश कुमार को जयपुर और अलवर से शराबबंदी अभियान के दो कार्यक्रमों का न्योता मिला. जयपुर से दिवंगत एमएलए गुरशरण छाबड़ा की बहू पूजा छाबड़ा ने कुमार को बुलाया था. 

शराबबंदी की मांग के लिए अनशन के दौरान ही गुरुशरण छाबड़ा का निधन हुआ था. उनकी मृत्यु के बाद अभियान की सारी ज़िम्मेदारी पूजा सम्भाल रही हैं. 

अलवर से गुलाबी गैंग नाम की संस्था ने नीतीश कुमार को बुलाया था. जदयू के एक नेता के अनुसार ब्रिगेड कुछ महिलाओं का समूह है जिन्होंने बाकायदा हमला बोलकर राजस्थान के कम से कम 50 गांवों में शराब की दुकानें नष्ट की हैं.

विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आंदोलन से जुड़े संस्थान भी इस अभियान में कुमार का नेतृत्व चाहते हैं.

महाराष्ट्र

नागपुर से सटे शहर वर्धा में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित किए गए आश्रम की महिलाओं ने राज्य में चल रहे निषेध अभियान में हिस्सा लेने के लिए कुमार को आमंत्रित किया था. महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फूले के अनुयायियों ने भी कुमार को आमंत्रण भेजा था.

नीतीश का कहना है कि चंद्रपुर में महिलाओं ने निषेध अभियान की कमान बहुत अच्छे से संभाली है और पटना आकर इस अभियान के संचालन के लिए अपना आभार जताया है. 

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उत्तराखंड 

जदयू नेता के अनुसार उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल इलाक़े की कुछ जनजातीय महिलाएं निषेध अभियान चला रही हैं. वो चाहती हैं कि नीतीश कुमार एक बार उनके क्षेत्र का भी दौरा करें. 

ओडिशा

जदयू नेता के अनुसार ओडिशा में निषेध अभियान बहुत ज़ोरदार तरीक़े से चलाया जा रहा था. शराब बंदी के लिए करीब दस हज़ार महिलाओं ने पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक का घेराव किया था. इस अभियान को व्यापक तौर पर सफल बनाने के लिए पार्टी, ओडिशा को सबसे माकूल मान रही है.

First published: 10 June 2016, 8:17 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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