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दुबारा शराबबंदी की कवायद में जुटे नीतीश

निहारिका कुमारी | Updated on: 1 October 2016, 14:20 IST
QUICK PILL
  • शराबबंदी को लेकर पटना हाई कोर्ट से कड़ी फटकार खाने के बाद बिहार सरकार एक बार फिर से शराबबंदी को लेकर सक्रिय हो गई है. राज्य सरकार ने अब रविवार को फिर से शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया है. 
  • पटना हाई कोर्ट की तरफ से शराबबंदी कानून को खारिज किए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है. मंत्रिमंडल की बैठक में 2 अक्टूबर से राज्य में शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया जाएगा.

शराबबंदी को लेकर पटना हाई कोर्ट से कड़ी फटकार खाने के बाद बिहार सरकार एक बार फिर से शराबबंदी को लेकर सक्रिय हो गई है. राज्य सरकार ने अब रविवार को फिर से शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया है. इसके लिए राज्य सरकार का विधि विभाग अब तकनीकी दावपेंच का सहारा ले रहा है.

शराबबंदी पर अदालत के फैसले के बाद से राज्य के प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में हलचल काफी तेज हो गई है. हाई कोर्ट का फैसला सामने आने के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार और शनिवार के अपने सभी कार्यक्रमों में स्थगित कर दिया.

मुख्यमंत्री ने शराबबंदी पर हाई कोर्ट के  फैसले के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श कर दिया. शाम चार बजे  राज्य के प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर को भी 1 अणे मार्ग बुलाया गया. इसके बाद करीब 3 घंटे की बैठक  में कई अहम फैसले हुए.

पहला शराबबंदी के मुद्दे पर राज्य सराकर नहीं झुकेगी. मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा उन्होंने शराबबंदी को लेकर राज्य की जनता से वादा किया था और वह इस फैसले से पीछे नहीं हटने वाले हैंं. उन्होंने कहा कि सरकार जाने की कीमत पर भी वह शराबबंदी लागू करेंगे.

दूसरा सबसे अहम फैसला रविवार में दुबारा से शराबबंदी लागू किए जाने का रहा. पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शराबबंदी के 5 अप्रैल के आदेश को खारिज कर दिया है. ललित किशोर ने कैच न्यूज को बताया, 'राज्य सरकार ने अगस्त में विधानसभा के मानसून सत्र में नया शराबबंदी विधेयक पारित करवा लिया है और इस पर राज्यपाल रामनाथ कोविंद की मंजूरी भी मिल गई है. हाईकोर्ट का फै सला अधिसूचना पर था जबकि अब यह कानून है.'

हाईकोर्ट ने नए विधेयक के कड़े प्रावधानों पर टिप्पणी जरूर की है लेकि न इस बारे में कोई आदेश नहीं दिया है जिससे राज्य सरकार को कानूनी रास्ता मिल गया है. इस कानून में पुलिस को बिना वारंट घर की तलाशी और शराब मिलने पर पूरे परिवार की गिरफ्तारी जैसे कड़े प्रावधान है.

तीसरा अहम फैसला यह रहा कि जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटा सकती है. हालांकि राज्य सरकार इसके पक्ष में नहीं है. कारण कि हाईकोर्ट ने शराबबंदी लागू करने के तरीकों पर ऐतराज किया है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह जायज फैसला है.

राज्य के मुख्य सचिव अंजनी सिंह ने कहा, हम अभी 2 अक्टूबर से नए कानून को लागू करवाने की तैयारी में है. पटना हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन भी हो रहा है. इसलिए उस पर आगे जाने के बारे में अभी सोचा नहीं गया है.

नीतीश कुमार का साफ कहना है कि वह सरकार की कीमत पर राज्य में शराबबंदी को फिर से लागू करेंगे.

शराबबंदी को  फिर से लागू करने के लिए कुमार ने रविवार दोपहर मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है. साथ ही पार्टी स्तर पर मुख्यमंत्री ने जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं को रह पंचायत में प्रभात फेरी निकालने का आदेश दिया है ताकि इस बारे में राज्य सरकार के रुख के बारे में जनता को बताया जा सके.

कानून के जानकारों के मुताबिक आगे चलकर इसे चुनौती भी दी जा सकती है और इसका बचाव करने में राज्य सरकार को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

होटल एंड बार ओनर्र्स एसोसिएशन के वकील वाईवी गिरी ने कहा, 'हम हाईकोर्ट के फै सले से बेहद खुश हैं. राज्य सरकार को फैसले को समझना चाहिए जिसके तहत एकतरफा तरीके से किसी कानून में बदलाव नहीं कि या जा सकता. हम नए कानून को लेकर फिर से कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.'

First published: 1 October 2016, 14:20 IST
 
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