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शराबबंदी पर पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी बिहार सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 October 2016, 17:12 IST
(पीटीआई)

बिहार की नीतीश सरकार शराबबंदी के अपने ऐतिहासिक फैसले को पटना हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी.

इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था.

पटना उच्च न्यायालय ने राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने संबंधी उसकी अधिसूचना को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने का हवाला देते हुए शुक्रवार को निरस्त कर दिया था.

इस मामले में पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी और जस्टिस नवनीति प्रसाद सिंह की पीठ ने राज्य में शराब की खपत और इसकी बिक्री पर रोक संबंधी राज्य सरकार की पांच अप्रैल की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पांच अप्रैल को जारी अधिसूचना संविधान के अनुरूप नहीं है इसलिए यह लागू करने योग्य नहीं है.

गौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार ने कड़े दंडात्मक प्रावधानों के साथ बिहार में शराब कानून लागू किया था, जिसे चुनौती देते हुए ‘लिकर ट्रेड एसोसिएशन’ के द्वारा कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी और इस पर अदालत ने 20 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार ने सबसे पहले एक अप्रैल को देशी शराब के उत्पादन, बिक्री, कारोबार, खपत को प्रतिबंधित किया, लेकिन बाद में उसने राज्य में विदेशी शराब सहित हर तरह की शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था.

First published: 2 October 2016, 17:12 IST
 
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