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बिहार: देशी शराब बंद और जहरीली शराब पर सजा-ए-मौत

निहारिका कुमारी | Updated on: 1 April 2016, 12:45 IST

बिहार विधानमंडल ने बुधवार को राज्य में आंशिक शराबबंदी को अपनी मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चुनावी वादे में शराबबंदी का वादा किया था. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने सबसे पहले इसकी घोषणा भी की थी. अब बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों ने उत्पाद (संशोधन) विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इस संशोधन के बाद राज्य में अवैध शराब के धंधे से जुड़े लोगों को फांसी की सजा भी हो सकती है.

राज्य सरकार की नई उत्पाद नीति शुक्रवार, एक अप्रैल से लागू हो जाएगी. इसके तहत राज्य में देसी और मसालेदार शराब के उत्पादन और कारोबार को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके साथ ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में विदेशी शराब पर भी पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. अब सिर्फ राज्य के शहरी इलाकों में सरकारी दुकानों से ही राज्य सरकार शराब बेचेगी.

बदलाव की शुरुआत अपने घर से

बिहार में शराबबंदी का यादगार पल रहा विधानसभा में विधायकों द्वारा शराब छोड़ने की शपथ लेना. मुख्य विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने सत्तापक्ष के विधायकों और मंत्रियों से शराब नहीं छूने की शपथ लेने की मांग की. जैसे ही यह प्रस्ताव आया, विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने इसे अपनी मंजूरी दे दी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा, "चैरिटी बिगिन्स ऐट होम. इस मांग को कतई न टाला जाए और सभी विधायक इस बारे में आज ही संकल्प लें कि वे शारब नहीं छूएंगे." इसके बाद अध्यक्ष ने विधायकों को शराब को नहीं छूने और दूसरों को भी इससे दूर रखने की शपथ ली.

गौरतलब है कि वर्तमान विदानसभा के कुछ सदस्यों पर शराब के नशे में छेड़खानी करने से लेकर बलात्कार करने तक के आरोप लग चुके हैं. हाल ही में भागलपुर से जदयू विधायक गोपाल मंडल की शराब के नशे में बार-बालाओं पर पैसे लुटाने की तस्वीर आई थी. इससे नीतीश सरकार की काफी आलोचना हुई थी.

लागू होगी पूर्ण शराबबंदी

शराबबंदी पर विधानसभा में हुई बहस में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार धीरे-धीरे पूर्ण शराबबंदी की दिशा में आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा, "इस बारे में किसी कोई संशय नहीं रहना चाहिए. जिस दिन राज्य में इसके लिए माहौल बन जाएगा, हम यहां पूरे तरीके से शराबबंदी को लागू कर देंगे. हमने तो इस विधेयक की पहली लाइन ही लिखी है कि हमारा मकसद शराबबंदी को लागू करना है. पहले चरण में हम ग्रामीण इलाकों में पूर्ण प्रतिबंध और शहरी इलाकों में आंशिक तौर पर पाबंदी आयद कर रहे हैं. यहां सरकारी दुकानों पर सिर्फ विदेशी शराब ही बिक सकेगी. हमने राज्य में शराब की दुकानों की तादाद 5,500 से कम करके 655 कर दी है. यह दुकान भी राज्य सरकार खुद चलाएगी."

शराबबंदी के नए प्रावधान को लागू करवाने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस और उत्पाद विभाग के लिए कुछ नए दिशा निर्देश बनाए हैं. इन्हें लागू करने के लिए अधिकारियों को भी मुस्तैद रहने को कहा गया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक पुलिस और उत्पाद विभाग में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां आम लोग इससे जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे. उसके बाद कंट्रोल रूम से स्थानीय थाने को खबर की जाएगी, जिसे तुरंत जाकर मामले की जांच करनी होगी और जल्द से जल्द कंट्रोल रूम को जानकारी देनी होगी.

पड़ोसी राज्यों की सीमा पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वहां से किसी भी तरह की  शराब की अवैध तस्करी पर नजर रखी जाएगी. शराब की ढुलाई करने वाले वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक लॉक और जीपीएस लगाया जाएगा. साथ ही, दूसरे राज्यों में जाने वाले ऐसे वाहनों को 24 घंटे के भीतर राज्य छोड़ना होगा, नहीं तो पुलिस कार्रवाई करेगी.

पीना-पिलाना भी बनेगा अपराध

शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार के ग्रामीण इलाकों में शराब पीना-पिलाना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा. इसके तहत 5 साल की कैद तक हो सकती है. वहीं, शहरी इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हंगामा करने पर भी 5 साल की सजा हो सकती है.

अवैध तरीके से शराब बेचने या खरीदने पर भी राज्य सरकार ने 8-10 साल की कैद का प्रावधान किया है. इस नए कानून की सबसे अहम बात जहरीली शराब को लेकर बनाए गए नियम हैं. अब से बिहार में जहरीली शराब पीने से अगर कोई हादसा होता है तो इसके दोषियों को फांसी की सजा का प्रावधान नए कानून में किया गया है. अगर इस तरह की शराब पीकर लोगों में स्थायी अपंगता होती है तो दोषियों को उम्रकैद की सजा हो सकती है.

First published: 1 April 2016, 12:45 IST
 
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