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बिहार बोर्ड टॉपर्स विवाद में सतह पर आई गठबंधन की गांठ

निहारिका कुमारी | Updated on: 7 June 2016, 23:05 IST
(फाइल फोटो)

बिहार में बाहरवीं के नतीजों में भारी गड़बड़ी के बाद अब सत्तारुढ़ महागठबंधन (जदयू-राजद-कांग्रेस) के बीच खींचतान शुरू हो गई है. खींचतान के सिलसिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार देर शाम टॉपर्स विवाद की गड़बड़ी की जांच के लिए बनी दो समितियों को भंग कर दिया. साथ ही, उन्होंने इसकी तहकीकात की जिम्मेदारी राज्य पुलिस को सौंप दी.

दरअसल, इस घटना के तार अलग-अलग तरीके से महागठबंधन के तीनों घटक दलों से जुड़ रहे हैं. इसी वजह से तीनों के बीच रस्साकस्सी भी तेज होती जा रही है. बिहार बोर्ड की परीक्षा में हुई गड़बड़ी को समझने के लिए इसके तीन सूत्रधारों को जानना जरूरी होगा.

इस घटना के पहले सूत्रधार हैं वैशाली जिले में स्थित विशुन राय इंटर कॉलेज के मालिक बच्चा राय. राय साब राजद के पुराने समर्थक रहे हैं. सभी टॉपर्स इसी स्कूल से पास हुए हैं. राय ने बीते विधानसभा चुनाव में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे और बिहार के मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के लिए चुनाव प्रचार भी किया था.

इस घटना के तार अलग-अलग तरीके से महागठबंधन के तीनों घटक दलों से जुड़ रहे हैं

लंबे समय से राय राजद के लिए चुनावी चंदा जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. उन्हें लालू यादव का करीबी माना जाता है. राजद के विरोध के बावजूद जदयू नेताओं को राय पर कार्रवाई से कोई गुरेज नहीं था. हालांकि, जैसे ही मामले की आंच जदयू की दहलीज तक पहुंची पार्टी ने तुरंत अपने सुर बदल लिए.

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इस जगहंसाई के दूसरे सूत्रधार राज्य के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी हैं. जाहिर है राज्य के शिक्षा मंत्री होने के नाते इस गड़बड़ी की एक हद तक जिम्मेदारी उनकी भी बनती है. चौधरी कांग्रेस कोटे से मंत्री हैं. चौधरी के कंधों पर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी है. इस साल की शुरुआत में चौधरी ने 12वीं और 10वीं की परीक्षा पूरी तरह से कदाचार मुक्त होने का दावा किया था.

इसके लिए उनके विभाग ने नकल रोकने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम भी किए थे. इस वजह से इस बार 12वीं और 10वीं में पास होने वाले छात्रों की तादाद में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है. लेकिन मीडिया ने जब बिहार के टॉपर्स के ज्ञान को दुनिया के सामने ला दिया, तब से चौधरी तिलमिलाए हुए हैं.

अपनी फजीहत को खत्म करने के लिए उन्होंने एक रास्ता चुना. उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक वे हर हाल में बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद को बर्खास्त करना चाहते थे. इस तरह से वे पूरे विवाद को ठंडा करने की मंशा रखते थे. उन्होंने शुक्रवार को साफ कहा था, “इस घटना के किसी भी जिम्मेदार को बख्शा नहीं जाएगा. चाहे वह बोर्ड का अध्यक्ष ही क्यों न हो. सभी पर कार्रवाई होगी.” उन्होंने रविवार को बोर्ड के क्रियाकलापों की जांच के लिए एक कमेटी भी बना दी थी.

लालकेश्वर प्रसाद इस पूरी फजीहत के तीसरे कोण हैं जिनके तार जदयू से जुड़ते हैं. इस तरह तीनों पार्टियों का यह त्रिकोण मिलकर महागठबंधन की सरकार बनाता है. बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद का नाम आने के बाद जदयू तिलमिला गई. प्रसाद, नीतीश कुमार के पुराने समर्थक हैं.

वे मुख्यमंत्री के सजातीय होने के साथ-साथ उनके गृह जिले नालंदा से ही आते हैं. 2012 में जब प्रेस काउंसिल के तत्कालीन अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने बिहार में प्रेस सेंसरशिप की बात कही थी, तब प्रसाद ने उनके सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी थी. उस वक्त वे पटना के प्रतिष्ठित पटना कालेज के प्रिसंपल थे. उनकी पत्नी जदयू की विधायक भी रह चुकी हैं. इसीलिए जदयू में प्रसाद की अच्छी हनक है.

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पार्टी इस मामले में किसी तरह अपनी छवि बचाए रखना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से प्रसाद ने रविवार शाम को बिना राज्य सरकार की अनुमति के एक न्यायिक जांच बिठा दी.

कांग्रेस के अशोक चौधरी, राजद के बच्चा राय और जदयू के लालकेश्वर प्रसाद, ये तीनों जब बिहार बोर्ड के टॉपर्स के विवाद में शामिल हो गए तब मामले को सुलझाने के लिए किसी बड़े रेफरी की जरूरत पड़नी ही थी.

लालकेश्वर प्रसाद इस पूरी फजीहत के तीसरे कोण हैं जिनके तार जदयू से जुड़ते हैं

अंतत: सोमवार को नीतीश कुमार इस बदनामी से बिहार को बाहर निकालने और झगड़ा सुलझाने के लिए मैदान में उतरे. आनन-फानन में सोमवार को शिक्षा विभाग और बोर्ड अधिकारियों की बैठक बुलाई गई. इसके साथ ही कुमार ने तीनों दलों के नेताओं से आपस में छींटाकशी से बचने की सलाह भी दी.

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टकराव रोकने के लिए उन्होंने बोर्ड और विभाग की समितियों को भंग करने का आदेश दिया और मामले की जांच पुलिस से कराने को कहा. मालूम हो कि राज्य में गृह विभाग नीतीश कुमार ने अपने पास रखा है. इसके अलावा, पुलिस को दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.

नीतीश कुमार के इस हस्तक्षेप से क्या हासिल हुआ यह तो अभी तक नहीं पता लेकिन कुछ बातें साफ हो गई हैं मसलन तीनों पार्टियों के लोगों के शामिल होने के बाद अब इस मामले के किसी तार्किक नतीजे तक पहुंचने की संभावना बहुत कम हो गई है. दूसरा, नकली टॉपर्स पर आपराधिक मामला दर्ज भी कर लिया गया तो बाकी जिन लाखों लड़कों ने परीक्षा पास की है उनके रिजल्ट कितने विश्वसनीय होंगे, इसकी जांच कौन करेगा?

जाहिर है इन सवालों से ज्यादा जरूरी फिलहाल नीतीश कुमार के सामने गठबंधन की गांठों को कसे रखना है. ढीला पड़ते ही सब बिखर जाएगा.

First published: 7 June 2016, 23:05 IST
 
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