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बिजनौर गोलीकांड: एफआईआर कहती है कि हमलावर मुसलमानों को उजाड़ने के लिए आए थे

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 September 2016, 12:37 IST

दिल्ली, मुंबई जैसे शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक में किसी लड़की के साथ छेड़खानी हो जाना आम है. यह शर्मनाक कृत्य हमारे समाज में आएदि की कहानी है. मगर जब यौन हिंसा के किसी भी मामले में पीड़ित और आरोपी का धर्म अलग-अलग होता है तो ऐसी घटनाएं अक्सर सांप्रदायिक रूप ले लेती हैं.

क्या बिजनौर में हुए गोलीकांड में सांप्रदायिकता की भी कोई भूमिका है? बिजनौर में छेड़खानी की वजह से एक परिवार के तीन लोगों की हत्याएं कर दी गईं. छेड़छाड़ की घटना में तीन लोगों की हत्या हो जाना सामान्य घटना नहीं है. लिहाजा शुरु से कयास लगाया जा रहा था कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा के पीछे शायद सांप्रदायिक भावनाएं काम कर रही थीं.

बिजनौर की घटना के पीछे सांप्रदायिक भावनाएं काम कर रही थी इस बात का एक सबूत बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से मिलता है. कैच के पास वह एफआईआर मौजूद है.

एफआईआर कहती है, "बस अड्डे पर नितिन और उसके साथ चार लड़कों ने शबाना (बदला हुआ नाम) को पकड़ कर छेड़छाड़ की. तालिब शबाना को लेकर घर आ गया और इसकी शिकायत संसार सिंह से की तथा पुलिस को भी खबर की. (इस पर) संसार वगैरह ने हमें गालियां दी. और अपने लोगो को, जिन्हें पहले से ही इकट्ठा कर रखा था, कहा आज इन मुसलमानों को उजाड़ दो"

एफआईआर के मुताबिक गोलीकांड से ठीक पहले पीड़ित लड़की के पिता मुख्य आरोपी संसार सिंह के घर उनके बेटे की शिकायत करने गए थे. जहां उन लोगों ने मुसलमानों को गांव से उजाड़ने की धमकी दी.

मुजफ्फरनगर में हुए व्यापक दंगे के बाद से ही इस पूरे इलाके में धार्मिक हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं

बिजनौर पुलिस के एक बड़े अफसर नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं कि इस घटना के पीछे निश्चित तौर पर धार्मिक घृणा की भावना काम कर रही थी. आरोपियों का भले ही कोई राजनैतिक जुड़ाव न हो लेकिन वे सभी इस इलाके में लंबे समय से चल रहे धार्मिक ध्रुवीकरण से प्रभावित हैं. उन्होंने इस पैमाने पर गोलीबारी इसीलिए की क्योंकि यह दूसरे धर्म का मामला था.

मुजफ्फरनगर में हुए व्यापक दंगे के बाद से ही इस पूरे इलाके में धार्मिक हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. दो साल पहले मेरठ में एक हिंदू-मुस्लिम जोड़े की आड़ में भगवा पार्टियों ने लव जिहाद की फर्जी कहानियां खूब फैलाई थींं.

जब तब यहां छोटी-मोटी बातों पर सांप्रदायिक माहौल बन जाता है. लड़कियां इस पूरे नैरेटिव का अहम हिस्सा बन गई हैं. अक्सर अंतरधार्मिक शादियों और प्रेम प्रसंगों को धार्मिक रंग देकर माहौल को खराब करने की कोशिशें होती हैं. पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक तरह से सांप्रदायिकता के मुहाने पर खड़ा है जहां कोई भी छोटी सी घटना बड़े दंगे में तब्दील हो सकती है.

पेदा गांव में मारे गए तीन लोगों के परिजनों का कहना है कि सबकुछ अचानक नहीं हुआ है. छेड़खानी के महज़ आधे घंटे के भीतर इतनी बड़ी संख्या में आकर हमलावरों ने गोलीबारी की. जाहिर है उनके मन में पहले से मुसलमानों को लेकर इस तरह की भावनाएं मौजूद थीं.

नाबालिग लड़की (जिसके साथ) के चाचा असलम कहते हैं, आरोपी नितिन हमारी लड़की को जानता था. जिन्होंने हमारे घर पर चढ़कर गोलीबारी की, सभी हमें पहले से जानते थे.

एफआईआर में और क्या है?

बिजनौर पुलिस ने एफआईआर में जाट समुदाय के 28 लोगों के ख़िलाफ़ 10 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है. इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, दंगा भड़काना और यौन उत्पीड़न जैसे मामले शामिल हैं.

लेकिन इसमें साजिश के तहत की गई वारदात की धारा नहीं लगाई है. बिजनौर पुलिस के एक अफसर कहते हैं कि पूछताछ में अगर खुलासा होता है कि वारदात की तैयारी पहले से की गई थी तो साजिश की धारा जोड़ी जा सकती है.

पुलिस ने कच्छपुरा गांव के ग्राम प्रधान दिलावर सिंह को भी आरोपी बनाया है. इनके अलावा दो होमगार्ड भी मुलज़िमों की लिस्ट में शामिल हैं. ज्यादातर आरोपी नया गांव और कच्छपुरा गांव के रहने वाले हैं.

First published: 18 September 2016, 12:37 IST
 
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