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बिजनौर गोलीकांड: इस घर में अब पांच विधवा बहुएं रहती हैं

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 17 September 2016, 15:46 IST
(कैच)

बिजनौर के पेदा गांव में लड़की के साथ छेड़छाड़ के बाद जिस घर के तीन लोगों की हत्याएं हुई हैं, उसकी कहानी बहुत करुणा भरी है.

यह करीब 30 लोगों का एक संयुक्त परिवार था जिसमें आज की तारीख में कम से कम छह विधवाएं हैं. ज़ख्मी लोगों में एक साल की इंशा है और 80 साल की एक बुज़ुर्ग महिला सदीकन हैं, जो इस हमले में घायल हो गईं.

इस परिवार के मुखिया हसन खेतिहर मजदूर थे. इनके कुल छह बेटे थे जिनमें से अब तक पांच की मौत हो चुकी है. दो बीमारी से मरे और दो गोली लगने से और एक को काम के दौरान करंट लग गया था.

इस परिवार में अब छह भाइयों में से पांच की पत्नियां विधवा हैं. इनके 20 छोटे बच्चे हैं जिनमें आठ लड़कियां हैं. कमाने वाले ज़्यादातर नाबालिग हैं.

फिलहाल परिवार में सिर्फ एक भाई फुरक़ान सही सलामत हैं, बाकी पांचो भाइयों की त हो चुकी है

यह परिवार बीते दो से ढाई साल के भीतर बुरी तरह बिखरा गया है. घर के मुखिया हसन जो तकरीबन आठ साल पहले बीमारी की वजह से मरे थे उनके सबसे बड़े बेटे ज़ुल्फिकार पुताई का काम करते थे. दो साल पहले एक घर में पुताई करते हुए उन्हें करंट लग गया. फर्श पर गिरने से उनके सिर में चोटें आईं और उनकी मौत हो गई.

शुक्रवार को हुए गोलीकांड में उन्हीं ज़ुल्फ़िक़ार के बेटे सरफराज़ की भी मौत हो गई है. उनके एक और बेटे नौशाद भी पुताई का काम करते थे.

पिता की मौत से छह महीने पहले ये भी एक हादसे का शिकार हुए. पुताई के दौरान नीचे गिरने से रीढ़ की हड्डी में ज़ख्म हो गया है. अब वो काम नहीं कर पाते.

दूसरे नंबर पर अनीसुद्दीन थे जो शुक्रवार की सुबह गोली लगने की वजह से मारे गए. तीसरे नंबर पर रइसुद्दीन थे जो छह महीने पहले बीमारी की वजह से मर चुके हैं. इन्होंने अपनी बेटी की शादी रिज़वान से की थी. इस गोली कांड में सबसे ज़्यादा नाज़ुक हालत उन्हीं की है.

रिज़वान का इलाज फिलहाल एम्स, दिल्ली में चल रहा है. चौथे भाई इरफ़ान को भी बीमारी ही निगल चुकी है. सबसे छोटे भाई एहसान भी गोलीकांड में मारे गए. फिलहाल सिर्फ एक भाई फुरक़ान सही सलामत हैं जो एहसान से बड़े हैं.

इस कांड से जुड़ी एक कहानी कुछ मीडिया संस्थानों ने चलाई कि मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़की से छेड़खानी की

इस कांड में घायल इंशा सबसे कम उम्र की पीड़िता है जिसकी उम्र एक साल है. उसके पांव में गोली के छर्रे लगे हैं लेकिन हालत ख़तरे से बाहर है. इंशा के दादा अनीसुद्दीन हैं जो गोलीकांड का शिकार हुए हैं. ताई सदीकन की पसलियां पथराव की वजह से टूट गई हैं.

इस परिवार के पड़ोसी असलम के मुताबिक कल के हमले में कुल पीड़ितों की संख्या 18 है. इनमें से तीन की मौत हुई है. तीन का इलाज मेरठ में और एक का दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा है. बाकी सभी को बिजनौर के ज़िला अस्तपाल में भर्ती करवाया गया है.

इस कांड से जुड़ी एक कहानी कुछ मीडिया संस्थानों ने चलाई कि मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़की से छेड़खानी की. उसके बाद प्रतिक्रिया में जाट समुदाय के लोगों ने उनपर हमला किया. लेकिन इस कहानी की किसी भी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हो सकी है.

कैच ने इस संबंध में तमाम लोगों से बातचीत की. इनमें पेदा गांव के ग्रामीण, दिल्ली से पेदा घटना को कवर करने गए कुछ पत्रकार और बिजनौर के पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं.

पेदा गांव से लौटे डीएनए के रिपोर्टर अज़ान जावेद ने कैच न्यूज़ को बताया कि वारदात सुबह सात बजे के करीब हुई. नौवीं क्लास में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की जो ज़ुल्फिकार के परिवार की थी, अपने भाई के साथ स्कूल जा रही थी.

रास्ते में दोनों पर उनके घर के करीब ही पांच-छह लड़कों के समूह ने फब्तियां कसी. सभी लड़के जाट समुदाय के थे. नाबालिग के भाई तालिब ने इसका विरोध किया. दोनों पक्षों के बीच झगड़े को वहां मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करके ख़त्म करवा दिया.

तालिब जब अपनी बहन को स्कूल छोड़कर वापस घर आया तो पाया कि उसके चाचा असलम की उन लड़कों के साथ बहस हो रही थी. बीच-बचाव करने पर उन लोगों ने यहां तालिब को बुरी तरह पीटा. फिर आसपास मौजूद लोगों ने तालिब और असलम को बचाकर उनके घर पहुंचाया.

घटना के कई चश्मदीदों ने भी अपनी बात रखी है. उनके मुताबिक घर में जब तालिब का इलाज चल रहा था, तभी आठ बजे के दौरान लगभग 20 उनके घर पहुंचे और गोलीबारी शुरू कर दी. मौके पर जो भी दिख रहा था, उन पर निशाना लगाया जा रहा था. इसके अलावा घर की महिलाओं को निशाना बनाया गया.

बिजनौर के स्थानीय रिपोर्टर ज़ुबैर बताते हैं, 'शुरुआती ख़बर यही आई थी कि मुसलमानों ने जाट समुदाय की एक लड़की के साथ छेड़खानी की है मगर जब हम मौके पर पहुंचे और पुलिस से बात की तो मामला उलटा निकला.'

ज़ुबैर ने बताया कि स्थानीय मीडिया ने भी तथ्यों की पड़ताल किए बिना गलत तथ्यों के आधार पर पूरी घटना को पेश किया. लगातार फैल रही अफवाहों के नाते पुलिस ने फिलहाल बिजनौर में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी है.

मौके का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें दो पुलिसकर्मी रविंद्र चौधरी और अमित चौधरी और हमलावर दिखाई दे रहे हैं. इन दोनों को निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा एक और पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया है.

कहा जा रहा है कि दोनों पुलिसवाले भी जाट समुदाय के थे लिहाजा उन्होंने इस मामले में हमलावरों को रोकने का कोई प्रयास तक नहीं किया और घटना के वक्त मूकदर्शक बने रहे.

इस घटना पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी एक प्रेस नोट जारी कर स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट किया है. बिजनौर के पुलिस अधीक्षक उमेश श्रीवास्तव ने कैच को बताया, 'एक मुस्लिम लड़की का कुछ जाट लड़कों ने उत्पीड़न किया. उसके बाद हुई झड़प में जाटों ने फायरिंग की. जिसमें पीड़ित लड़की के परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई.'

शुक्रवार को देर रात पुलिस ने इस मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी की है. ये सभी पेदा गांव के आस पास के ही लोग हैं. इनके नाम सतीश, राजपाल, अनुज, टीकम सिंह और पंकज हैं. एक गिरफ्तार व्यक्ति का नाम अभी पता हीं चल सका है. पुलिस अभी भी इस मामले में करीब 15 लोगों की तलाश कर रही है. शुक्रवार की शाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को तीनों मौतों के लिए बीस-बीस लाख रुपए और घायलों को पांच लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है.

First published: 17 September 2016, 15:46 IST
 
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