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कल्पना चावला बर्थडे: पहले ही तय थी कल्पना चावला की मौत!

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 17 March 2018, 11:03 IST

कल्पना चावला देश का गर्व जिसने अंतरिक्ष तक भारत का झंडा फहराया. कल्पना बचपन से ही ऊंची उड़ान भरने के सपने देखती थीं. वह अपने परिवार में सबसे छोटी थीं. कल्पना ने 1982 में चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री और 1984 से टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद 1988 में उन्होंने नासा के लिए काम करना शुरू किया.

कल्पना ने अंतरिक्ष की पहली उड़ान एसटीएस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी कीं.

पेक के एरोनॉटिकल विभाग की पहली छात्रा थी कल्पना

कल्पना चावला ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से ऐरोनॉटल इंजीनियरिंग डिग्री पूरी की थी. उसके बाद वर्ष 1982 में मास्टर्स के लिए यूनाइटेड स्टेट में गई. जहां पर कल्पना ने ऐसोस्पेस इंजीनियरिंग पूरी की. वर्ष 1988 में कल्पना ने नासा में काम शुरू किया और वर्ष 1997 में पहली बार और वर्ष 2003 में दूसरी बार स्पेस में उड़ान भरी थी. दूसरी उड़ान की लैंडिंग से पहले ही स्पेसशिप दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें कल्पना चावला की मौत हो गई.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोलंबिया स्पेस शटल के उड़ान भरते ही पता चल गया था कि ये सुरक्षित जमीन पर नहीं उतरेगा, तय हो गया था कि सातों अंतरिक्ष यात्री मौत के मुंह में ही समाएंगे. फिर भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. बात हैरान करने वाली है, लेकिन यही सच है.

इसका खुलासा मिशन कोलंबिया के प्रोग्राम मैनेजर ने किया था. यात्रा के हर पल मौते के साये में स्पेस वॉक करती रहीं कल्पना चावला और उनके 6 साथी. उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई कि वो सुरक्षित धरती पर नहीं आ सकते. वो जी जान से अपने मिशन में लगे रहे, वो पल-पल की जानकारी नासा को भेजते रहे लेकिन बदले में नासा ने उन्हें पता तक नहीं लगने दिया कि वो धरती को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके हैं, उनके शरीर के टुकड़ों को ही लौटना बाकी है.

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उस वक्त सवाल ये था कि आखिर नासा ने ऐसा क्यों किया? क्यों उसने छुपा ली जानकारी अंतरिक्ष यात्रियों से और उनके परिवार वालों से. लेकिन नासा के वैज्ञानिक दल नहीं चाहते थे कि मिशन पर गये अंतरिक्ष यात्री अपनी यात्रा को मौत के गम और भय के साथ न गुजारें. उन्होंने बेहतर यही समझा कि हादसे का शिकार होने से पहले तक वो मस्त रहें. मौत तो वैसे भी आनी ही थी.

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इस तरह कल्पना चावला के यह शब्द सच हो गए,” मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ. प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी.“

First published: 17 March 2018, 9:58 IST
 
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