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Birthday Special: फटे कुर्ते पर किसी ने टोका तो यूं दिया पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 October 2017, 10:39 IST

देशभर में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 114वीं जयंती मनाई जा रही है. जानें देश के प्रधानमंत्री के बारे में रोचक बातें जो जीवन में प्रेरणा देती हैं. 

शास्त्रीजी का वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था. शास्त्रीजी के पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक शिक्षक थे. थोड़े समय के बाद वे भारत सरकार के राजस्व विभाग में क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए और वहीं से रिटायर हुए.

लाल बहादुर शास्त्री की शिक्षा वाराणसी के हरीशचंद्र इंटर कॉलेज और काशी विद्यापीठ से हुई थी. उच्च शिक्षा में एमए की डिग्री मिलने के बाद इन्हें 'शास्त्री' की उपाधि से सम्मानित किया गया. शास्त्रीजी का राजनैतिक जीवन भारत सेवक संघ से शुरू हुआ.

भारत की स्वतंत्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया. यूपी में गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में उन्हें पुलिस एवं यातायात मंत्रालय सौंपा गया.

देखिए लाल बहादुर शास्त्री के बारे में पांच अंजानी बातें: 

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में शास्त्री जी साल 1952 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किए गए. 1952, 1957 और 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से विजय दिलाने में शास्त्री जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

रेलमंत्री रहते हुए जनता से मिलने वे काशी गए थे. जब वे अपने वापस लौट रहे थे उस वक्त एक सहयोगी ने उन्हें साइड में ले जाकर टोका कि आपका कुर्ता फटा हुआ है. इस पर उन्होंने ने उसे जवाब दिया कि गरीब का बेटा हूं. ऐसे रहूंगा तो गरीब का दर्द समझ सकूंगा.

इनकी प्रतिभा और निष्ठा को देखते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के पश्चात कांग्रेस पार्टी ने 1964 में लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री पद का उत्तरदायित्व सौंपा. आपने 9 जून 1964 को भारत के प्रधान मंत्री का पद भार ग्रहण किया.

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 26 जनवरी, 1965 को देश के जवानों और किसानों को अपने कर्म और निष्ठा के प्रति सुदृढ़ रहने और देश को खाद्य के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जय जवान, जय किसान' का नारा दिया. यह नारा आज भी भारतवर्ष में लोकप्रिय है.

उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के पश्चात 11 जनवरी, 1966 की रात को रहस्यमय परिस्थितियों में आपकी मृत्यु हो गई. शास्त्रीजी की सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया. 

First published: 2 October 2017, 10:39 IST
 
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