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बीजेपी की शिवसेना को खरी-खरी: हमसे दिक्कत, तो तलाक ले लो श्रीमान!

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 June 2016, 13:24 IST
(पीटीआई)

बीजेपी और शिवसेना की नूराकुश्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. पिछले कई दिनों से शिवसेना के द्वारा अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.

लेकिन इस बार बीजेपी ने शिवसेना पर पलटवार करते हुए जोरदार जवाब दिया है. बीजेपी ने रिश्ते सामान्य न रहने की हालत में शिवसेना को ‘तलाक’ लेने तक का सुझाव दे डाला है.

बीजेपी प्रकाशन की ओर से एक लेख में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को ‘तलाक’लेने की चुनौती दे दी है. बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई के प्रकाशन ‘मनोगत’में पार्टी के महाराष्ट्र प्रवक्ता माधव भंडारी ने यह लेख लिखा है.

बीजेपी प्रवक्ता माधव भंडारी का लेख

माधव भंडारी ने ‘आप तलाक कब ले रहे हैं, श्रीमान राउत’ नामक शीर्षक से एक लेख लिखा है. इस लेख में उन्होंने शिवसेना को गठबंधन से अलग होने की चुनौती दी है. इसके अलावा दोनों पार्टियों के कई वर्ष पुराने गठबंधन में बीजेपी की ओर से किए गए त्याग का बखान भी किया गया है.

भंडारी ने लेख में शिवसेना को शोले फ़िल्म में जेलर का मशहूर किरदार निभाने वाले फिल्म अभिनेता असरानी का दृश्य भी याद दिलाया है.

उद्धव ठाकरे का नाम न लेते हुए लेख में कहा गया है कि पार्टी प्रमुख को डर है कि कहीं तलाक का फैसला लिया, तो उनके साथ पार्टी का कोई एमएलए नहीं रहेगा.

पिछले दिनों सामना के संपादक और सांसद संजय राउत ने अपने एक भाषण मे केंद्र और राज्य सरकार की तुलना निजाम के पिता से की थी. राउत के बयान पर भंडारी ने अपने लेख में खुलकर आपत्ति जतायी है.

निजाम वाले बयान पर निशाना

शिवसेना के सांसद संजय राउत के निजाम वाले बयान को लेकर इस लेख में उन पर निशाना साधा गया है. लेख में कहा गया, "एक तरफ वे उसी ‘निजाम’ के दिए प्लेट में बिरयानी खाते हैं और दूसरी तरफ हमारी आलोचना करते हैं. उनको केंद्र और राज्य में मंत्रालय मिले हुए हैं.

उसी निजाम की मदद से सत्ता का सुख भोग रहे हैं और फिर बीजेपी को बुरा-भला कहते हैं. इसे कृतघ्नता कहते हैं." बीजेपी के इस लेख में कहा गया है कि अगर वे निजाम से इतने पीड़ित महसूस करते हैं, तो बाहर क्यों नहीं निकल जाते. परंतु वे साहस नहीं दिखाते हैं.

राउत ने हाल ही में कहा था कि केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी शासित सरकारें निजाम की सरकार से भी बदतर हैं.

'तलाक कब ले रहे हैं श्रीमान?'

भंडारी ने कहा, "वे हमारे साथ बैठते है, हमारे साथ खाते हैं और फिर हम पर हमले भी करते हैं. बेहतर होगा कि निजाम के पिता से तलाक ले लिया जाए. इसलिए श्रीमान राउत आप तलाक कब ले रहे हैं?"

राउत के कथित पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए लेख में कहा गया है, "राउत को लगता है कि मौजूदा सरकार ने बहुत अन्याय किया है. उनको महाराष्ट्र में ‘जल युक्त शिविर’ के माध्यम से किए गए बहुत सारे काम भी दिखाई नहीं देता."

चुनावों में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन का जिक्र करते हुए लेख में कहा गया, "1995 में बीजेपी ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ा और 65 जीती. 2009 में कम सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी ने शिवसेना से अधिक सीटें जीती थीं."

'सियासी हालात को स्वीकारे शिवसेना'

भंडारी ने कहा, "संजय राउत और शिवसेना प्रमुख इस तथ्य को पचा नहीं पा रहे हैं कि उनकी ताकत लगातार कम हो रही है और इसीलिए वे परेशान हैं. उनको बदलते राजनीतिक हालात को स्वीकार करना चाहिए और हमें जिम्मेदार ठहराना बंद करना चाहिए."

उनके लेख में कहा गया, "हमने औरंगाबाद और कल्याण-डोंबीवली चुनावों में शिवसेना को पीछे छोड़ दिया. मतदाता बीजेपी को मजबूत विकल्प के तौर पर मान रहे हैं और यही शिवसेना को सबसे ज्यादा चुभ रहा है."

इस लेख में आगे कहा गया है, "बीजेपी ने कई त्याग किए. जैसे उसने अतीत में पुणे, ठाणे और गुहागढ़ जैसे क्षेत्रों को शिवसेना के लिए छोड़ दिया. जबकि इन जगहों से बीजेपी चुनाव जीतती थी."

अपने लेख का बचाव करते हुए भंडारी ने कहा, "पहले हम ऐसी चीजों को नजरअंदाज कर दिया करते थे, लेकिन अब उन्होंने विनम्रता की सारी सीमाएं लांघ दी हैं.

हमारे हालिया राज्य सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई थी. अब हम उनको सीधे तौर पर बताना चाहते हैं कि अगर उन्हें ठीक नहीं लगता तो वे अपना रास्ता तलाशने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं."

First published: 23 June 2016, 13:24 IST
 
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