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जम्मू-कश्मीर: पीडीपी-बीजेपी गठबंधन अगले चरण के लिए तैयार

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2016, 8:02 IST
QUICK PILL
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा के हालिया बयानों से लगता है कि बीजेपी और पीडपी जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए समझौते पर राजी हो गए हैं.
  • पीडीपी नेताओं के अनुसार केंद्र की बीजेपी सरकार ने उसकी कई मांगे मान ली है. केंद्र सरकार, राज्य के राज्यपाल और सेना के कुछ हालिया फैसलों से पीडीपी उत्साहित है.

सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर के तीनों क्षेत्रों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए 'अतिरिक्त प्रयास करने' के लिए तैयार है.

उनके बयान का पीडीपी ने स्वागत किया. पीडीपी ने कहा, "ये सकारात्मक बदलाव है, इसका सरकार गठन की प्रक्रिया पर सकारात्मक असर पड़ेगा."

हालांकि जेटली ने अपने बयान में ऐसा कुछ नहीं कहा जिसे जम्मू-कश्मीर में सरकार के गठन से सीधे जोड़ा जा सके. फिर भी पीडीपी उसे लेकर उत्साहित है.

पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर कहते हैं, "हम वित्त मंत्री के बयान का स्वागत करते हैं क्योंकि राज्य के विकास और वादे पूरे करने की बात करना अच्छा है."

पीडीपी नेता मानते है कि राष्ट्रीय राजनीति के दबाव के चलते बीजेपी जम्मू-कश्मीर में गठबंधन पर ढिंढोरा नहीं पीटना चाहती

गठबंधन सरकार के बनाने के लिए पीडीपी ने जम्मू  और कश्मीर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाए, राज्य को बिजली परियोजनाएं देने, अफ्सपा को हटाने, अलगाववादी समूहों से वार्ता, बाढ़ राहत और पुनर्वास जैसी शर्तें रखी हैं. दोनों दलों की इनमें से ज्यादातर मुद्दों पर सहमति भी बन चुकी है.

जेटली के बयान को एक सहज आश्वासन के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने किसी विवादित मुद्दे पर कुछ नहीं कहा. वित्त मंत्री ने पहले से ही राज्य के लिए घोषित 80 हजार करोड़ रुपये पैकेज को लागू करने का वादा किया. कुछ परियोजनाओं पर पहले से ही कार्य शुरू हो चुका है.

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वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मुज़फ्फर हुसैन बेग़ ने भी जेटली के बयान का स्वागत किया है. पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी ऐसी ही भावनाएं व्यक्ति की हैं.

राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा द्वारा पिछले कुछ हफ्तों में उठाए गए कुछ कदम से भी पीडीपी की उम्मीदें बढ़ी हैं. मसलन, सरकार ने बाढ़ पीड़ित कश्मीरी व्यापारियों को 43.57 करोड़ रुपये की राहत राशि के रूप में वितरित किए. इसमें से 22.98 करोड़ रुपये श्रीनगर के उन कारोबारियों में बांटे गए जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे.

बुधवार को डिविजनल कमिश्नर असगर समून ने कहा कि सरकार ने बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए 210 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की है.

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इसके अलावा सेना के 'जम्मू-कश्मीर में भूमि विषय' पर जारी बयान से भी सकारात्मक असर पड़ा है. इस बयान में कहा गया है, "हम सिविल मिलिट्री लाइजन कॉन्फ्रेंस 2015 समेत सभी पुरानी वार्ताओं में हुई आपसी सहमतियों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है."

बयान में आगे कहा गया है, "सेना जम्मू यूनिवर्सिटी के विस्तार के लिए जमीन देने और कश्मीर यूनिवर्सिटी के दक्षिणी परिसर के विस्तार के लिए भी जमीन उपलब्ध कराएगी."

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा के हालिया फैसलों से भी ये संकेत मिला है कि बीजेपी-पीडीपी गठबंधन लगभग तय है

पीडीपी नेता निजी बातचीत में दावा करते हैं कि ये फैसले उसके बीजेपी के संग गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत का नतीजा हैं.

पीडीपी नेताओं का ये भी दावा है कि केंद्र राज्य को एनएचपीसी की एक बिजली परियोजना भी देने को तैयार है. पहले ये परियोजना वापस ली जा चुकी थी. इन नेताओं के अनुसार केंद्र जम्मू और कश्मीर के एक-एक शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल करने को भी तैयार हो गया है.

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बीजेपी ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. पीडीपी नेताओं के अनुसार बीजेपी राष्ट्रीय राजनीति की अपनी मजबूरियों के चलते इस मुद्दे पर अभी चुप है.

एक पीडीपी नेता कहते हैं, "बीजेपी इसका ढिंढोरा नहीं पीटना चाहती. हम बहुत शांति से गठबंधन का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं. याद रखिए कि राष्ट्रीय राजनीति में लोग बीजेपी को पीडीपी से गठबंधन के लिए कठघरे में खड़े करते रहे हैं."

पिछले दो हफ्तों में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती बीजेपी के शीर्ष नेताओं से दिल्ली में कई मुलाकातें कर चुकी हैं. बातचीत में हुई प्रगति महबूबा के बयान से भी जाहिर होती है. पिछले हफ्ते कुपवाड़ा में पीडीपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मुफ्ती साहब का फैसला पत्थर की लकीर है. उनका फैसला, मेरा फैसला."

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वरिष्ठ पीडीपी नेता हसीब द्राबु और अमिताभ मट्टू ने भी वरिष्ठ बीजेपी नेताओं राम माधव और अरुण जेटली से मुलाकात की.

दोनों दलों की बातचीत में प्रगति का एक ठोस सबूत इस बात से भी मिला कि राज्यपाल एनएन वोहरा ने मंगलवार को राज्य के 2016-17 के बज़ट पर होने वाली बैठक टाल दी. इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया गया.

इसके अलावा शहरी ग्रामीण निकायों के चुनावों पर होने वाले सभी दलों की बैठक को भी आगे के लिए टाल दिया है. इस बैठक के लिए फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, राज्य बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमदमीर और पीपल्स कांफ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन को निमंत्रण भेज दिया गया था. लेकिन आखिर वक्त में ये बैठक रद्द कर दी गयी.

First published: 17 March 2016, 8:02 IST
 
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