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आंध्र प्रदेशः बीजेपी और टीडीपी का टेंपल रन

ए साए शेखर | Updated on: 8 July 2016, 8:07 IST
(कैच)

जब कभी भी बात मंदिर की आती है तो उसका समर्थन करने वालों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का नाम अपने आप ही सामने आ जाता है और बीजेपी का यह पसंदीदा मुद्दा आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजद) के भागीदारों, बीजेपी और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के संबंधों में दरार पैदा करने वाला साबित हो रहा है और वहां दोनों दलों के बीच संबंध सामान्य नहीं प्रतीत हो रहे हैं.

दोनों दलों के बीच का मतभेद सड़कों की दहलीज पर आकर झड़प में बदल गया जिसके चलते संबंधों में आई दरार जाहिर हो गई. हालांकि तेदेपा के शीर्ष नेतृत्व ने दोनों भागीदारों के बीच किसी भी प्रकार के तनाव की खबरों से साफ इंकार किया है.

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विजयवाड़ा में कृष्णा पुष्कर्म के लिये सड़कों को चौड़ा करने के क्रम में अलग-अलग आकार के 30 से भी अधिक मंदिरों का विध्वंस बीजेपी और तेदेपा के बीच संबंधों की खाई को और चौड़ा करने वाला साबित हुआ है.

कुछ बीजेपी नेताओं और धार्मिक प्रचारकों की अगुवाई में इन मंदिरों को गिराये जाने के जबर्दस्त विरोध हो रहा है. इसे लेकर विजयवाड़ा से तेदेपा सांसद केसिनेनी श्रीनिवास उर्फ नानी और पड़ोसी पश्चिमी गोदावरी जिले के नरसापुरम से बीजेपी सांसद गोकाराजू गंगा राजू के बीच एक रस्साकशी शुरू हो गई है.

लेकिन यह मामला यहीं नहीं रुका. उल्टे यह तो सिर्फ शुरुआत थी और इस झड़प की खबर केंद्र में बैठे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच चुकी है.

मौजूदा स्थितियों से खफा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी और तेदेपा के बड़े और छोटे नेताओं के बीच की इस कलह को और अधिक फैलने से रोकने के लिये कुछ कदम उठाए हैं.

लेकिन बीजेपी नेताओं द्वारा राज्य की सत्तासीन तेदेपा सरकार के विरुद्ध की जा रही असंयमित टिप्पणियों और इनके विरोध में तेदेपा नेताओं द्वारा राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा न मिलने और आंध्र प्रदेश जैसे छोटे राज्य को मिलने वाले धन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ की गई टिप्पणियां लगातार मामले को और पेचीदा बना रही हैं.

बिगड़ते संबंध

एक विरोधाभासी पृष्ठभूमि के बीच एनडीए के दो महत्वपूर्ण सहयोगियो के मध्य आपस में आरोप लगाने के इस खेल के चलते ऐसा लगता है कि इनकी एकता, अनेकता में बदल रही है.

इसकी शुरुआत तब हुई जब बीजेपी के कुछ नेताओं और सेवा क्षेत्रम के प्रमुख शिवा स्वामी ने ‘‘अगमा शास्त्रम के लिये निर्धारित प्रक्रियाओं को अनदेखा करते हुए इन मंदिरों को गिराये जाने’’ पर आपत्ति की.

सांसद नानी का आरोप है कि असल में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए कुछ नेता इस बहाने से टीडीपी को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं.

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केसिनेनी नानी कहते है, ‘‘मुख्यमंत्री विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से 4 हजार करोड़ रुपये से विजयवाड़ा का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिये रात-दिन एक किये हुए हैं, जबकि दूसरी तरफ कुछ ऐसे नेता जिनका इस शहर से दूर-दूर तक कुछ लेना-देना नहीं है, अड़चनें खड़ी करने का काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री राज्य की जनता की धार्मिक भावनाओं से अच्छी तरह से वाकिफ हैं. उन्हें अच्छी तरह से पता है कि किस धर्म को संरक्षण की आवश्यकता है और वे खामखा ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे विकास के काम में बाधा आए.’’

इसके अलावा उन्होंने यह जानने पर भी जोर दिया कि क्या कारण है जिसके चलते एक दूसरे निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया सांसद विजयवाड़ा के विकास के मामले में अपनी टांग अड़ा रहा है.

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नानी इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस सांसद ने एक अन्य व्यक्ति को आगे किया है जो काफी पहले विजयवाड़ा छोड़कर स्वामी का वेश धारण कर कहीं और एक आश्रम बना चुका है और वही स्वामी लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए बीजेपी और तेदेपा के बीच लड़ाई को हवा दे रहा है.

पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता कन्ना लक्ष्मीनारायण ने कैच को बताया कि स्थानीय अधिकारी एक गौशाला को हटाने का प्रयास करते हुए सड़क को एक तरफ बढ़ा रहे थे. सड़क चौड़ीकरण का मतलब सिर्फ एक तरफ के निर्माण को हटाना नहीं बल्कि दोनों ओर चौड़ा करना होता है. ‘‘सड़क के दूसरी ओर कोई कार्रवाई न करना उनके निहित स्वार्थों को स्पष्ट करता है. वे बिना प्रक्रियाओं को पूरा किये मंदिरों को कैसे ध्वस्त कर सकते हैं.’’

पक्ष लेना

सड़क के दूसरे छोर पर तेदेपा एमएलसी बुद्धा वेन्कम्मा का घर बन हुआ है जिसे जानबूझकर छुआ भी नहीं गया है. उन्होंने बताया कि गुंटूर में भी करीब 5 मंदिरों को ध्वस्त किया गया है लेकिन किसी ने भी इस मामले को नहीं उठाया.

बीजेपी के एक और एमएलसी सोमू वीरराजू ने कहा कि इन मंदिरों के ध्वस्त होने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं.

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उन्होंने मांग की कि ‘अगम शास्त्र’ के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करते हुए जल्द से जल्द इन मंदिरों का पुर्ननिर्माण किया जाना चाहिये.

एक तरफ जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच आम धारणा यह बन रही है कि इन मंदिरों को ध्वस्त किये जाने के पीछे सांसदों और अधिकारियों का हाथ है वहीं दूसरी तरफ तेदेपा नेताओं का कहना है कि बीजेपी के नेता बिना किसी मुद्दे के इतनी परेशानी पैदा कर रहे हैं. जाहिर है कि इस मामले में अपने रुख पर कायम रहने का बीजेपी का एजेंडा स्पष्ट दिखाई दे रहा है.

स्थिति संभालने का प्रयास

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री ने बिना समय गंवाए पांच मंत्रियों की एक समिति का गठन करने का ऐलान कर दिया जिसमें बीजेपी का प्रतिनिधित्व करने वाले 5 मंत्री भी शामिल हैं. 

इस मामले में विशेष रूप से प्रदेश के धार्मिक मामलों के मंत्री माणिक्याला राव सबके निशाने पर रहे, क्योंकि बीजेपी ने इन मंदिरों को गिराये जाने का विरोध करने के लिये उन पर ही सबसे अधिक दबाव बनाया था.

नायडू ने चतुराई से काम लिया और सभी मंदिरों को ‘‘अगम शास्त्र’’ के आधार पर दोबारा बनवाने का भरोसा दिया

वे यह भी जानना चाहते थे कि क्या माणिक्याला को मंदिरों को गिराये जाने के इस निर्णय के बारे में जानकारी थी या नहीं.

इस बीच नरसापुरम से बीजेपी सांसद गंगा राजू ने हिंदू गुरुओं और धार्मिक नेताओं की एक विशाल बैठक का भी आयोजन किया था. एक कमलनंदा भारती स्वामी यह जानना चाहते थे कि आखिरकार बीजेपी तेदेपा के प्रति इतना नरम रुख क्यों अपना रही है.

शिवा स्वामी ने केसीनेनी नानी के खिलाफ उग्र तेवरों में अपनी बात रखी वहीं दूसरी तरफ सभा में आए दूसरे कई स्वामियों ने मंदिरों को गिराये जाने के पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताई.

लेकिन चंद्रबाबू नायडू ने इस मामले को ठंडा करने के लिये बीजेपी की तरफ कदम बढ़ाया और उसके नेताओं को आश्वासन दिया कि गिराये गए सभी मंदिरों को ‘‘अगम शास्त्र’’ के आधार पर दोबारा बनवाया जाएगा. 

उन्होंने मंदिरों ने संबंधित इस मामले को बेहद चतुराई से संभाला और इस बात का भी ध्यान रखा कि उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि पर कोई आंच न आए.

इसके अलावा उन्होंने राज्य की नौकरशाही को निर्देश दिये कि जब भी मंदिर, मस्जिद या चर्च जैसे धार्मिक स्थलों से निबटने की स्थिति आए तो उन्हें पहले राज्य के ‘‘सबसे बड़े अधिकारी’’ की अनुमति लेने के बाद ही कोई कदम उठाना होगा.

नायडू इस मामले में नुकसान का आकलन करने और उसपर नियंत्रण पाने में धार्मिक और राजनीतिक रूप से बिल्कुल सही साबित हुए.

मंदिरों के पुर्ननिर्माण का वायदा कर वे बीजेपी नेतृत्व के एक नाराज हो गए धड़े को काबू करने मे सफल रहे नायडू ने फिलहाल अपने विरोधियों को शांत कर दिया है. लेकिन क्या आंध्र प्रदेश का यह मंदिरों का संस्करण कभी खत्म हो पाएगा या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है?

First published: 8 July 2016, 8:07 IST
 
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