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शहाबुद्दीन की रिहाईः भाजपा के नीतीश कुमार से कुछ सवाल

चारू कार्तिकेय | Updated on: 13 September 2016, 15:57 IST

बिहार भाजपा इकाई ने गैंगस्टर राजनेता शहाबुद्दीन की रिहाई को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सिवान के इस बाहुबली नेता को 11 साल बाद 10 सितम्बर को भागलपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया. पटना उच्च न्यायालय ने सात सितम्बर को हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट रहे आरोपी शहाबुद्दीन को जमानत के आदेश दिए थे.

बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि शहाबुद्दीन की रिहाई में बिहार सरकार का हाथ है. राष्ट्रीय जनता दल से सांसद रह चुके शहाबुद्दीन को 2005 में गिरफ्तार किया गया था. तभी से वे जेल में थे.

पिछले एक दशक में उन्हें 49 मामलों में जमानत मिल चुकी है. हाल में जिस मामले में उन्हें जमानत दी गई, वह अपने दो भाईयों की हत्या का चश्मदीद गवाह था. ये हत्याएं कथित तौर पर शहाबुद्दीन ने ही करवाई थी.

सुशील मोदी ने कहा, 'फरवरी 2016 में कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए और नौ माह के भीतर कोई न कोई फैसला दे दिया जाए. हालांकि सुनवाई में कोई तेजी नहीं देखी गई और जब उन्हें जमानत दी गई.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में जमानत का आदेश इसलिए दिया जा रहा है कि उक्त मामले की सुनवाई में अब तक कोई प्रगति नहीं देखी गई और शहाबुद्दीन लंबे समय तक जेल की सजा काट चुके हैं.

मोदी ने साफ कहा, बिहार सरकार को इस बात का जवाब देना होगा कि सात माह गुजर जाने के बावजूद अब तक मामले में सुनवाई क्यों नहीं शुरू की गई. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये भी की जा सकती थी लेकिन सरकार ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की.

बिहार सरकार को जवाब देना होगा कि सात माह गुजर जाने के बावजूद अब तक मामले में सुनवाई क्यों नहीं शुरू हुई

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में सुनवाई न करना सरकार की एक चाल थी ताकि वह यह सुनिश्चित कर सके कि शहाबुद्दीन आजाद हो जाएं.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शहाबुद्दीन मामले की पैरवी के लिए जानबूझ कर जूनियर वकील लगाए. न तो सरकार की ओर से कोई शीर्ष कानूनी अधिकारी और न ही सुप्रीम कोर्ट का कोई बड़ा वकील इस मामले की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया.

सुशील मोदी ने शहाबुद्दीन मामले की तुलना जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह से की. उन्होंने कहा, 'सिंह किसी भी आपराधिक मामले में दोषी नहीं थे लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें इसलिए गिरफ्तार कर लिया था क्योंकि वे आम जनता के लिए खतरा थे. शहाबुद्दीन के साथ ऐसा क्यों नहीं किया गया. देखा जाए तो उनके खिलाफ दर्जनों मामले चल रहे हैं.'

उन्होंने सीधे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा कि क्या उन्हें राजद के साथ अपने गठबंधन पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा था क्योंकि उन्होंने शहाबुद्दीन को सीसीए के तहत गिरफ्तार किया था.

सरकार गठन के कुछ समय बाद से ही राज्य में कानून-व्यवस्था के जर्जर हालात के लिए सरकार की आलोचना हो रही है

नीतीश कुमार इस मामले में अब तक चुप्पी साधे हुए हैं. उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने इस बारे में कहा, 'शहाबुद्दीन की जमानत का मामला उठाने से पहले भाजपा अपने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की जमानत पर कुछ सवालों के जवाब दे.

हालांकि बिहार सरकार लम्बे समय तक इन सवालों के जवाब नहीं टाल पाएगी. पहले ही सरकार गठन के कुछ ही समय बाद से राज्य में कानून-व्यवस्था के जर्जर हालात के चलते सरकार की आलोचना हो रही है.

इस दौरान घटित हुए मामलों में सबसे ज्यादा सनसनीखेज मामला सिवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या का है, जिसकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है. जबकि मामले में हिरासत में चल रहे मुख्य संदिग्ध के शहाबुद्दीन से जुड़े होने के संकेत हैं. मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हुए काफी समय हो गया लेकिन अभी तक यह शुरू ही नहीं हुई है.

रंजन की पत्नी आशा रंजन ने सीबीआई जांच में देरी पर हाल ही में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुलाकात की थी.

First published: 13 September 2016, 15:57 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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