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नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा ने देश भर में करोड़ों की जमीनें खरीदीं

भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा के ठीक पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदीं. इन जमीनों की कीमत करोड़ों रुपए में है. अकेले बिहार राज्य से मिले दस्तावेज बताते हैं कि पार्टी ने अगस्त महीने के बाद से लेकर नवंबर महीने के पहले हफ्ते तक करोड़ों रुपए की जमीनें अलग-अलग जिलों में खरीदीं. गौरतलब है कि 8 नवंबर की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध की घोषणा की थी.

कैच के पास भाजपा द्वारा खरीदी गई इन संपत्तियों के करीब दर्जन भर दस्तावेज मौजूद हैं. जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े ये दस्तावेज बिहार सरकार की भूमि जानकारी संबंधी वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं. भाजपा ने ये संपत्तियां अपने कार्यकर्ताओं के नाम पर खरीदी हैं. इनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से पार्टी के सीनियर कार्यकर्ता और विधायकों को सिग्नेटरी बनाया गया है.

संजीव चौरसिया इन तमाम खरीद में सिग्नेटरी हैं. वो वर्तमान में दीगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं. चौरसिया और पार्टी के एक अन्य नेता ने भी कैच से बातचीत में स्वीकार किया कि पार्टी ने हाल के दिनों में बड़ी मात्रा में जमीनों की खरीद-फरोख्त की है. चौरसिया ने बताया कि पार्टी ने बिहार के साथ ही देश भर में जमीनें खरीदी हैं. ये जमीनें पार्टी कार्यालय और पार्टी के तमाम दूसरे कामों के लिए ली गई हैं.

संजीव चौरसिया ने स्वीकार किया कि पार्टी ने हाल के दिनों में पार्टी के काम के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त की है

चौरसिया के शब्दों में, 'सब जगह खरीदा जा रहा था. बिहार के साथ और भी जगह जमीन खरीदा जा रहा है... हम लोग तो सिर्फ सिग्नेटरी अथॉरिटी हैं, पैसा तो पार्टी की तरफ से आया था... सारी जमीन खरीदी है पार्टी कार्यालय के लिए और अन्य कामों के लिए. नवंबर के फर्स्ट वीक तक जमीन खरीदी है.'

यह पूछे जाने पर कि खरीददारी नगद हुई या चेक के जरिए? चौरसिया कहते हैं, 'पार्टी का काम एक नंबर से होता है. उसका तरीका अलग-अलग होता है. पर नगद लेनदेन नहीं हुआ होगा.' हालांकि पार्टी के एक अन्य नेता और सिग्नेटरी लाल बाबू प्रसाद ने बिहार के एक स्थानीय चैनल से बातचीत में स्वीकार किया है कि उन लोगों ने जमीनें नगद पैसे से खरीदी हैं, इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने चंदा दिया है.

चौरसिया बातचीत में स्वीकार करते हैं कि ज़मीनें पूरे राज्य में खरीदी गई और कैच के पास मौजूद दस्तावेज भी उन खरीदारियों की पुष्टि करते हैं. यानी यह बात साफ है कि भाजपा बड़े पैमाने पर, योजनाबद्ध तरीके से बिहार और शायद देश भर में जमीनें खरीद रही थी.

कैच को मिले दस्तावेज बताते हैं कि पार्टी ने बिहार के तमाम शहरों और कस्बों मसलन मधुबनी, मधेपुरा, कटिहार, किशनगंज, अररिया, अरवल, लखीसराय आदि में जमीनें खरीदीं.

पार्टी द्वारा खरीदी गई जमीनों की साइज आधा एकड़ से 250 वर्गफीट के बीच है. इनकी कीमत 8 लाख से 1.16 करोड़ के बीच है. सबसे महंगी जमीन करीब 1100 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से खरीदी गई है.

जमीनें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से बिहार भाजपा के जनरल सेक्रेटरी संजीव चौरसिया ने लखीसराय में 60.13 लाख रुपए में एक जमीन खरीदी.

संजीव चौरसिया- महासचिव भाजपा, बिहार इकाई. डीड में उनका पता है 11, अशोक रोड, राष्ट्रीय मुख्यालय, भाजपा.

लाल बाबू प्रसाद- उपाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई. इनका पता है. गांव, आर्य समाज रोड, नरकटियागंज, पीएस नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण.

दिलीप कुमार जायसवाल- कोषाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई. एक दस्तावेज में इनका पता  है, पूरबपाली रोड, पीएस, जिला किशनगंज. एक अन्य दस्तावेज में उनका पता 11, अशोक रोड दर्ज है.

कुछ मामलों में भाजपा खुद ही खरीददार पार्टी है और पता 11 अशोक रोड दर्ज है.

इस घटना के सामने आने के बाद अब बिहार मेें सियासी लड़ाई छिड़ गई है. अब तक नरेंद्र मोदी के फैसले का साथ दे रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगता है यह जानकारी सामने आने के बाद उनके विरुद्ध हो गए हैं. जेडीयू ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बारे में एक के बाद एक लगातार ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले को जायज ठहराने के लिए कालेधन पर लगाम कसने का तर्क दिया था. यह एक सार्वजनिक तथ्य है और भाजपा के प्रवक्ता बारंबार यह बात कहते आ रहे हैं कि इस देश में सबसे ज्यादा काला धन रियल एस्टेट के धंधे में है.

जिस गति से भजपा ने इन जमीनों की खरीददारी की है वह अपने आप में प्रधानमंत्री के उस दावे पर संशय खड़ा करता है कि नोटबंदी के फैसले की जानकारी किसी को नहीं थी. जो बातें पार्टी के नेता कह रहे हैं वह भी इसी ओर इशारा करता है कि जमीनें योजनाबद्ध तरीके से खरीदी गई.

यह पहली बार नहीं है जब सरकार के किसी फैसले और उसकी शुचिता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा के तीन दिन बाद ही सीपीएम ने भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के ऊपर आरोप लगाया था कि उसे नोटबंदी के फैसले की जानकारी पहले से थी. पार्टी के एक नेता ने मोदी की घोषणा के कुछ घंटे पहले ही 500 और 1000 के तीन करोड़ रुपए बैंक में जमा कराए थे.

इसका सच क्या है हमें नहीं पता. बिल्कुल उसी तरह नोटबंदी के फैसले से पहले जमीनों की खरीद फरोख्त का भी कुछ सच होगा.

(संतोष सिंह, कशिश न्यूज़ के सहयोग के साथ)

First published: 25 November 2016, 3:38 IST
 
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