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चुनावों के पहले ही पूरा हो जाएगा अमित शाह का कार्यकाल, क्या BJP बदलेगी अपना संविधान?

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 January 2019, 9:40 IST

देश में इस साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूरी कमर कस ली है. लेकिन चुनावों के पहले ही भरतीय जनता पार्टी के लिए एक मुश्किल खड़ी हो सकती है. चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक की शुरुआत दिल्ली के रामलीला मैदान में हो चुकी है. इस बैठक में पार्टी के आला नेताओं के साथ ही करीब 10 हजार कार्यकर्ता भी शामिल होने की संभावना है.

पार्टी की कमान अभी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हाथ में है. लेकिन इस साल चुनाव के पहले ही उनका बीजेपी अध्यक्ष पद का कार्यकाल पूरा हो रहा है. ऐसे में अगर चुनाव की कमान एक बार फिर से अमित शाह को सौंपनी हो तो उसके लिए बीजेपी को पार्टी के संविधान में बदलाव करना होगा.

बता दें, बीजेपी के संविधान के अनुसार, एक आदमी को पार्टी अध्यक्ष का पद दो बार ही पूरे कार्यकाल के लिए दिया जा सकता है. लोकसभा चुनाव 2019 को एक बड़े लक्ष्य के रूप में देखते हुए पार्टी की कार्यकारिणी बैठक में अमित शाह को लोकसभा चुनाव तक के लिए अस्थायी अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया है.

गौरतलब है कि 2014 का लोकसभा चुनाव राजनाथ सिंह की अध्यक्षता के समय हुआ था. लेकिन केंद्र में जीत हासिल करने के बाद राजनाथ सिंह को मोदी सरकार में गृहमंत्री का पदभार सौंपी गया था. इसकेबाद ही बीजेपी अध्यक्षता की कमान अमित शाह को दी गई थी. अमित शाह ने ही राजनाथ सिंह के बचे कार्यकाल को पूरा किया था. इसके बाद पहली बार 3 साल के पूरे कार्यकाल के लिए उन्हें 2016 में चुना गया. इस तरह से देखें तो राजनाथ सिंह के कार्यकाल के बचे हुए 2 साल और दूसरी बार मिले सम्पूर्ण कार्यकाल के 3 साल अब जनवरी में पूरे होने वाले हैं.

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अब जब अमित शाह को चुनाव तक के लिए अस्थाई अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया है तो चुनाव के बाद ही ये तय होगा कि पार्टी की कमाल अब किसके हाथों में जाएगी. बता दें कि बीजेपी के संविधान के मुताबिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकता है जो कम से कम 15 वर्षों तक पार्टी का सदस्य रहा हो.

 

First published: 12 January 2019, 9:40 IST
 
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