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उत्तर प्रदेश में भाजपा की गैर यादव ब्रिगेड

समीर चौगांवकर | Updated on: 11 October 2016, 10:04 IST
QUICK PILL
  • भाजपा उत्तर प्रदेश के चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए पिछड़ों वोटरों में पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. भाजपा हर उन चेहरों को आगे कर रही है जिनके नाम के साथ पटेल, मौर्य, कुशवाह, सैनी या शाक्य जुड़ा हुआ है.

उत्तरप्रदेश में सत्ता पाने की हरसंभव कोशिश कर रही भाजपा ने गैर यादवों को साध कर सत्ता पाने की पटकथा पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाना, बसपा के पूर्व दिग्गज स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा में शामिल करना और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को केन्द्र में मंत्री बनाना भाजपा की इसी रणनीति का हिस्सा है. भाजपा के रणनीतिकारों का आकलन है कि उत्तरप्रदेश में सत्ता पाना है तो गैर यादवों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा.

गैर यादव पिछडी जातियों में कुर्मी के अलावा सैनी,शाक्य,कुशवाह और मोर्य भाजपा के एजेंडें में सबसे उपर हैं. पिछड़ी जातियों में इनकी सम्मिलित हिस्सेदारी 15 फीसदी के करीब है. वाराणसी, कानपुर, लखीमपुर खीरी, फरूखाबाद समेत पूर्वाचंल और बुंदेलखड़ के कुल 17 जिलों में कुर्मी बिरादरी कुल आबादी की 15 फीसदी से ज्यादा है.

वहीं सहारनपुर, मुजफरनगर समेत आसपास के जिलों में सैनी की तादात और प्रतापगढ़, इलाहबाद, देवरिया, कुशीनगर जैसे जिलों में मौर्य बिरादरी की अच्छी खासी तादात है.

दलितों पर ध्यान देनेे से पिछ़ड़ों में नाराज़गी

भाजपा ने पिछड़ों में पैठ बनाने की रणनीति के तहत बसपा के पूर्व विधायक प्रवीण पटेल, मिर्जापुर से सपा नेता रमा शंकर पटेल समेत कई कुर्मी नेताओं को भाजपा में शामिल करवाया. पूर्वांचल में नीतीश कुमार की बढती सक्रियता के निबटने के लिए अनुप्रिया पटेल को केन्द्र में मंत्री बनाया.

स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा में आना इसी रणनीति का हिस्सा है. यूपी में सपा सरकार बनने के बाद सरकारी नौकरियों और विकास योजनाओं में यादवों को महत्व देने से और बसपा में भी दलितों खासकर जाटव जाति पर जरूरत से ज्यादा ध्यान से दूसरी पिछड़ी जातियों में गहरी नाराजगी है और भाजपा इसको भुनाने की तैयारी में है.

पिछड़ेे नेता जिनको उत्तरप्रदेश में भाजपा कर रही है आगे

पार्टी सूत्रों की मानें तो साक्षी महाराज और साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ी जाति के लोगों को लामबंद करने के लिए कहा गया है. साध्वी निरंजन ज्योति मोदी सरकार में मंत्री भी हैं.

केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार

रू​हेलखंड कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता हैं. सात बार भाजपा से सांसद हुए. केन्द्र में मंत्री हैं. कुर्मी मतदाताओं को भाजपा से जोड़ने की जिम्मेदारी होगी.

स्वतंत्र देव सिंह

संघ के पूर्व प्रचारक स्वतंत्र देव सिंह उत्तरप्रदेश में भाजपा सदस्यता अभियान के प्रभारी रहे हैं. पिछड़ी जातियों को सदस्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

स्वामी प्रसाद मौर्य

बसपा के दिग्गज नेता रहे मौर्य को भाजपा ने मायावती के वोट बैक में सेंध लगाकर पिछडी जातियों के नेताओं को बसपा में लाने की जिम्मेदारी दी गई है.

केशव प्रसाद मौर्य

प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही पिछड़ी जातियों में भाजपा की घुसपैठ बनाने का काम मिला है.

उमा भारती

केन्द्र में मंत्री और झांसी से सांसद पर लोधी वोट बैंक को भाजपा के साथ जोडे रखने की जिम्मेदारी है.

उत्तरप्रदेश में जातियों का गणित

जाति                         प्रतिशत

यादव                         19.40

कुर्मी                           7.46

लोध                           4.90

पाल                           4.43

निषाद                         4.33

मोमिन                         4.15

कुशवाह और शाक्य        3.25

मौर्य                            2.0

सैनी                           1.4

अन्य                          48.64

First published: 11 October 2016, 10:04 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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