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चरित्रहीन नेताओं के लिए भाजपा की 'फ्री इनकमिंग' सेवा: सामना

अश्विन अघोर | Updated on: 22 January 2017, 8:57 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

मुंबई में अगले माह होने वाले निकाय चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. एक ओर तो भाजपा और शिवसेना में गठबंधन की बात चल रही है, दूसरी ओर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में भाजपा के ही खिलाफ मोर्चा

खोल दिया है.

20 जनवरी को सामना में प्रकाशित सम्पादकीय में शिवसेना ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा ‘‘फ्री इनकमिंग’’ नीति अपना रही है और इसी पर चलते हुए वह दूसरी पार्टियों के ऐसे नेताओं को भी पार्टी में आने दे रही है, जिनकी

राजनीति में कोई पूछ नहीं रह गई है. 

इसमें कहा गया है ‘‘भाजपा जिस तरह से हर किसी के लिए अपने द्वार खोल रही है, उससे इसका भविष्य खतरे में लगता है. जो पार्टी सदा से यह दावा करती आई है कि वह एक अलग तरह की सैद्धांतिक मूल्यों वाली पार्टी है, उसके हाल ही के कुछ कदम चिंताजनक हैं. अपने को सर्वाधिक संस्कारवान पार्टी बताने वाली भाजपा हमेशा से ही कांग्रेस, एनसीपी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और तृणमूल कांग्रेस की इस बात के लिए आलोचना करती आई है कि उसके कई नेता दागी हैं.’’

सामना में संपादकीय

सम्पादकीय में लिखा गया है ‘‘भाजपा नेता दावा करते हैं कि केवल भाजपा ही देश में राजनीतिक शुचिता ला सकती है और भ्रष्ट राजनेताओं से देश को मुक्त करवा सकती है. लेकिन लगता है भाजपा का यह सफाई अभियान एनडी तिवारी जैसे नेताओं का पार्टी में स्वागत करने से शुरू हुआ है. और तो और वे यह दावा कर रहे हैं कि तिवारी के अनुभव से पार्टी को फायदा मिलेगा. अब वे किस अनुभव की बात कर रहे हैं, भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए.’’

तिवारी के भाजपा में शामिल होने की आलोचना करते हुए सम्पादकीय में कहा गया है ‘‘भाजपा यह कैसे भूल गई कि यही तिवारी आपातकाल का सर्वाधिक समर्थन करने वाले कांग्रेसियों में एक थे और एक तरह से गांधी परिवार के लिए किसी

नौकर से कम नहीं थे, जिससे भाजपा इतनी नफरत करती है.’’

सामना ने भाजपा को यह भी याद दिलाया कि वे इंदिरा गांधी के भक्त रहे हैं और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए सेक्स स्कैंडल में भी फंस चुके हैं. भाजपा कभी इन्हीं तिवारी पर राजभवन में संवैधानिक पद पर रहते हुए उसके दुरुपयोग का आरोप लगा चुकी है. और अब इन्हीं तिवारी के हाथ में ‘कमल का फूल’’ आ गया है. 

धूमिल होती छवि

सम्पादकीय में यह भी कहा गया कि गुंडों और चरित्रहीन लोगों के बल पर चुनाव जीतना कालेधन को संरक्षण देने जैसा ही पाप है. तिवारी जैसे लोग हमशा ही सत्ताधारी पार्टी की शरण में जाना चाहते हैं ताकि अपने गुनाहों की सजा से बच सकें. देश भर में अब तक यही होता रहा और अब महाराष्ट्र में भी यही हो रहा है. 

एनसीपी के सारे भ्रष्ट और अपराधी नेता धीरे-धीरे भाजपा में शामिल होते जा रहे हैं. पहले वे एनसीपी में इसलिए शामिल हुए थे क्यांकि तब वह सत्ता में थी और अब वे फिर से इस दूसरी सत्ताधरी पार्टी के वफादार हो चले हैं. भाजपा में कई कुख्यात नेता शामिल हो गए हैं और इससे उसकी छवि धूमिल हुई है.

चूंकि हम अब भी मानते हैं कि भाजपा हमारी मित्र है; इसलिए हम उसे सलाह दे रहे हैं कि वह पार्टी में अपराधियों और गुडों को शामिल करने से परहेज करे. और अंत में इसमें लिखा है कि भगवान भाजपा को सद्बुद्धि दे.’’

दबदबे की राजनीति

चूंकि बुहन् मुंबई नगरपालिका के चुनावों में कांग्रेस और एनसीपी की भूमिका कोई खास नहीं है. इसलिए शिवसेना की ही इसमें खास दावेदारी रहने वाली है. अगर वह इस चुनाव में पिछली बार की जीत का आंकड़ा कायम नहीं रख पाती है तो सेना के लिए यह सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा और भाजपा बाजी मार जाएगी.

चूंकि इन दोनों दलों के बीच गठबंधन की बात फिलहाल तय नहीं है इसलिए दूसरी पंक्ति के नेता सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे की आलोचना कर रहे हैं. वहीं वरिष्ठ नेता बातचीत में लगे हुए हैं. 

2012 में संपन्न पिछले निकाय चुनावों में शिवसेना ने 75, भाजपा ने 30 और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- अठावले (आरपीआई-ए) ने एक सीट पर जीत हासिल की थी. विपक्षी दलों कांग्रेस, एनसीपी और मनसे ने क्रमशः 48, 18 और 28 पर जीत हासिल की जबकि 27 सीटें अन्य को गईं.

फिसलती ज़मीन

शिवसेना सदा से ही मुंबई की नंबर 1 पार्टी होने का दावा करती आई है और खुद को एक आम मुंबईकर की पहली पसंद बताती है. हालांकि पिछले तीन सालों में यह हालात बदल चुके हैं. 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद पार्टी में उत्साह है और वह यह निकाय चुनाव भी जीतने की पूरी तैयारी के साथ ही लड़ रही है.

भाजपा में आम राय शिवसेना के पक्ष में नहीं है लेकिन इसके शीर्ष नेता अपने 25 साल पुराने सहयोगी के साथ गठबंधन के लिए बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, दोनों दलों के बीच पहले चरण की बातचीत विफल रही, क्योंकि भाजपा 227 में से 114 वार्डों पर लड़ना चाहती थी, जो सेना को स्वीकार नहीं था. 

सेना जहां भाजपा की आलोचना का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहती, वहीं भाजपा ने भी आक्रामक रवैया अपना लिया है. भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने कहा, बृहन् मुंबई नगरपालिका में भ्रष्टाचार और माफिया का राज है और यही सही वक्त है जब भारत के सबसे धनी नगर निगम को एक ही परिवार के राज से मुक्त करवाया जा सकता है. उनका सीधा निशाना ठाकरे परिवार पर था. इस तरह अगर देखा जाए तो सामना में छपा सम्पादकीय दोनों दलों के बीच तनाव ही बढ़ाएगा.

First published: 22 January 2017, 8:57 IST
 
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