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भाजपा की खाट खड़ी करने जाट आएंगे दिल्ली

राजीव खन्ना | Updated on: 26 February 2017, 9:14 IST


लगता है कि जाट आंदोलनकारियों ने हरियाणा और दिल्ली में भाजपा राज के लिए मुश्किलें खड़ी करने की ठान ली है. अब आंदोलन कर रहे जाटों के नेतृत्व ने अपने आंदोलन को राष्ट्रीय बनाने के लिए दिल्ली की ओर रुख करना ठान लिया है, अगर ऐसा होता है तो इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे.

यशपाल मलिक के नेतृत्व में ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को पानीपेटों या पानीपत में हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस धेसी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति से एक और राउंड की वार्ता की. लेकिन इस चार घंटे की वार्ता के बाद भी इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी. एआईजेएएसएस के प्रवक्ता रोहताश हुड्डा ने कैच न्यूज को बताया कि सारी बातचीत सिर्फ बड़े-बड़े वादों तक ही सीमित रही, लेकिन ठोस कोई परिणाम नहीं निकला. अब हम इस तरह की किसी बातचीत में नहीं उलझना चाहते. अब हम अपने आंदोलन को दिल्ली ले जाएंगे.


धेसी पैनल का गठन हरियाणा सरकार द्वारा 7 फरवरी को किया गया था. इसके अन्य सदस्य हैं अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, राम निवास और उद्योग मामलों के प्रिंसिपल सचिव देवेंद्र सिंह, सचिव सामान्य प्रशासन विजयेंद्र कुमार, अतिरिक्त डीजीपी — लॉ एंड ऑर्डर मोहम्म्द अकील.

 

दिल्ली में भाजपा को पहुंचाएंगे नुकसान?


मीटिंग शुरू होने के पहले ही मलिक ने कहा था कि सरकार के साथ किसी निर्णय पर पहुंचने में समय लगेगा. इसके पहले दोनों पक्ष पहले भी 11 फरवरी को बैठ चुके थे पर उस समय भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका था. फिलहाल जाट आंदोलन 29 जनवरी से शांतिपूर्ण तरीके से चला आ रहा है.

 

जो जाट एआईजेएएसएस को सपोर्ट करते हैं वे पहले ही पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव में भाजपा के खिलाफ जा चुके हैं. अब जाटों की योजना है कि अगले कुछ महीनों में दिल्ली में होने वाले म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव में भी जाटों को भाजपा के खिलाफ एकजुट किया जाए.

जाटों की मांग है कि उन्हें सरकारी शिक्षण संस्थाओं और नौकरियों में आरक्षण देने के साथ ही पिछले साल हुए हिंसक जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जिन लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं या जिनको जेल हुई ऐसे सारे मामले वापस लिए जाएं. जाट चाहते हैं पिछले साल के आंदोलन के दौरान जाट युवाओं पर हत्या और हत्या के प्रयास संबंधी सभी मुकदमे वापस लिए जाएं. उनका कहना है कि अगर कशमीर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जा सकते हैं तो हरियाणा में क्यों नहीं.


रविवार को रोहतक के जासिया में एक बैठक के बाद अपनी मांगें न माने जाने की स्थिति में आईजेएएसएस ने अपना धरना जारी रखने की घोषणा की. घोषणा में कहा गया कि मांगें न माने जाने पर वे 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू करेंगे, जिसके अंतर्गत वे बिजली और पानी के बिल तथा कर्ज की किस्त देना बंद कर देंगे. इस दिन को पिछले साल के आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों की याद में बलिदान दिवस की तरह याद किया गया.

 

दूध सब्ज़ी रुकेगी?


साथ ही जाटों ने दिल्ली को दूध और सब्जी की आपूर्ति भी एक दिन के लिए रोके जाने का निर्णय लिया है. किस दिन यह आपूर्ति रोकी जाएगी इसकी घोषणा 26 फरवरी के बाद की जाएगी. साथ ही जाट नेतृत्व ने 26 फरवरी को काला दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा भी की है और अपने समुदाय के विधायकों से आग्रह किया है कि वे लिखित में दें कि वे आंदोलनकारियों के साथ हैं. मलिक के अनुसार काला दिवस मनाने का उद्देश्य भाजपा की विभाजनकारी राजनीति का विरोध करना है. जाटों ने यह तय किया है जो भी महिला या पुरुष इस दिन विरोध में हिस्सा लेंगे वे काले कपड़े पहनेंगे.

जसिया की मीटिंग में जाटों ने आठ प्रस्ताव पारित किए. इसके अनुसार 1 मार्च से वे 10 और जगहों पर धरना शुरू करेंगे तथा इसके अगले दिन दिल्ली में प्रदर्शन शुरू करेंगे जिसमें दिल्ली और उत्तर प्रदेश के जाट भी भाग लेंगे. जिन नई जगहों पर धरना शुरू करने की बात कही गई है उनमें हैं— हिसार, भिवानी, जींद, कैथल, पानीपत, करनाल, दादरी, कुरुक्षेत्र,मेवात और पंचकूला हैं.


जासिया की मीटिंग में आंदोलनकारियों ने एक प्रस्ताव शादी के संबंध में भी पारित किया. इसमें यह तय किया गया कि अब डिस्क जोकी, शराब पीना, दहेज, हथियारों का प्रदर्शन, व्यर्थ का खर्च तथा दिखावे और अधिक संख्या में मेहमानों को बुलाने को भी हतोत्साहित किया जाएगा. साथ ही मृत्युभोज जैसे कार्यक्रमों पर रोक लगाने तथा समुदाय में शिक्षा बढ़ाने और खेलों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया.

 

जाट आंदोलनकारी आगे जाकर संसद का घेराव करने को विचार भी कर रहे हैं. इसके लिए घोषणा 2 मार्च को की जाएगी पर इसके लिए वाहनों और ट्रैक्टरों का पंजीकरण शुरू हो चुका है.


हरियाण सरकार आंदोलनकारियों से यह कहते आई है कि वह स्थिति को हाथ से बाहर जाने से रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी जैसा कि पिछले वर्ष किया गया था. रोहतक जिला प्रशासन ने सोमवार को उन 22 निदोष लोगों को 15 लाख के चेक दिए जो कि पिछले साल के आंदोलन में घायल हो गए थे. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर कहते आए हैं कि जाटों की मांगों को कानून के दायरे में रहते हुए ही माना जा सकता है.

 

 

 

First published: 26 February 2017, 9:14 IST
 
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