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बीजेपी: यूपी में बुआ और भतीजे से त्रस्त है जनता

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2016, 16:46 IST
(पीटीआई)

भारतीय जनता पार्टी ने यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि यूपी की जनता भतीजे अखिलेश और बुआ मायावती से बुरी तरह से त्रस्त है.

बीजेपी ने बसपा प्रमुख मायावती पर दलितों के नाम पर दौलत बटोरने और अपने शासनकाल के दौरान दलितों एवं पिछड़े वर्ग की चिंता नहीं करने का आरोप लगाया है.

बीजेपी का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी की जनता इन लोगों को अच्छा सबक सिखाएगी. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि दलितों के नाम पर राजनीति करने वाली मायावती दौलत की वसूली का काम कर रही है.

शर्मा ने कहा कि यूपी में भ्रष्टाचार, अपराध और दुराचार की बुआ-भतीजे की जुगलबंदी से राज्य की जनता त्रस्त है. उत्तर प्रदेश की जनता सपा-बसपा के झांसे में अब और आने वाली नहीं है, वह आने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में इन लोगों को सबक सिखाएगी.

उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश की बहन-बेटियों का अपमान करने वाले नसीमुद्दीन जैसे लोगों को उत्तर प्रदेश की जनता अब बर्दाश्त नहीं करेगी.

मायावती और अखिलेश यादव को यह जवाब देना होगा कि उत्तरप्रदेश की बहन-बेटियों का अपमान करने वाले नसीमुद्दीन सिद्दिकी जैसे नेताओं पर अबतक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

शर्मा ने सवाल किया कि आखिर अखिलेश यादव की मायावती से किस तरह की जुगलबंदी है कि दोनों अपराधियों को सजा दिलवाने के मामले में मौन साध लेते हैं?

सपा और बसपा की अपराधियों को पकड़ कर उन्हें सजा दिलवाने की मंशा कभी रही ही नहीं, यही कारण है कि उत्तरप्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं.

उन्होंने कहा कि मायावती ने दलितों के नाम पर हमेशा से वोटबैंक की ही राजनीति की है. उन्होंने दलितों की भलाई के लिए अथवा उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए कुछ भी नहीं किया. इस बात को यूपी की जनता बखूबी जानती है कि जब-जब प्रदेश में बसपा सत्ता में आती है, दलितों पर उत्पीड़न का ग्राफ बढ़ जाता है.

बीजेपी नेता ने कहा कि यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है कि उत्तरप्रदेश में मायावती के पैरों तले से जमीन खिसक चुकी है. उत्तरप्रदेश की जनता का मायावती से पूरी तरह मोह भंग हो चुका है.

शर्मा ने कहा, "प्रदेश की जनता ने 2012 में ही मायावती को सत्ता से बेदखल कर के यह स्पष्ट कर दिया था कि उत्तरप्रदेश में उनकी वोट बैंक और तुष्टीकरण की घृणित राजनीति का कोई स्थान नहीं है. 2014 के लोकसभा चुनावों में तो बसपा को एक भी सीट नहीं देकर जनता ने इस बात पर मुहर भी लगा दी."

बीजेपी नेता ने साथ ही कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2004-13 के दौरान दलितों के खिलाफ हिंसा और अत्याचार के मामलों में 1994-2003 की तुलना में 245 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

उत्तर प्रदेश की जनता को यह ध्यान में रखना चाहिए कि संप्रग सरकार सपा और बसपा के ही समर्थन से चलने वाली सरकार थी.

First published: 5 September 2016, 16:46 IST
 
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