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तब भाजपा ने कहा था, 'ग़रीब और बुज़ुर्ग बिचौलियों का शिकार हो जाएंगे'

चारू कार्तिकेय | Updated on: 12 November 2016, 8:25 IST
QUICK PILL
  • 8 नवंबर की देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने अचानक एलान कर दिया कि महज़ चार घंटे के बाद से 500 और 1000 की नोट मान्य नहीं होंगी. 
  • मगर जब यही पहल कांग्रेस ने की थी और लागू करने की चरणबद्ध व्यवस्था भी थी, तब बीजेपी नेताओं ने अख़बारों में संपादकीय लेख लिखकर इसकी मुख़ालिफ़त की थी.  

इन दिनों जब 500 और 1000 रुपए के नोट हटाने के ऐलान पर भाजपा की जय-जयकार हो रही है, तब आपके लिए यह मानना शायद मुश्किल हो कि कभी भाजपा ने खुद इस पहल का विरोध किया था. पर यह सच है. यह वही भाजपा है, जिसने कांग्रेस के इसी कदम को गरीबों के विरोध में बताकर तीखी आलोचना की थी. 

पार्टी ने तब वही तर्क दिए थे, जो आज नरेंद्र मोदी सरकार के इस चौंका देने वाले विमुद्रीकरण कदम के विरोध में उनके आलोचक दे रहे हैं. और वह भी (भाजपा ने) तब विरोध किया था जब करेंसी को चरणबद्ध तरीके से बंद किए जाने की बात थी, न कि हाल की तरह महज चार घंटों में.

 2014 की बात है, भाजपा के सत्ता में आने और मोदी के प्रधानमंत्री चुने जाने से महज चार महीने पहले की. उस साल जनवरी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने घोषणा की थी कि 2005 से पहले जारी किए सभी नोट बंद किए जाएंगे. उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसकी घोषणा के लिए टेलीविजन पर नहीं आए थे. इसकी ज़रूरत नहीं थी क्योंकि नोटों की वापसी अगले तीन महीनों में चरणबद्ध तरीके से की जानी थी. 

तब बिचौलियों का डर दिखाया था

मगर उस समय भाजपा को मुखर विपक्ष की भूमिका निभानी थी, और उसने कांग्रेस की बात का हर तरह से विरोध किया. नई दिल्ली की वतर्मान सांसद मीनाक्षी लेखी और तब पार्टी की महज प्रवक्ता, ने कहा था, '65 फीसदी भारतीयों के बैंक में खाते नहीं हैं और उनमें से अधिकतर निरक्षर, गरीब, बुजुर्ग हैं और सुदूर इलाकों में रहते हैं, नकद पैसा इकट्ठा करते हैं. वे बिचौलियों का शिकार हो जाएंगे, जो उन्हें डराएंगे कि नोट बेकार हो गए हैं और उन्हें बदलने लिए मोटी फीस लेंगे. उन्हें दूकानदार भी ठगेंगे'.

लेखी ने इकोनोमिक्स टाइम्स के लिए आलेख भी लिखा था, जिसमें उन्होंने उस कदम को 'वित्त मंत्रालय की नई चाल बताया...देश के बाहर छिपे काले धन के मुद्दे को और उलझाने की कोशिश'. यह सब शायद जनता को याद नहीं हो, पर सोशल मीडिया एक वीडियो के माध्यम से उन्हें याद दिलाने की कोशिश कर रहा है. एक वीडियो, जिसमें लेखी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए करेंसी की वापसी को गरीबों के विरोध में बताते हुए आलोचना कर रही हैं, इन दिनों ट्विटर पर चर्चा में है. 

साथ ही एक सुझाव भी ट्विट किया गया है कि हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री थोड़ा वक़्त निकालकर इसे सुनेंगे और विचार करेंगे.

First published: 12 November 2016, 8:25 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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