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बीजेपी पूरे देश को बताएगी कि 'जेएनयू का सच' क्या है!

पाणिनि आनंद | Updated on: 18 February 2016, 23:47 IST
QUICK PILL
  • जेएनयू विवाद पर अपना पक्ष रखने के लिए बीजेपी ने अखिल भारतीय \'जन स्वाभिमान अभियान\' शुरू किया. बीजेपी\r\n और उससे जुड़े संगठन इस अभियान को जिला, मंडल और राज्य स्तर पर ले जाएंगे.
  • बीजेपी चाहती है कि इस मुद्दे पर जनभावनाएं उसके पक्ष में मुड़ जाएं. इस साल पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं.

जेएनयू के टीचरों और छात्रों ने अपने छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहने का फैसला किया है. ये लोग दिल्ली पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की विच-हंटिंग करने का भी विरोध कर रहे हैं. दूसरी तरफ सत्ताधारी बीजेपी ने इस मुद्दे को अखिल भारतीय स्तर पर उठाने का फैसला किया है.

बीजेपी ने गुरुवार को अखिल भारतीय 'जन स्वाभिमान अभियान' शुरू किया. बीजेपी और उससे जुड़े संगठन इस अभियान को जिला, मंडल और राज्य स्तर पर ले जाएंगे.

बीजेपी के बयान के अनुसार, "सम्मानित विश्वविद्यालय जेएनयू की कुछ राजनीतिक ताकतें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रही हैं और देश को गुमराह कर रही हैं."

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बीजेपी के एक नेता ने कैच को बताया, "हम इस अभियान के तहत हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक, राष्ट्र गीत और नारे, बौद्धिक बैठकें, धरना, जनप्रदर्शन का आयोजन करेंगे हम जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देंगे. स्वाभिमान चौपाल करेंगे. इसके अलावा जेएनयू की घटना के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए तमाम दूसरे कार्यक्रम करेंगे. इससे लोग जान सकेंगे कि क्या सच है और क्या झूठ है."

जेएनयू में लगे कुछ नारों से देश में 'राष्ट्रवाद' को लेकर बहस छिड़ गई है. आम लोग दो खेमों में बंटे हुए नजर आ रहे हैं. जाहिर है कि बीजेपी इसे अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है.

आलोचकों के अनुसार सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए जेएनयू मामले को तूल दे रही है

जेएनयू में विरोध प्रदर्शन कर रहे टीचरों के अनुसार 'सरकार रोहित वेमुला की आत्महत्या से उपजे जनाक्रोश और अपनी नीतिगत विफलता छिपाने के लिए इस मामले को हवा दे रही है. आरएसएस इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभा रही है. वो विपक्षी दलों के खिलाफ एक माहौल बनाना चाहती है.'

जेएनयू के मुद्दे पर सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकार से अपनी नाराजगी जतायी है. सभी ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी और कैंपस में पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है. माना जा रहा है कि 23 फरवरी से शुरू होने जा रहे संसद के बज़ट  सत्र में विपक्षी दल इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे.

बीजेपी विपक्षी दलों के एकजुट हमले और उसके राजनीतिक परिणामों के खिलाफ पहले से ही तैयार रहना चाहती है. बीजेपी नहीं चाहती है कि बिहार चुनाव और रोहित वेमुला की आत्महत्या जैसी स्थितियों दोबारा पैदा हों. इसलिए वो चाहती है कि 'राष्ट्रविरोध' के मुद्दे पर जनता दो खेमों में बंट जाए.

बीजेपी की रणनीति साफ है. वो एक 'एक पत्थर से दो निशाने' साधना चाहती है, एक जेएनयू और दूसरा विपक्ष. बीजेपी अपने समर्थकों में ये संदेश देना चाहती है कि वो जेएनयू में रहने वाले 'राष्ट्रविरोधी' तत्वों के खिलाफ खड़ी है.

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अगले कुछ महीनों में पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और जिनमें बीजेपी को चुनावी फायदा मिल सकता है.

बीजेपी के नेताओं का मानना है कि जनभावनाएं उनके पक्ष में हैं. बीजेपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, "कौन कहता है कि लोग हमारे एक्शन से नाराज हैं? लोग हमारे साथ हैं. वो 'राष्ट्र-विरोधियों' के साथ नहीं रहना चाहते. कैंपस में जैसे नारे कोई भी उनके साथ नहीं खड़ा होगा."

जब विपक्ष संसद में ये मामला उठाएगा तो विपक्ष उनके खिलाफ बाहर प्रदर्शन करने की तैयारी में है. वो राहुल गांधी से पूछेगी कि वो जेएनयू के 'राष्ट्र-विरोधियों' का साथ क्यों दे रहे हैं?

बीजेपी के कुछ नेताओं का मानना है कि जेएनयू मामले पर जनभावनाएं उसके साथ हैं

पार्टी को उम्मीद है कि संभव है कि इस जवाबी हमले से विपक्ष की एकता में दरार पडा जाए. ताजा घटनाक्रमों से मामला और बिगड़ सकता है. इस मामले पर जिस तरह राजनीति हो रही है उससे मामले के हाथ से बाहर निकलने का खतरा पैदा हो गया है.

सबसे बड़ा खतरा ये है कि बीजेपी और दूसरे दक्षिणपंथी संगठन भी आम जनमानस में फैली हिंसा को काबू में करने खुद को अक्षम महसूस कर रहे हैं. जैसे, पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों पर हुआ हमला.

सोमवार को बीजेपी विधायक ओपी शर्मा और उनके समर्थकों ने अदालत में पत्रकारों को मारापीटा. बुधवार को भी पत्रकारों को मारा गया. यहां तक कि कन्हैया को कोर्ट के बाहर और अंदर मारा गया. ये सब पुलिस की आंखों के सामने हुआ.

मीडिया में आई खबरो के अनुसार राजस्थान के बीजेपी एमएलए ने कहा है कि राहुल गांधी 'राष्ट्रविरोधी' हैं और उन्हें गोली मार देनी चाहिए.

अब बीजेपी इस मामले को अखिल भारतीय बनाना चाहती है तो ये आग और फैल सकती है, चाहे वो उसके काबू में आए या न आए.

First published: 18 February 2016, 23:47 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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