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नोटबंदी पर भाजपा में गहराया अंतरविरोध: अमित शाह की पार्टीजनों को हिदायत, मोदी का साथ दो

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 December 2016, 8:20 IST
(फ़ाइल फोटो )

गुरुवार को भाजपा मुख्यालय पर पार्टी के महासचिवों के साथ और देर शाम नई दिल्ली स्थिति एनडीएमसी के कंवेंशन हॉल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गुरुवार को बुलाई गई पार्टी पदाधिकारियों और सांसदों की बैठक हंगामेदार रही. पार्टी के ज्यादातर सासदों और पदाधिकारियों ने खुलकर नोटबंदी के फैसले पर अपनी नकारात्मक टिप्पणी दी है. 

बैठक में मौजूद एक सांसद और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक स्वीकार किया कि नोटबंदी के फैसले के कारण हम उत्तर प्रदेश का चुनाव हारने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण जितने बुरे हालात उत्तर प्रदेश में पैदा हुए हैं, उसका चुनावी ख़ामियाजा पार्टी को भुगतना ही पड़ेगा.

दोनों बैठकों में मौजूद नेताओं ने नोटबंदी के फैसले से आम जनता के बीच बढ़ती जा रही नाराजगी पर अपनी चिंता जताई. एक भाजपा नेता के मुताबिक इस फैसले को लागू करने के पीछे मंशा भले ही अच्छी रही हो लेकिन आम लोगों को हो रही परेशानी के कारण अब इस फैसले से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

एनडीएमसी सेंटर में हुई बैठक में मौजूद रहे उत्तर प्रदेश के एक सांसद ने बताया, 'लोगों को आज तक बैंको से पैसा नहीं मिल रहा है. आप दिल्ली से दूर-दराज के गांवों की तुलना नहीं कर सकते. वहां न तो इतना मजबूत बैंकिंग सिस्टम है न ही एटीएम हैं. डेढ़ महीने बाद भी न तो एटीएम काम कर रहे है न बैंको में पैसा पहुंच रहा है. मजदूर और गरीब किसानों जिंदगी मुसीबत में है. ऐसे में किस मुंह से दो महीने बाद चुनाव में वोट मांगने जाएंगे.'

उन्होंने आगे बताया, 'दो महीना पहले सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हमारे पक्ष में जो माहौल पैदा हुआ था वह सब इस नोटबंदी के चक्कर में बर्बाद हो गया. जो लोग 1000-500 रुपए के लिए लाइन में धक्के खा रहे हैं उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक कैसे समझाएंगे हम.'

उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि किस तरह से प्रदेश भर में चल रही भाजपा की परिवर्तन यात्राओं में अब अचानक से लोगों का आना कम हो गया है. गौरतलब है कि तकरीबन दो महीने पहले जब ये यात्राएं शुरू हुई थीं तब उमड़कर भीड़ पहुंची थी. अब स्थिति यह हो गई है कि परिवर्तन यात्रा खबर तक नहीं बन पा रही है.

पार्टी सांसदों और पदाधिकारियों की चिंता के कई आयाम थे. मसलन क्या सरकार आने वाले एक-दो हफ्तों में स्थिति पर काबू पा लेगी? क्या लोगों को मनमाफिक पैसा निकालने की छूट अगले कुछ दिनों में मिल जाएगी. क्या 30 दिसंबर को जब इस फैसले के 50 दिन पूरे हो जाएंगे तब हमसे जो सवाल पूछे जाएंगे, सरकार उसके लिए तैयार है?

चार घंटे तक चली बैठक

सुबह पार्टी मुख्यालय में महासचिवों और अन्य पदाधिकारियों के साथ शुरू हुई अमित शाह की मैराथन बैठक चार घंटे तक चली. इसमें शाह ने नोटबंदी के बाद दुविधा से गुजर रहे पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि राजनीति से ऊपर देशनीति है और यह फैसला मोदीजी ने देशहित में लिया है. मोदी सरकार के इस फैसले से पूरे संगठन को कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा.

शाह ने पदाधिकारियों को यह कहकर संतुष्ट करने की कोशिश की कि संगठन के लोग आम जनता को डिजिटल लेन देन के बारे में प्रशिक्षित करें और खुद भी लेसकैश के मोदी मंत्र का अनुसरण करें. शाह ने कहा कि भाजपा के ग्यारह करोड़ सदस्य मिलकर देश की 125 करोड़ जनता को नोटबंदी का फायदा बताने और लोगों को जागरुक करने का काम करेंगे. शाह का दो-टूक संदेश था कि सरकार ने अपना काम किया है और अब संगठन को अपना दायित्व निभाना है. लेकिन पदाधिकारी उनके विचार को लेकर ज्यादा सहज नहीं थे

शाम को सांसदों के साथ एनडीएमसी कंवेंशन सेंटर में नोटबंदी से जुड़ी जानकारी लेने के लिए हुई बैठक में पहले पहल तो अमित शाह ने सांसदों के सवालों का जवाब देने की कोशिश की. मसलन शाह ने यह कहकर उन्हें समझाने की कोशिश की कि हमे प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करना है. यह देशहित में लिया गया फैसला है. हमें लोगों को समझाना है कि यह कैशलेस अर्थव्यवस्था की बात नहीं हो रही है बल्कि हम लेस कैश की बात कर रहे हैं यानी नगदी के ऊपर निर्भरता को कम किया जाना है. लेकिन अमित शाह के जवाब पार्टी सांसदों के सवालों पर कम पड़ गए.

अंतत: कुछ देर बाद अमित शाह बैठक के दौरान ही झुंझला गए. पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक अमित शाह ने मौजूद लोगों को मुंह बंद रखने की ताकीद की. सूत्र के मुताबिक शाह ने कहा, 'मैं मोदीजी के खिलाफ कुछ नहीं सुनना चाहता. पूरी पार्टी को इस फैसले को सफलता के रूप में प्रचारित करना होगा. जनता के बीच इस फैसले के बारे में कुछ भी नकारात्मक नहीं बोल सकते.' लगे हाथ अमित शाह ने सभी सांसदों को नया आदेश भी दिया कि सभी सांसद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में हफ्ता भर बिताएं.

इस बैठक के दौरान पार्टी के भीतर दो फाड़ भी देखने को मिली. एक तरफ देश के ज्यादातर हिस्सों से आए नेता नोटबंदी के संभावित दुष्परिणामों को लेकर चिंतित थे तो दूसरी तरफ गुजरात के लगभग सभी नेताओं ने इस फैसले का समर्थन किया.

चुनावी राज्यों में नहीं होगा असर

सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों की राय चाहे जो भी रही हो लेकिन शाह ने साफ कह दिया कि आगामी चुनावों में हमें इसका फायदा मिलेगा. इस मुद्दे पर हमें पीछे नहीं हटना है. उन्होंने संगठन को हिदायत दी कि विपक्ष जनता को गुमराह न कर सके. शाह ने पदाधिकारियों को भरोसा भी दिया कि हालत जल्द ही सामान्य हो जाएंगे.

अगले महीने भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 6 और 7 जनवरी को दिल्ली में होगी. इस बैठक में चुनाव वाले राज्यों को लेकर रणनीति बनेगी और नोटबंदी के बाद उपजे हालात पर चर्चा होगी.

First published: 17 December 2016, 8:20 IST
 
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