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भाजपा को 'देशद्रोही स्वच्छता अभियान' अपने घर से शुरू करना चाहिए

आदित्य मेनन | Updated on: 13 February 2016, 14:13 IST
QUICK PILL
  • जेएनयू में कुछ छात्रों द्वारा कथित तौर पर याकूब मेमन और अफजल गुरु को फांसी देने के विरोध में नारे लगाने पर बीजेपी सांसद के पत्र के बाद पुलिस ने छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले बीजेपी के केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्रो के ऐसे ही प्रदर्शन के बाद पत्र लिखा था.
  • लेकिन ऐसे कई मामले हैं जिनपर बीजेपी के नेता चुप्पी साध लेते हैं. पढ़िए ऐसे कुछ मामलों के बारे में जिनपर बीजेपी नेता पत्र नहीं लिखते.

बीजेपी सांसद महेश गिरी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर एक कार्यक्रम करने के लिए पुलिस में 'अज्ञात' लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया.

ये कार्यक्रम नौ फरवरी को दिल्ली के जवाहरहलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित किया गया था. तीन साल पहले अफजल गुरु को इसी दिन फांसी दी गई थी.

मीडिया में आई खबरों के अनुसार इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जेएनू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को 'राष्ट्रद्रोह' के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस ने जेएनू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को 'राष्ट्रद्रोह' के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है

11 फरवरी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद गिरी ने ट्वीट किया, "राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे."

ये भी कहा जा रहा है कि गिरी ने इस मामले पर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भी 'जेएनयू में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों' के बाबत एक पत्र लिखा.

ऐसा लग रहा है कि बीजेपी सांसदों का ये रोजमर्रा का शौक हो चुका है और उनके पास ऐसे मुद्दों के लिए काफ़ी फुर्सत है.

(सच कहा जाए तो गिरी के दूसरे शौक भी हैं. जिन मुस्लिमों को वो नापसंद करते हैं उनके नाम वाली सड़कों के नाम बदलवाकर उन मुस्लिमों के नाम पर रखवाते हैं जिन्हें वो पसंद करते हैं. वो आर्ट ऑफ लिविंग से भी जुड़े हैं जिसके प्रमुख को अभी हाल ही में पद्म विभूषण दिया गया है.)

फिलहाल हम बीजेपी के सासंदों और उनकी मैकार्थीवादी लड़ाई की ही बात करेंगे. ये सांसद काल्पनिक दुश्मनों के खिलाफ अक्सर एचआरडी मंत्रालय को चिट्ठियां लिखा करते हैं.

पढ़ेंः राजनाथ के बयान के बाद जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया गिरफ्तार

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने स्मृति ईरानी को कई पत्र लिखे. उन्हें हैदराबाद सेंट्रलल यूनिवर्सिटी में हो रही 'राष्ट्र विरोधी गतिविधियों' की चिंता थी. उनके निशाने पर आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन था. दिवंगत रोहित वेमुला इसी संगठन के छात्र थे.

गिरी ही की तरह दत्तात्रेय ने शिकायत की थी कि छात्र याकूब मेमन को फांसी दिए जाने का विरोध कर रहे थे. एबीवीपी के एक छात्र के संग मारपीट के आरोप में रोहित वेमुला समेत पांच छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था. उसके कुछ महीनों बाद रोहित ने आत्महत्या कर ली.

पुलिस में शिकायत दर्ज कराके गिरी दत्तात्रेय से आगे बढ़ गए हैं. फिर भी अगर दत्तात्रेय और गिरी फुर्सत में 'राष्ट्र विरोधियों' को पकड़वाने में रुचि रखते हैं तो उन्हें अपने घर से शुरुआत करनी चाहिए.

1- सांसद साक्षी महाराज


गिरी और दत्तात्रेय के लिए साक्षी महाराज को पकड़वाना काफी आसान होगा क्योंकि वो उन्हें संसद में आते-जाते मिल जाएंगे. साक्षी महाराज ने राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे को 'देशभक्त' कहा था.

महाराज ने कहा था, "मुझे लगता है कि नाथुराम गोडसे देशभक्त थे, जैसे महात्मा गांधी थे."

जाहिर है एक सांसद का राष्ट्रपिता के हत्यारे को देशभक्त बताना, कुछ लड़कों का याकूब और अफजल के फांसी को गलत समझने से ज्यादा 'राष्ट्र विरोधी' होना चाहिए.

कम से कम किसी ने याकूब और अफजल की तुलना महात्मा गांधी से नहीं की है. बहरहाल, शायद महात्मा गांधी से लेकर बीजेपी सांसदों की भावनाएं उतनी नहीं जुड़ी हुई हैं.

2- शिरोमणी अकाली दल


हो सकता है कि अपनी ही पार्टी के सांसदों के खिलाफ आवाज उठाना गिरी और दत्तात्रेय के लिए थोड़ा मुश्किल होगा. लेकिन शायद वो अपने सहयोगी दलों के खिलाफ आवाज उठा सकें. कुछ साल पहल शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अमृतसर स्थित स्वर्णमंदिर में ऑपरेशन ब्लूस्टार की स्मृति में खालिस्तान समर्थक आंतकी जरनैल सिंह भिंडरावाले की प्रशस्ति में शिलालेख लगवाया है.

इसमें लिखा है, "दमदमी टकसाल के 14वें प्रमुख शहीद संत ज्ञानी जरनैल सिंह जी खालसा भिंडरावाले और 1984 के शहीदों की याद में."

साक्षी महाराज ने बयान दिया था कि 'मुझे लगता है कि नाथुराम गोडसे देशभक्त थे, जैसे महात्मा गांधी थे'

एसजीपीसी पर अकादी दल का कब्जा है. बादल सरकार ने इस शिलालेख को हटाने से तौबा कर ली.

जाहिर है कि भारतीय इतिहास के सबसे खूंखार आतंकियों में शुमार किए जाने वाले भिंडरावाले को संत और शहीद कहना और वो भी बीजेपी के सहयोगी दल द्वारा, इन सासंदों को बुरा नहीं लगा.  उन्होंने इसपर किसी को कोई पत्र नहीं लिखा.

जिस तरह ये छात्र अफजल और याकूब की फांसी के खिलाफ हैं उसी तरह अकाली दल ने बलवंत सिंह राजौना और देविंदर पाल सिंह भुल्लर जैसे हत्यारों की फांसी माफ करने की मांग की थी. राजौना आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सदस्य है. वो पंजाब के सीएम बेअंत सिंह की हत्या को दोषी है. वहीं भुल्लर ने एसएसपी सुमेध सिंह और युवा कांग्रेस के नेता एमएस बिट्टा के ऊपर जानलेवा हमला किया था जिसमें कई लोग मारे गए थे.

भाजपा की सहयोगी अकाली दल ने भारतीय इतिहास के सबसे खूंखार आतंकियों में शुमार जरनैल सिंह भिंडरावाले को संत और शहीद का दर्जा दिया है

अकाली दल ने कहा था कि इन लोगों को फांसी देना 'राष्ट्रीय हित' में नहीं है. अब कन्फ्यूज न हों कि ये 'राष्ट्रीय हित' खूंखार आतंकियों को फांसी देने में है या बचाने में!


3- एमडीएमके प्रमुख वाइको


चलिए अगर आप गठबंधन के सहयोगी पर राजी नहीं हैं तो हम एक पुराने सहयोगी की बात बताते हैं. इस देश के इतिहास में आतंकवाद की सबसे बड़ी तारीख की बात होगी तो 26 नवंबर की बात होगी. इस दिन मुंबई पर आतंकियों का बड़ा हमला हुआ था. लेकिन अतीत में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सहयोगी रहे वाइको इस तारीख को एकदम अलग तरह से याद करते हैं. इस दिन वाइको और उनके समर्थक पटाखे छोड़ते हैं, केक काटते हैं, जश्न मनाते हैं क्योंकि यह लिट्टे प्रमुख वेलुपल्ली प्रभाकरण का जन्मदिन है.

प्रभाकरण कोई मेमन या गुरू नहीं था वह दुनिया के कुछेक खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक लिट्टे का मुखिया था. वह संगठन जिसने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की. उसके दामन पर भारतीय सेना के 1200 पीसकीपर्स की हत्या का दाग है.

वाइको और भाजपा 2014 का लोकसभा चुनाव गठजोड़ करके लड़े थे. किसको पता आने वाले समय में भाजपा एक बार फिर से उनसे गठजोड़ कर ले. यह भी देखना दिलचस्प होगा कि वाइको भाजपा से गठजोड़ करें और गिरी और बंडारू जैसे नेताओं को प्रभाकरण के जन्मदिन की पार्टी के जश्न में शामिल होने के लिए आमंत्रित करे, तारीख याद रहे 26/11.


4- असम के भाजपा नेता


द टेलीग्राफ में 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक खबर असम के भाजपा नेता भावदेव गोस्वामी के हवाले से छपी थी. इसमें गोस्वामी ने खुलासा किया था कि भाजपा ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के नेताओं, आइके सॉन्गोबजीत और रंजन दैमारी के साथ गुप्त समझौता किया था.

भाजपा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने वाले संगठन लिट्टे के समर्थक वाइको के साथ मिलकर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है

गोस्वामी ने स्वीकार किया था कि उन्होंने पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ इन प्रतिबंधित आतंकी संगठन के नेताओं से असम-अरुणाचल सीमा पर मुलाकात की थी. खबर के मुताबिक इस मुलाकात में तेजपुर से भाजपा के विधायक रामप्रसाद शर्मा भी शामिल थे.

एनडीएफबी असम में हुए कुछेक निर्मम नरसंहारों के लिए जिम्मेदार है. 23 दिसंबर, 2014 को इस संगठन ने कोकराझार और सोनितपुर जिले में 80 के करीब आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया था. तीन मई 2014 को कोकराझार में एक बार फिर से इसने 32 मुसलिमों को मौत के घाट उतार दिया.

अगर एनडीएफबी और भाजपा के बीच सांठगांठ की खबरों में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह जेएनयू के छात्रों पर लगाए गए आरोपों से कहीं ज्यादा गंभीर देशद्रोह है.

यह बात तो तय है कि एक आतंकी की फांसी का विरोध करना देशद्रोह नहीं है बल्कि एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के साथ मिलीभगत करना देशद्रोह है.

पढ़ेंः जेएनयू मामले में आप नेता कुमार विश्वास के भाजपाई बोल

हमारे राष्ट्रवादी मित्र गिरी और दत्तात्रेय कम से कम इतना तो सुनिश्चित कर सकते हैं कि देशद्रोहियों की स्वच्छता का अभियान अपने घर के भीतर से शुरू करें.

गोडसे, लिट्टे, खालिस्तान और एनडीएफबी जैसे लोग कभी भी गिरी और दत्तात्रेय के गुस्से को नहीं भड़काते. इसकी सीधी वजह ये है कि ये आतंकी मुस्लिम नहीं हैं. या ऐसे कहें कि आतंकी सिर्फ मुस्लिम होते हैं.

वह आतंकी जो मुसलिम नहीं है इनकी नजर में वो आतंकी नहीं है. यह इनके अंदर मुसलमानों के प्रति मौजूद घृणाभाव है जो इन्हें उपराष्ट्रपति हमिद अंसारी के कथित राष्ट्रध्वज के अपमान पर जोर-जोर से बोलने के लिए मजबूर करता है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रगान के अपमान पर चुप्पी साधने को मजबूर करता है.

तो महेश गिरी जी, अगर अब भी आप यह तय नहीं कर पा रहे कि असली देशद्रोही कौन है तो बेहतर होगा कि अपने खाली समय में आर्ट ऑफ लिविंग की योग कक्षाओं में जाना शुरू कर दीजिए. और हां अपने मित्र बंडारू दत्तात्रेय को भी साथ ले जाइएगा.

First published: 13 February 2016, 14:13 IST
 
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