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दलित शब्द न इस्तेमाल करने के परामर्श का BJP सांसद ने ही किया विरोध, कहा- कुछ नहीं बदलेगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 September 2018, 11:48 IST
(File Photo)

भारतीय मीडिया में दलित शब्द के प्रयोग को लेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी की. इस एडवाइजरी के बारे में भारतीय जनता पार्टी के सांसद उदित राज ने कहा है कि सरकार की तरफ से निर्देश आना सही है. लेकिन इसे अनिवार्य किये जाने की कोई जरुरत नहीं है. गौरतलब है कि इस एडवाइजरी में सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से ये अनुरोध किया गया है कि दलित शब्द के प्रयोग से बचें.

सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी इस एडवाइजरी को लेकर बीजेपी के सांसद उदित राज ने कहा, ''दलित का मतलब ही है शेड्यू्ल कास्ट. आगे उन्होंने कहा, "इस पर रोक नहीं लगना चाहिये. लोगों की स्वेच्छा पर छोड़ देना चाहिये. ये शब्द समुदाय की एकता को संबोधित करता है. इससे कोई फायदा नहीं होगा. ये शब्द संघर्ष का प्रतीक बन गया है. इस पर कोई बाध्यता नहीं होनी चाहिये."

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वहीं कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया का भी यही मत है की दलित कोई अपमानजनक शब्द नहीं है. इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती. गौरतलब है कि दलित शब्द का इस्तेमाल जानकारों के अनुसार, पहली बार पांच दशक पहले 1967 में किया गया था. यह तब इस्तेमाल किया गया था जब इस नाम से एक संगठन खड़ा हुआ. इस शब्द का मतलब उत्पीड़ित है. यानि उत्पीड़न का शिकार.

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गौरतलब है कि सात अगस्त को सभी निजी टीवी चैनलों को संबोधित करके लिखे गए पत्र में बंबई हाई कोर्ट के जून के एक दिशा-निर्देश का उल्लेख किया गया है. बंबई हाई कोर्ट के दिशा-निर्देश में मंत्रालय को मीडिया को ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने को लेकर विचार करने को कहा गया था. बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने पंकज मेशराम की याचिका पर ये निर्देश दिया था.

 

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First published: 4 September 2018, 11:48 IST
 
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