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भाजपा का कांग्रेस-मुक्त भारत: कितनी हकीकत, कितना फ़साना

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
(कैच न्यूज)

एक ओर भाजपा का राजनीतिक ग्राफ उठता दिख रहा है तो दूसरी ओर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि कांग्रेस विलुप्तप्राय होने के नजदीक है. जिन सात राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है उन्हें छोड़ दें तो भी अभी हुए विधानसभा चुनावों के दौर में पार्टी की चार राज्यों और एक संघ शासित राज्य में मजबूत मौजूदगी है. जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता से दूर है उनमें भी यह मौजूदगी कांग्रेस सरपरस्ती के नेटवर्क की मौजूदगी के बारे में बताती है.

अभी हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कुल 822 सीटों पर विभिन्न पार्टियों की दावेदारी थी. इनमें से कांग्रेस (115) ने भाजपा (64) द्वारा जीती गई सीटों के दोगुने से कुछ कम सीटें ही हासिल कीं. यह व्यर्थ के आंकड़ें नहीं हैं. इसे इस तथ्य के साथ देखना चाहिए कि इन 822 सीटों में से कुल 643 सीटें न तो कांग्रेस और न ही भाजपा की झोली में आईं. बल्कि इन्हें अन्य पार्टियों ने जीता.

पूरे देश में कांग्रेस की मौजूदगी

वास्तव में टाइम्स ऑफ इंडिया के एक अध्ययन से पता चलता है कि 2012 से लेकर अब तक हुए कुल 30 चुनावों में सभी अन्य दलों ने मिलाकर आधी से ज्यादा (4,117 सीटों में से 2,195) सीटें जीतीं. 

इससे जो तस्वीर उभर कर सामने आती है उसके मुताबिक क्षेत्रीय दलों के भारी वर्चस्व वाले चुनावी क्षेत्र में भी कांग्रेस पार्टी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक मौजूदगी बनाए हुए है. यह मौजूदगी भी देश भर में हैं. 

भाजपा शासित गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी कांग्रेस के क्रमशः 61, 42 और 21 विधायक हैं

केवल पश्चिम को छोड़ दें तो कांग्रेस की मौजूदा 115 सीटों के साथ वह राज्य जिनमें पार्टी सत्ता में है पूरे देश भर में फैली है. 

उत्तर में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर दक्षिण में कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और पुडुच्चेरी और पूर्व में बिहार, पश्चिम बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर में असम, मणिपुर, मिजोरम और मेघालय.

यहां तक की पश्चिम में भी भाजपा शासित गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी कांग्रेस के क्रमशः 61, 42 और 21 विधायक हैं. अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने के बावजूद क्या यह ताकत खो रही हैं. 

कोई भी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के आसपास नहीं

इस सतत मौजूदगी का मतलब है कि अभी भी इन राज्यों में कांग्रेस के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता मौजूद हैं और दशकों में बनाया गया नेटवर्क मौजूद है. पूरे देश में इस तरह की मौजूदगी के मामले में कोई भी राष्ट्रीय पार्टी इसके आसपास भी नहीं है.

कांग्रेस-मुक्त भारत के लक्ष्य को पाने के लिए भाजपा को न केवल आने वाले सभी चुनाव जीतने होंगे बल्कि यह भी प्रार्थना करनी होगी की क्षेत्रीय दल केवल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएं भाजपा को नहीं. 

यह कहना कि मौजूदा चुनाव परिणाम ने भाजपा को कांग्रेस-मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ाया है, केवल एक धोखा ही है

निर्विवाद रूप से कांग्रेस का पतन दिख रहा है और यह संभव भी है कि अगर ऐसे ही पतन होता रहा तो कांग्रेस की सरपरस्ती वाला यह नेटवर्क स्वतः ही समाप्त हो जाए. हालांकि जब तक यह होता है तब तक कांग्रेस वही रहेगी जो है- यानी पूरे देश में मौजूदगी वाली एक राष्ट्रीय पार्टी.

वहीं, क्षेत्रीय दलों की बढ़ती मजबूती यह जाहिर करती है कि वे किसी भी पार्टी के राष्ट्रीय लक्ष्यों के सामने मुख्य चुनौती हैं. कांग्रेस की पहले से ही देश भर में मौजूदगी उसे इस चुनौती से निपटने की ताकत देती है लेकिन भाजपा के पास इसका अभाव है. 

इन सबके बीच यह कहना कि मौजूदा चुनाव परिणाम ने भाजपा को कांग्रेस-मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ाया है, फिलहाल पूरा सच नहीं है.

First published: 23 May 2016, 7:38 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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