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कौन हैं गुजरात के अगले मुख्यमंत्री की दौड़ में आगे चल रहे नितिन पटेल?

राजीव खन्ना | Updated on: 5 August 2016, 8:46 IST
QUICK PILL
  • भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गुजरात के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लगभग ले लिया है. नितिन, आनंदीबेन की जगह लेंगे.
  • पाटीदार आंदोलन से हुए नुकसान और फिर दलितों के आंदोलन के बाद बीजेपी बैकफुट पर है. आनंदीबेन पटेल दोनों ही आंदोलनों से निपटने में विफल रही और इसका खमियाजा उन्हें अपनी कुर्सी देकर चुकानी पड़ी.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गुजरात के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लगभग ले लिया है. पटेल आनंदीबेन पटेल की जगह लेंगे. 

पार्टी के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती पटेल उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाने की है और इस लिहाज से नितिन पटेल मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी में सबसे आगे निकल चुके हैं.

नितिन पटेल फिलहाल गुजरात सरकार में मंत्री हैं और उनके पास स्वास्थ्य, मेडिकल, शिक्षा, परिवार कल्याण, सड़क और परिवहन के अलावा कैपिटल प्रोजेक्ट्स का जिम्मा है. इससे पहले वह जल आपूर्ति, जल संसाधन और शहरी विकास मंत्री थे जिसे गुजरात सरकार का अहम विभाग माना जाता रहा है. नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वह राज्य के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं.

फिलहाल वह मेहसाणा से विधायक हैं और उन्होंने अपना पहला चुनाव 1990 में लड़ा था. इससे पहले वह मेहसाना जिले की स्थानीय राजनीति में शामिल थे. वास्तव में वह 2012 के पहले तक कडी विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आते रहे. 2012 में उन्हें पहली बार मेहसाणा भेजा गया क्योंकि परिसीमन की वजह से कडी विधाानसभा क्षेत्र सुरक्षित श्रेणी में आ गया.

पटेल अभी तक दो बार चुनाव हारे हैं. पहली बार उन्हें 2002 में राज्य विधानसभा का चुनाव हारना पड़ा जबकि दूसरी बार वह 2004 में लोकसभा का चुनाव हार गए. राज्य विधानसभा में वह सबसे अधिक मुखर रहे हैं और लगभग सभी मुद्दों को लेकर वह कांग्रेस पर हमला करते रहे हैं. इसके अलावा वह एक कारोबारी भी हैं.

पिछले एक साल में पटेलों के आंदोलन की वजह बीजेपी को काफी नुकसान हो चुका है

विश्लेषकों की माने तो पाटीदार आंदोलन के बाद दलितों के विरोध प्रदर्शन के बाद बीजेपी पटेलों की नाराजगी दूर करने के लिए किसी पटेल उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी. पिछले एक साल में पटेलों के आंदोलन की वजह बीजेपी को काफी नुकसान हो चुका है. 

पिछले साल पाटीदार आंदोलन के दौरान पटेलों ने नितिन पटेल के घर पर भी हमला किया था. इसके बावजूद यह माना जाता है कि वे उत्तरी गुजरात से आने वाले पटेलों के सबसे बड़े नेता हैं. जब उन्हें कडी सीट छोड़कर मेहसाणा जाना पड़ा तब बीजेपी को कडी सीट का नुकसान उठाना पड़ा. साथ ही स्थानीय चुनाव में भी बीजेपी को कडी में नुकसान उठाना पड़ रहा है.

विश्लेषकों की माने तो पटेलों को मनाने के लिए बीजेपी आनंदीबेन पटेल की जगह किसी नए पटेल उम्मीदवार को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी. गुजरात में सत्ता आने के बाद से बीजेपी ने राज्य को दो पटेल मुख्यमंत्री दिए, केशुभाई पटेल और आनंदीबेन पटेल.

गुजरात में सत्ता आने के बाद से बीजेपी ने राज्य को दो पटेल मुख्यमंत्री दिए, केशुभाई पटेल और आनंदीबेन पटेल

केशुभाई भाई पटेल और आनंदी बेन पटेल के अलावा गुजरात मंत्रिमंडल में पटेल जाति से आने वाले मंत्रियों की संख्या भी अधिक रही है. मोदी के कैबिनेट में पटेलों की भागीदारी सबसे ज्यादा थी. 

पटेल बीजेपी के मजबूत आधार रहे हैं. पटेल केशुभाई पटेल के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उन्हें मजबूत वोट बैंक में तब्दील किया. इससे पहले गुजरात की राजनीति क्षत्रियों के इर्द गिर्द घूमती थी और वह कांग्रेस के समर्थक थे.

साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और आनंदीबेन पटेल के बीच तनाव का फायदा भी नितिन पटेल को मिला. राज्य के एक राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं, 'दलित आंदोलन के बाद स्थितियां अमित शाह के पक्ष में हो गई और फिर उन्होंने नितिन पटेल के पीछे पूरी ताकत लगा दी. विजय रुपानी को भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में शामिल समझा जा रहा था लेकिन उन्होंने संगठन के लिए काम किए जाने की घोषणा कर नितिन पटेल का रास्ता साफ कर दिया. लेकिन आनंदीबेन पटेल ने यह साफ कर दिया है कि वह गुजरात छोड़कर कहीं नहीं जा रही हैं और यह अमित शाह गुट के लिए अच्छी खबर नहीं है. माना जा रहा है कि अब वह अमित शाह कैंप के खिलाफ काम करेंगी. नितिन पटेल का मुख्यमंत्री बनना इन दोनों नेताओं के बीच चल रही रस्साकशी का नतीजा है.'

उन्होंने कहा, 'किसी भी हालत में गुजरात का मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष रहते उनकी कठपुतली ही होगा. उनके पास काम करने के लिए बेहद कम जगह होगी. जैसा कि आनंदीबेन के साथ हुआ. उनके पास आईपीएस अधिकारियों को ट्र्रांसफर करने तक का अधिकार नहीं था.'

शाह गृह मंत्री रह चुके हैं और उनकी इस विभाग में दिलचस्पी रही है. आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले तक नितिन पटेल को बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. वैसे भी गुजरात में केवल मोदी का ही फैसला चलता है. वह एक नाम तय करते हैं और फिर बाद में उसका अनुसरण किया जाता है.

मौजूदा स्थिति में नितिन की सबसे बड़ी ताकत उनका जबरदस्त पार्टी कार्यकर्ता होना है. वह पिछले तीन दशक से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं. वह मोदी के साथ भी काम कर चुके हैं और आनंदीबेन के साथ भी उनके रिश्ते बेहतर रहे हैं. इसके अलावा उनका शाह कैंप के साथ भी बेहतर रिश्ता है. वह लगभग हर मुद्दे पर विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस पर जबरदस्त हमला करते रहे हैं.

हालांकि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उनके पास जनसमर्थन का नहीं होना है. उनके अपने विधानसभा क्षेत्र के बाहर उनका कोई जनाधार नहीं है. साथ ही वह पटेल और मोदी की तरह कुशल प्रशासक नहीं है. 

मंत्रालयों को संभालने के मामले में भी वह थोड़े कमजोर नजर आते हैं. और वह बहुत अच्छे वक्ता नहीं माने जाते हैं.

विश्लेषकों की माने आनंदीबेन पटेल की जगह नितिन पटेल के बदले वित्त मंत्री सौरभ पटेल का विकल्प भी चुना जा सकता था. हालांकि उनके साथ भी जनाधार वाली समस्या है. नितिन पटेल के पास कम से कम पटेलों का समर्थन है.

2012 में आनंदीबेन, नितिन और सौरभ पटेल के विधानसभा क्षेत्र में बदलाव आ चुका है. हालांकि ये तीनों जीतने में सफल रहे लेकिन नितिन पटेल के जीत का अंतर कम रहा.

First published: 5 August 2016, 8:46 IST
 
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