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भाजपा की राबर्ट वाड्रा बनेगी आनंदीबेन पटेल की बेटी!

समीर चौगांवकर | Updated on: 7 February 2016, 17:54 IST

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का परिवार भाजपा के गले की हड्डी बन रहा है. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय आनंदीबेन वहां की राजस्व मंत्री थी. आनंदीबेन के राजस्व मंत्री रहते उनकी बेटी को सरकारी जमीन कौड़ियों के मोल देने के आरोप के बाद भाजपा में राजनैतिक सरगर्मियां तेज हो गई है.

भाजपा सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस पूरे मामले को लेेकर पीएम मोदी से बात करने का मन बनाया है. कैच न्यूज ने जब इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से संपर्क साधा तो उन्होंने मामले पर चुप्पी साध ली. लेकिन सूत्रों के अनुसार शाह इस मामले को तूल देकर आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते है.


भाजपा की राबर्ट वाड्रा


पार्टी के बड़े नेताओं का भी कहना है कि यह मामला मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के वादे को बड़ा झटका दे सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार राबर्ट वाड्रा के जमीन घोटाले पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने वाली भाजपा के लिए आनंदीबेन पटेल की बेटी अब राबर्ट वाड्रा बन सकती हैं.

भाजपा अध्यक्ष शाह और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के संबंध कभी भी सहज नहीं रहे है


दिलचस्प बात यह है कि मोदी के गृह प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री और उनकी विश्वासपात्र होने के बावजूद आनंदीबेन पटेल को बचाने के लिए अभी तक भाजपा ने अपने प्रवक्ताओं की फौज नहीं उतारी है. पार्टी के अंदरखानों में इस बात की चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति मिलने के बाद ही प्रवक्ता इस मामले पर अपना मुंह खोलेंगे.

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राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि 2010-11 में आनंदीबेन पटेल के राजस्व मंत्री रहते उनकी बेटी को कौड़ियों के भाव जमीन दी गई. साथ ही, सरकारी जमीन के घालमेल का यह मामला गुजरात चुनाव के ठीक एक साल पहले कैसे बाहर आया?

भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं, 'इस मामले में दिल्ली में बैठे बड़े नेताओं की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता.' गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष शाह और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के संबंध कभी भी सहज नहीं रहे है.

शाह- आनंदीबेन का रिश्ता

शाह और आनंदीबेन दोनों मोदी के करीबी है. हालांकि, दोनों के बीच संवाद कम होता है. कम ही लोगों को पता है कि मोदी के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद जब गुजरात के मुख्यमंत्री चुनने का वक्त आया तो अमित शाह, आनंदीबेन के नाम पर राजी नहीं थे. उस समय शाह भाजपा अध्यक्ष भी नहीं थे. मोदी के मनाने और शाह को बड़ी जिम्मेदारी देने के वादे के बाद उन्होंने भारी मन से आनंदीबेन के नाम का समर्थन किया था.

भाजपा के ही कुछ लोग आनंदीबेन को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं

अभी कुछ दिन पूर्व ही दोबारा भाजपा अध्यक्ष बने अमित शाह की ताजपोशी से भी आनंदीबेन दूर रहीं. दिल्ली न आने की वजह आनंदीबेन ने अपने स्वास्थ्य को बताया. सूत्र यह भी बताते हैं कि पीएम मोदी ने खुद आनंदीबेन को फोन कर हर हाल में दिल्ली आने को कहा था.

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खबर है कि भाजपा के भीतर कुछ लोग आनंदीबेन को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद फिर से मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते. जाहिर है कि बेटी-बेटों के खिलाफ बाहर आए मामलों से आनंदीबेन की स्थिति काफी कमजोर हुई है.

आनंदीबेन पटेल पर आरोप है कि गुजरात की राजस्व मंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी बेटी अनार जयेश पटेल के हिस्सेदारी वाली कंपनी को गिर लॉयन सैंक्चुरी के पास कुल 400 एकड़ जमीन 15 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से दी थी. यही नहीं राज्य सरकार ने जमीन का लैंडयूज बदलते हुए कृषि योग्य भूमि को गैर कृषि योग्य मकसद में इस्तेमाल करने की भी अनुमति दे दी थी.

हितों का टकराव

उस समय आनंदीबेन पटेल गुजरात की राजस्व मंत्री हुआ करती थीं और राजस्व मंत्रालय ही ऐसी जमीन देने वाली नोडल अथॉरिटी था. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी आनंदी बेन ने राजस्व विभाग और अर्बन डेवलपमेंट विभाग अपने पास ही रखा है. इन दोनों विभागों का उनके बच्चों के कारोबारी हितों से सीधा टकराव है.

First published: 7 February 2016, 17:54 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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