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अनुराग ठाकुर: राजनीति में बेटे के उदय की कहानी

राजीव खन्ना | Updated on: 24 May 2016, 8:36 IST
QUICK PILL
  • हिमाचल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर का सितारा इन दिनों बुलंदी पर है. ठाकुर खुद तीन बार से हमीरपुर संसदीय सीट से सांसद हैं. 
  • शशांक मनोहर के इंटरनेशनल क्रिकेट एसोसिएशन (आईसीसी) का प्रेसिडेंट चुने जाने के बाद अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई का प्रेसिडेंट चुन लिया गया है.
  • बतौर नेता और अब बीसीसीआई के प्रेसिडेंट बने अनुराग ठाकुर की कहानी हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 'बेटे के उदय' की कहानी है. हिमाचल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर का सितारा इन दिनों बुलंद है. ठाकुर खुद तीन बार से हमीरपुर संसदीय सीट से सांसद हैं. 

    विश्लेषक ठाकुर को बीसीसीआई का प्रेसिडेंट बनाए जाने के बाद चकित हैं क्योंकि ठाकुर क्रिकेट की राजनीति में बेहद कम अनुभवी हैं. वहीं दूसरी तरफ यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ठाकुर को बीसीसीआई का प्रेसिडेंट बनाए जाने के बाद उनके लंबे राजनीतिक जीवन का रास्ता खुल गया है. क्रिकेट की राजनीति में आने के बाद वह बतौर नेता अपनी की गई गलतियों को सुधारने की स्थिति में होंगे.

    क्रिकेट के अलावा राजनीति में भी ठाकुर बेहद तेेजी से मजबूत हुए हैं. वह तीन बार सांसद का चुनाव जीतने में सफल रहे. पहली बार उन्होंने 2008 में हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी. 

    जनवरी 2015 में उन्होंने बीसीसीआई का मानद सचिव चुना गया और इसके बाद 22 मई 2016 को उन्हें बीसीसीआई का प्रेसिडेंट चुन लिया गया. बीसीसीआई के पूर्व प्रेसिडेंट शशांक मनोहर के आईसीसी में जाने के बाद प्रेसिडेंट की जगह खाली हुई थी.

    ठाकुर बीसीसीआई के दूसरे युवा प्रेसिडेंट हैं. पहले युवा प्रेसिडेंट फतेह सिंह गायकवाड़ थे जिन्होंने 33 साल की उम्र में बीसीसीआई प्रेेसिडेंट का कार्यभार संभाला था.

    विश्लेषकों की माने तो राजनीति में ठाकुर की तेज तरक्की उनके पिता की विरासत से जुड़ी है. हमीरपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, 'वह अपने पिता के काम पर अपने क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रहे. जनता के बीच उनकी कोई पकड़ नहीं है और वह शायद ही अपने संसदीय क्षेत्र में दिखाई देते हैं. बतौर सांसद उनके कार्यक्रम ग्रामीण इलाकों में ही होते हैं. जब कोई सार्वजनिक रैली होती है तो वह मुख्य तौर पर उनके पिता का कार्यक्रम होता है जिसमें उनकी भूमिका नाममात्र की होती है.'

    हालांकि वहीं दूसरी तरफ अनुराग की क्रिकेट की दुनिया में अपनी उलब्धियां भी रही हैं. शिमला के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, 'किसने सोचा था कि कोई हिमाचली बीसीसीआई का प्रमुख बन जाएगा. यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. दूसरा यह कि कोई यह नहीं कह सकता कि उनके बीसीसीआई प्रमुख बनने में उनके पिता की कोई भूमिका नहीं है.'

    ठाकुर अभी युवा हैं. ऐसे में क्रिकेट और राजनीति में उनकी पारी बेहद लंबी होने का अनुमान है

    ठाकुर अभी युवा हैं. ऐसे में क्रिकेट और राजनीति में उनकी पारी बेहद लंबी होगी. विश्लेषकों ने कहा, 'उनके सभी के साथ बेहतर संबंध हैं. एक तरफ वह बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और लाल कृष्ण आडवाणी के करीब हैं तो दूसरी तरफ उनके शरद पवार और राजीव शुक्ला से भी बेहतर संबंध हैं.'

    उन्होंने कहा कि ठाकुर को बिलासपुर, नादौन और गुमा में स्टेडियम बनाए जाने की वजह से युवाओं का जबरदस्त समर्थन मिला है. साथ ही क्रिकेट और राजनीति की गुटबंदी को लेकर उनकी आलोचना भी होती रहती है.

    हमीरपुर के एक पत्रकार ने बताया, 'बीजेपी इस संसदीय क्षेत्र में भारतीय क्रिकेट पार्टी की तरह काम करती है जहां सार्वजनिक हित की बजाए अक्सर क्रिकेट को तरजीह दी जाती है.'

    कांग्रेस प्रेसिडेंट सुखविंदर सिंह सुखु ने धूमल पर उनके बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'वह हमेशा कांग्रेस पर वंशवादी राजनीति का आरोप लगाते हैं. धूमल अब क्या कर रहे हैं. वह क्रिकेट की मदद से अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल कर रहे हैं. यह कुछ नहीं बल्कि राजनीति का व्यावसायीकरण है.'

    मीडिया में काम करने वाले लोगों ने बताया कि अनुराग के दो चेहरे हैं. एक तो वह क्रिकेट से जुड़े हैं और दूसरा उनका राजनीतिक करियर है. 

    शिमला के एक पत्रकार ने कहा, 'चूंकि उन्हें सब कुछ राजनीति में मिल चुका है इसलिए हम उनसे बिजली, सड़क और पानी के मुद्दे पर बात करने की उम्मीद नहीं कर सकते.'

    तीन बार सांसद बनने के बावजूद अनुराग को मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर कई तरह के विचार हैं. जबकि बीजेपी में उनके किसी भी नेता के साथ खराब संबंध नहीं रहे हैं. 

    हिमाचल में विक्रमादित्य सिंह और अनुराग के बीच अक्सर तुलना की जाती है

    एक विश्लेषक ने कहा, 'अगर चुनाव हारने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मृति ईरानी को मंत्री बना सकते हैं तो ठाकुर को कम से कम खेल राज्य मंत्री तो बनाया ही जा सकता था.'

    उन्होंने कहा कि मोदी ने उन्हें इसलिए मंत्री पद नहीं दिया क्योंकि इससे अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच गलत संदेश जाता. यह भी कहा जाता है कि मोदी के साथ धूमल के संबंध अच्छे नहीं है क्योंकि वह लालकृष्ण आडवाणी के करीब माने जाते हैं.  

    हालांकि एक विचार यह भी है कि आने वाले दिनों में ठाकुर को खेल मंत्रालय का प्रभार सौंपा जा सकता है.

    हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में वर्चस्व स्थापित किए जाने को लेकर अनुराग की अक्सर आलोचना होती रही है. अनुराग को 25 साल की उम्र में ही एचपीसीए का प्रेसिडेंट चुन लिया गया. हिमाचल में विक्रमादित्य सिंह और अनुराग के बीच अक्सर तुलना की जाती है. विक्रमादित्य सिंह पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे हैं. फिलहल इस लड़ाई में अनुराग आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं.

    First published: 24 May 2016, 8:36 IST
     
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