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कल्याण सिंह की कसमसाहट और भाजपा का मौन

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 26 April 2016, 23:50 IST

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत पैठ रखने वाले कल्याण सिंह के बयान ने पार्टी में हलचल पैदा कर दी है. 

राजस्थान के मौजूदा राज्यपाल कल्याण सिंह द्वारा पार्टी की ओर से दी गई कोई भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार रहने की बात कहकर एक तरह से अपनी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर कर दी है. लेकिन इस पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है. सक्रिय राजनीति में कल्याण सिंह की दोबारा वापसी इतनी आसान भी नहीं लगती.

उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले एक नेता द्वारा नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि फिलहाल पार्टी ने कल्याण सिंह को ऐसा कोई दायित्व देने का फैसला नहीं लिया है. ऐसे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने हैं और तब तक तमाम समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे.

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सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान की ओर से अभी तक कल्याण सिंह को राजनीति में वापसी के संकेत खुले तौर पर नहीं मिले हैं. इतना जरूर है कि कल्याण  सिंह के उत्तर प्रदेश के दौरों में तेजी आई है. जबकि उत्तर प्रदेश की राजनीति के बारे में पार्टी आलाकमान के कई नेता लगातार उनसे संपर्क में भी हैं. 

बताया जाता है कि सांसद केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाने में भी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओम प्रकाश माथुर और कल्याण सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 

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अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वोट बैंक में कल्याण की पकड़ काफी मजबूत है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पार्टी आखिरी मौके पर कल्याण सिंह का कार्ड उत्तर प्रदेश में खेल सकती है. हालांकि सिंह के संकेतों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनकी उम्र भी है. उनकी उम्र 84 साल से ज्यादा हो चुकी है.

राजनीतिक अनुभव में आगे

यह जगजाहिर है कि कल्याण सिंह को राजनीति में काफी लंबे वक्त का अनुभव है. 10 बार विधायक रहने के अलावा वे दो बार सांसद भी रह चुके हैं. जबकि 2014 से राजस्थान के राज्यपाल हैं. भाजपा में कुछ ही ऐसे नेता हैं जिनको कल्याण सिंह जितना लंबा राजनीतिक अनुभव है. उत्तर प्रदेश में उनकी स्थिति पितामह सरीखी है, लेकिन भाजपा का मौजूदा नेतृत्व शायद ही उन्हें फिर से सक्रिय राजनीति में आने दे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कल्याण सिंह के तल्ख रिश्तों के इतिहास को देखते हुए ऐसा संभव नहीं दिखता.

First published: 26 April 2016, 23:50 IST
 
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