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7 साल पहले बलूचिस्तान पर क्या सोचती थी बीजेपी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2016, 17:08 IST

"आने वाले समय में बलूचिस्तान भारत को बहुत तकलीफें देना वाला है.” सात साल पहले पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने यह बयान संसद में दिया था. दरअसल 16 जुलाई, 2009 को  मिस्र के शर्म अल शेख में  भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी के बीच हुई बैठक के बाद साझा बयान में बलूचिस्तान का जिक्र हुआ था.

इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान का न सिर्फ जिक्र किया बल्कि वहां के लोगों को धन्यवाद भी दिया. मोदी के इस बयान को भारत की पाकिस्तान के प्रति नीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज ने इस बयान की व्याख्या यह कह कर की है कि मोदी का बयान पाकिस्तान के उस दावे की स्वीकरोक्ति है जिसके मुताबिक भारत बलूचिस्तान में हस्तक्षेप करता है.  

सात साल पहले शर्म अल शेख में भारत-पाक द्वारा जारी साझा बयान में बलूचिस्तान में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की चिंताओं का उल्लेख हुआ. बलूचिस्तान में आतंकवाद के लिए पाकिस्तान, भारत को जिम्मेदार ठहराता है. साझा बयान के अनुसार तत्कालीन पाक के प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा था कि पाकिस्तान के पास बलूचिस्तान और अन्य क्षेत्रों में खतरों के बारे में कुछ जानकारी है.

साझा बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि उन्होंने भारत से यह मनवा लिया है कि बलूचिस्तान की गड़बड़ियों में उसका हाथ है.

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साझा बयान की आलोचना करते हुए उस समय बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा जिसमें बलूचिस्तान का जिक्र किए जाने पर आपत्ति जताई गई. एनडीए ने आरोप लगाया कि सरकार देश की सामरिक और विदेश नीति को राष्ट्र की कीमत पर पलट रही है.

उस समय बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया कि पहली बार भारत और पाकिस्तान के किसी साझा बयान में बलूचिस्तान का जिक्र है. यह ज़िक्र क्यों किया गया है?

इस मसले पर संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संसद में बयान भी देना पड़ा. उनके बयान से पहले यशवंत सिन्हा ने लोकसभा में कहा, "क्यों बलूचिस्तान के मुद्दे को बयान में शामिल किया गया. कागज पर लिखे बयान की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि पाकिस्तानी नेता बलूचिस्तान में उपद्रव के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने लगे. शर्म अल शेख में मिली शर्मिंदगी को सात समुद्रों के पानी से भी नहीं धोया जा सकता."

आज बीजेपी के सुर बदले हुए हैं

सोमवार को 70वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से एक बार फिर बलूचिस्तान का जिक्र किया है. 12 अगस्त को पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा था कि गिलगित बालटिस्तान और बलूचिस्तान में पाकिस्तान जो हिंसा बरपा रहा है, आम नागरिकों का दमन कर रहा है उसके बारे में भी बात होनी चाहिए. इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में मोदी ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग उन्हें अपना मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद कह रहे हैं.

आपको बता दें कि 2009 में यशवंत सिन्हा ने साझा बयान में बलूचिस्तान के उल्लेख पर कहा कि अब पाकिस्तान हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हमारे खिलाफ बलूचिस्तान का मुद्दा उठाएगा. उन्होंने कहा था कि भारत की विदेश नीति के इतिहास में शायद इतनी भयानक भूल पहले कभी नहीं  हुई और आज ये नहीं कहा जा सकता कि भारत की विदेश नीति कहां खड़ी है.

बीजेपी के इस आपत्ति के जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा कि वार्ता के दौरान गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान में कुछ लोग सोचते हैं कि भारत बलूचिस्तान में हस्तक्षेप कर रहा है. पूर्व पीएम ने कहा कि भारत का आचरण खुली किताब है और हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. 

पीएम मोदी के बलूचिस्तान के जिक्र पर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र करना साफ बताता है कि भारत रॉ के जरिए बलूचिस्तान में आतंक को हवा दे रहा है. अजीज ने मार्च में मीडिया के सामने लाए गए कथित तौर पर भारतीय जासूस कुलभूषण यादव का भी उदाहरण दिया.

First published: 16 August 2016, 17:08 IST
 
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