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उत्तर प्रदेश: क्या 'लोकप्रिय' वरुण गांधी के नाम पर सहमत होंगे मोदी-शाह?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(कैच न्यूज)

बिहार में मिली हार और असम की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सरल संदेश दिया है कि हर राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी चेहरा बनाना सबसे बेहतर विकल्प नहीं है. दूसरे शब्दों में कहे तो राज्य के विधानसभा चुनावों में स्थानीय चेहरे को पेश करना ज्यादा बेहतर होगा.

संभवत: बीजेपी असम की तर्ज पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है. पार्टी इसके लिए एक आतंरिक सर्वे करवा चुकी है, जिसके परिणाम अब सामने हैं.

मई, 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद बीजेपी ने 11 राज्यों में चुनाव लड़ा और सिर्फ असम में आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की गई. सर्वानंद सोनोवाल को केंद्रीय मंत्री रहते ही असम बीजेपी की कमान दी गई और चुनाव से चार महीने पहले उन्हें पार्टी का चेहरा बनाया गया.

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लंबे समय से उत्तर प्रदेश में बीजेपी कार्यकर्ता राज्य में एक चेहरे की मांग कर रहे हैं. यूपी के कई बीजेपी नेता मुख्यमंत्री बनने की चाह रखते हैं और हर किसी की अपनी लॉबी है.

बीजेपी के एक सूत्र ने कैच को बताया कि पार्टी ने हाल में ही एक सर्वेक्षण कराया है, जिसमें सीएम पद के लिए पसंदीदा उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया. यह सर्वे एक प्राइवेट एजेंसी ने किया है. सर्वेक्षण में वरुण गांधी, स्मृति ईरानी और योगी आदित्यनाथ का नाम सबसे ऊपर है. ये तीनों फिलहाल सांसद हैं.

1. वरुण गांधी

सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी का नाम सबसे ऊपर है. सर्वेक्षण कहता है कि नेहरू-गांधी परिवार के युवा सदस्य और स्थानीय होने के चलते उनकी व्यापक अपील है. वह एक अच्छे वक्ता हैं और लोगों को जोड़ने की क्षमता रखते हैं.

उनके खिलाफ सिर्फ एक बात जा रही है. बीजेपी सूत्र के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अभी भी उनके कोलकाता रैली से जुड़े बयान पर नाराज हैं. फरवरी, 2014 में मोदी की कोलकाता रैली में उपस्थित भीड़ के बारे में उन्होंने कहा था कि 'यह ठीक-ठाक था.'  उस समय वरुण पश्चिम बंगाल के प्रभारी और बीजेपी महासचिव थे.

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कहा जाता है कि बीजेपी महासिचव रहते हुए जब शाह को 2013 में उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया तो उन्होंने राज्य की राजनीति में वरुण गांधी को किनारे करना शुरू किया.

उत्तर प्रदेश में नेताओं के बीच छिड़े पोस्टर वार में वरुण के समर्थन वाले पोस्टर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं.

2. स्मृति ईरानी

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी सर्वेक्षण में दूसरे स्थान पर काबिज हैं. अमेठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने वाली ईरानी लगातार यूपी के दौरे पर रहती हैं.

हालांकि, स्थानीय बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईरानी बाहरी हैं. इस वजह से उन्हें और पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है. सर्वेक्षण के अनुसार ईरानी गैर-बीजेपी वोट को पार्टी से जोड़ने में ज्यादा सफल नहीं हो पाएंगी.

दिलचस्प बात है कि राज्य में लगे एक पोस्टर में वरुण गांधी को ईरानी के ऊपर वरीयता दी गई है.

3. योगी आदित्यनाथ

फायरब्रांड नेता और गोरखपुर से बीजेपी सांसद सर्वेक्षण में तीसरे स्थान पर हैं. योगी लगातार राज्य के राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं. राम मंदिर, गौरक्षा और धर्मांतरण जैसे संघ परिवार के पारंपरिक मुद्दों पर योगी कट्टर रुख रखते हैं और यही बात उन्हें कट्टरपंथी तबके में लोकप्रिय बनाती हैं.

हालांकि, सर्वे के अनुसार जाति संयोजन में योगी फिट नहीं बैठ रहे हैं. योगी ठाकुर हैं और राज्य में ठाकुरों की मजूबत लॉबी है. संयोग से केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी उत्तर प्रदेश से हैं और ठाकुर हैं. राजनाथ पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका नाम भी सीएम पद के लिए उछलता रहता है.

सर्वे के अनुसार अगर योगी का नाम आगे बढ़ाया जाता है तो ब्राह्मण, ओबीसी और दलित पार्टी से दूर हो सकते हैं. इसके अलावा योगी की हिंदूवादी छवि के चलते बीजेपी को हराने के लिए मुसलमान एकजुट होकर वोट कर सकते हैं.

उत्तर प्रदेश में पार्टी की तरफ से चुनावी चेहरा कौन होगा, इसका निर्णय बीजेपी और संघ को अभी करना है. चुनाव में करीब एक साल का वक्त बचा है. हालांकि राज्य में चर्चा है कि समय से पहले भी चुनाव हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है, इस सर्वे में उभरे लोगों का जल्द अंतिम मूल्यांकन हो सकता है और राज्य में बीजेपी की अगली पीढ़ी सामने आ सकती है.

First published: 6 June 2016, 3:53 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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