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बीजेपी: आप की उड़ती महत्वाकांक्षाओं की क्रैश लैंडिंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 June 2016, 12:37 IST
(पीटीआई)

भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में संसदीय सचिवों को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखने वाले बिल को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा है. सोमवार को राष्ट्रपति ने विधानसभा से पास हुए इस बिल को मंजूरी देने से मना कर दिया था.

बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आम आदमी पार्टी की उड़ती महत्वाकांक्षाओं की क्रैश लैंडिंग का ये एक उत्कृष्ट मामला है."

संबित पात्रा ने आम आदमी पार्टी की तरफ से पीएम मोदी पर हमले का पलटवार करते हुए कहा, "हम राष्ट्रपति पर सवाल नहीं उठा सकते, जबकि उन्होंने तकनीकी आधार पर इस मामले में फैसला लिया है."

संसदीय सचिव बिल को मंजूरी नहीं

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार को एक बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के संसदीय सचिवों को लाभ के पद से अलग रखने वाले बिल को मंज़ूरी देने से मना कर दिया है.

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दरअसल आम आदमी पार्टी की सरकार ने 21 विधायकों के संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से अलग करने का प्रस्ताव वाला बिल विधानसभा से पारित किया था, लेकिन राष्ट्रपति ने इस पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया है.

21 विधायकों की सदस्यता पर तलवार

ऐसे में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं, अगर इन सभी विधायकों की सदस्यता रद्द होती है, तो दोबारा 21 सीटों पर विधानसभा चुनाव कराया जा सकता है.

इस बीच बिल को मंजूरी न मिलने के बाद आम आदमी पार्टी की आपात बैठक हुई. बैठक में बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया.

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वहीं सभी 21 विधायक अब चुनाव आयोग जाने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ पार्टी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में भी है.

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में 2015 में दोबारा सरकार गठन के बाद अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव का पद दिया था, लेकिन वह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट (लाभ का पद) की श्रेणी में आ गया.

इस मामले में विपक्ष ने केजरीवाल सरकार पर काफ़ी सवाल उठाए, जिसके बाद राज्य सरकार अपने विधायकों को बचाने के लिए संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से दूर रखने के लिए एक बिल लेकर आई.

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सोमवार को इस बिल को राष्ट्रपति ने मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद से आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

First published: 14 June 2016, 12:37 IST
 
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